स्वास्थ्य

WHO: नई दवाओं की क़िल्लत से, बेहद ख़तरनाक बैक्टीरिया से ख़तरनाक जोखिम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि सामान्य संक्रमणों के नए उपचारों के अभाव ने लोगों को, दुनिया के सबसे ख़तरनाक बैक्टीरिया की चपेट के जोखिम का सामना करने के लिये असुरक्षित छोड़ दिया है.

इन्सुलिन सुलभता बढ़ाने और डायबिटीज़ मौतों की संख्या घटाने के लिये ग्लोबल कॉम्पैक्ट 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डायबिटीज़ (मधुमेह) की विकराल होती चुनौती की पृष्ठभूमि में सस्ती इन्सुलिन की उपलब्धता व पहुँच को बढ़ाने के लिये, अपने प्रयास तेज़ किये हैं. इस जीवनदायी दवा की खोज के 100 वर्ष पूरे होने के मौक़े पर, ‘ग्लोबल डायबिटीज़ कॉम्पैक्ट’ पेश किया गया है जिसका एक अहम उद्देश्य, उन निम्न व मध्य आय वाले देशों में गुणवत्तापूर्ण इन्सुलिन की सुलभता सुनिश्चित करना है जहाँ फ़िलहाल, इसकी माँग को पूरा कर पाना मुश्किल है.    

पारम्परिक खाद्य बाज़ारों में वन्य स्तनधारी जीवों की बिक्री पर रोक की माँग 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और उसके साझीदार संगठनों ने देशों से पारम्परिक खाद्य बाज़ारों में जीवित जंगली स्तनपायी पशुओं की बिक्री पर रोक लगाने का आग्रह किया है. यूएन एजेंसी के मुताबिक़ वैश्विक महामारी कोविड-19 जैसी अन्य घातक संक्रामक बीमारियों को उभरने व फैलने से रोकने के लिये यह ज़रूरी है कि इन पारम्परिक बाज़ारों (Wet markets) में सुरक्षा व स्वच्छता मानकों का सख़्ती से पालन किया जाए.  

कोविड-19: महामारी का अन्त अभी दूर, मगर आशावान होने की वजह भी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि अनेक देशों में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्शाती है कि दुनिया अभी, महामारी पर पूर्ण रूप से क़ाबू पाने से दूर है. मगर उन्होंने स्पष्ट किया है कि न्यायसंगत टीकाकरण और साबित हो चुके सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के ज़रिये, कोरोनावायरस को नियन्त्रण में किया जा सकता है, जैसाकि बहुत से देशों ने करके दिखाया है.  

कोविड-19: निम्न आय वाले देशों को कुल वैक्सीन ख़ुराकों का केवल 0.2 प्रतिशत मिला

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोविड-19 वैक्सीन की अधिकांश ख़ुराकें अब तक धनी देशों में स्थानीय आबादी के लिये ही सम्भव हो पाई हैं. कोरोनावायरस संक्रमण की रोकथाम के लिये विश्व भर में 70 करोड़ से ज़्यादा ख़ुराकें दी जा चुकी हैं, जिनमें से 87 फ़ीसदी अपेक्षाकृत धनी देशों में दी गई हैं जबकि निम्न आय वाले देशों को केवल 0.2 प्रतिशत ख़ुराकें ही मिल पाई हैं.

भारत: कोविड-19 के संक्रमण में तेज़ उभार से चिन्ता की लहर

भारत में, मार्च महीने के अन्तिम दिनों और अप्रैल के शुरू में, कोरोनावायरस के संक्रमण मामलों में अचानक तेज़ी से उछाल देखा गया है. अलबत्ता, देश में, कोविड-19 की वैक्सीन का टीकाकरण भी विशाल पैमाने पर चल रहा है. फिर भी, संक्रमण के मामलों में इतनी तेज़ी चौतरफ़ा चिन्ता का कारण बन रही है. भारत में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि डॉक्टर रॉड्रिको ऑफ़्रिन ने देश में मौजूदा हालात और टीकाकरण मुहिम से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दिये हैं...

कोवैक्स: 100 से ज़्यादा देशों व अर्थव्यवस्थाओं में वैक्सीन ख़ुराकें वितरित

कोविड-19 वैक्सीन के न्यायसंगत ढंग से वितरण के लिये संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में स्थापित, ‘कोवैक्स’ पहल के तहत अब तक, 100 से ज़्यादा देशों व अर्थव्यवस्थाओं में साढ़े तीन करोड़ से ज़्यादा ख़ुराकें वितरित की जा चुकी हैं. इस व्यवस्था के तहत टीकों की पहली खेप 24 फ़रवरी को घाना पहुँची थी और उसके बाद से अब तक, 42 दिनों में, वैक्सीन वितरण का दायरा व्यापक स्तर पर बढ़ाया गया है.

रक्त के थक्के जमने व ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन में सम्बन्ध 'सम्भव', मगर 'दुर्लभ'

कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिये ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन दिये जाने से कुछ लोगों में रक्त के थक्के जमने के दुर्लभ मामले सामने आ सकते हैं, मगर इनके बीच आपसी सम्बन्ध की पुष्टि के लिये और ज़्यादा शोध की आवश्यकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों ने बुधवार को कहा है कि ऐसे मामलों को वैक्सीन की ख़ुराक दिये जाने के बाद, बेहद कम नज़र आने वाले नुक़सान (side-effects) के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिये.

कोविड-19: विषमताओं पर पार पाने के लिये पाँच अहम समाधान 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोविड-19 महामारी द्वारा उजागर विषमताओं को दूर करने के लिये पाँच महत्वपूर्ण उपायों को पेश किया है. उन्होंने बुधवार को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर वैक्सीन, परीक्षण और उपचार की न्यायसंगत सुलभता, बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल में निवेश, सामाजिक संरक्षा व समावेशी पड़ोस सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सूचना प्रणालियों को मज़बूती प्रदान किये जाने का आहवान किया है.   

कोविड-19: ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के फ़ायदे, जोखिम से कहीं ज़्यादा सकारात्मक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अधिकारी ने कहा है कि कोविड-19 वायरस की ऑक्सफ़र्ड-ऐस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन के लाभ अब भी व्यापक रूप में सकारात्मक ही हैं, और रक्त के थक्के जमने के बहुत कम लेकिन अत्यन्त गम्भीर मामलों की तुलना में, कहीं ज़्यादा लाभप्रद भी हैं.