स्वास्थ्य

स्तनपान और कोविड-19 के बीच सम्बन्ध नगण्य है – यूएन स्वास्थ्य एजेंसी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि स्तनपान कराने से कोविड-19 संक्रमण होने का ख़तरा नगण्य है और इस प्रकार का कोई भी मामला अब तक दर्ज नहीं किया गया है. साथ ही यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने स्तनपान को बढ़ावा देने और ज़रूरी समर्थन जुटाने की पुकार लगाई है. संगठन की ओर से यह अपील ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के अवसर पर जारी की गई है जिसमें आगाह भी किया गया है कि माँ का दूध ना मिल पाने की वजह से हर वर्ष आठ लाख 20 हज़ार बच्चों की मौत होती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को 300 अरब डॉलर का नुक़सान होता है. 

सीसा धातु से 80 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर

यूनीसेफ़ और ‘प्योर अर्थ’ संस्थान की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सीसा धातु एक बड़े पैमाने पर बच्चों को प्रभावित कर रहा है. वैश्विक स्तर पर औसतन हर तीन में से एक बच्चों के रक्त में सीसा धातु का स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे भी ज़्यादा है. इनमें से लगभग आधे बच्चे दक्षिण एशिया में रहते हैं. स्थिति की गम्भीरता को पेश करती ये वीडियो रिपोर्ट...

सामाजिक दूरी - क्यों है ज़रूरी?

कोरोनावायरस का सुपर विलेन आपके पीछे आ रहा है. लेकिन आपको भागने, छिपने या डरने की ज़रूरत नहीं है. आपको ज़रूरत है – उचित शारीरिक दूरी बनाने की! ये वीडियों  देखें और सभी को बताएँ कि खुद को कोरोना वायरस सुपर विलेन से बचाने के लिये शारीरिक दूरी बरतना क्यों ज़रूरी है? देखें ये एनीमेशन वीडियो...
 

कोविड-19: वैक्सीन की तलाश में प्रगति, सटीक औज़ार अब भी उपलब्ध नहीं

वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिये अनेक प्रकार की वैक्सीन पर तेज़ी से काम आगे बढ़ रहा है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि वैक्सीन के ज़रिये इस महामारी से बचाव के लिये फ़िलहाल कोई सटीक औज़ार उपलब्ध नहीं है और शायद भविष्य में भी ऐसा ना हो पाए. शुक्रवार को यूएन एजेंसी की आपात समिति की बैठक में सर्वमत से ये सहमति जताई गई थी कि कोविड-19 अब भी अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली वैश्विक स्वास्थ्य आपदा है. 

कोविड-19 अब भी है अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली वैश्विक स्वास्थ्य आपदा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आपात समिति ने कोविड-19 महामारी के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई के लिये यूएन एजेंसी और साझीदार संगठनों की सराहना की है. साथ ही समिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब तक एक करोड़ 70 लाख लोगों को संक्रमित करने वाला और छह लाख 50 हज़ार से अधिक लोगों की मौत का कारण बनने वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट अब भी एक अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति है जो फ़िलहाल ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही है.

नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान है सर्वोत्तम आहार

शनिवार, 1 अगस्त, को ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ की शुरुआत हुई है जिसके तहत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने एक साझा अपील जारी करके स्तनपान से होने वाले फ़ायदों और उसके सही तरीक़ों से जुड़ी अहम जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिये परामर्श सेवाएँ सुनिश्चित किये जाने की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसी के मुताबिक नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले छह महीनों में सिर्फ़ स्तनपान कराना चाहिये और उसके बाद भी लगभग दो साल तक स्तनपान जारी रखने के प्रयास करने चाहिये.

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19: ‘सदी में एक बार आने वाला संकट’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक महामारी कोविड-19 को एक ऐसा स्वास्थ्य संकट क़रार दिया है जो सदी में एक ही बार आता है और जिसके प्रभाव आने वाले कई दशकों तक महसूस किये जाते रहेंगे. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की आपात समिति ने 30 जनवरी 2020 को कोविड-19 को अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा घोषित किये जाने की सिफ़ारिश की थी जिसके छह महीने पूरे होने पर शुक्रवार, 31 जुलाई, को समिति ने फिर बैठक कर मौजूदा हालात की समीक्षा की है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की सलाह – ख़ुद को 'अपराजेय' ना समझें युवा

वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण से गम्भीर रूप से पीड़ित होने का ख़तरा वृद्धजनों को सबसे अधिक है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवा पीढ़ी को आगाह किया है कि इस महामारी से उन्हें भी पूरी तरह सचेत रहना होगा. कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक एक करोड़, 68 लाख से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और छह लाख, 62 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई है. 

कोविड-19: दक्षिणपूर्व एशिया की टिकाऊ व समावेशी पुनर्बहाली का ख़ाका पेश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दक्षिणपूर्व एशिया को वैश्विक महामारी कोविड-19 से असरदार ढँग से उबारने के लिये विषमताओं को दूर करना, डिजिटल खाइयों को पाटना, अर्थव्यवस्थाओं को हरित बनाना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और सुशासन सुनिश्चित करना अहम होगा. यूएन प्रमुख ने गुरुवार को इस क्षेत्र पर केन्द्रित एक नया नीतिपत्र (Policy brief) जारी किया है जिसमें बेहतर पुनर्बहाली के लिये सिफ़ारिशें पेश की गई हैं. 

सीसा धातु से 80 करोड़ बच्चों के दिमाग़ों पर असर, आधे बच्चे दक्षिण एशिया में

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ और ‘प्योर अर्थ’ की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि  दुनिया भर के लगभग तीन चौथाई बच्चे सीसा धातु के ज़हर के साथ जी रहे हैं. इतनी बड़ी संख्या में  बच्चों के सीसा धातु से प्रभावित होने के मद्देनज़र एसिड बैटरियों को लापरवाही से फेंकने के ख़तरनाक चलन को बन्द करने का आहवान भी किया गया है.