स्वास्थ्य

भुखमरी का बढ़ता दायरा ( वीडियो रिपोर्ट)

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बीते पाँच वर्षों में भुखमरी व कुपोषण के विभिन्न रूपों का शिकार लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है. कोविड-19 महामारी से यह समस्या और भी ज़्यादा विकराल रूप धारण कर सकती है. एक वीडियो रिपोर्ट...

मध्य पूर्व में अदावत फिर बढ़ी, कोविड -19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में मुश्किलें

मध्य पूर्व शान्ति प्रक्रिया के लिये संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत निकोलय म्लैदमॉफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में इसराइली और फ़लस्तीनियों के बीच नज़र आई एकजुटता अब बिखरने लगी है जिससे लोगों की ज़िन्दगी के लिए जोखिम पैदा होने के साथ-साथ अर्थव्यस्था में मन्दी आने लगी है. साथ ही इसराइल द्वारा पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को छीनने का ख़तरा भी बरक़रार है.

यमन: कोविड-19 के माहौल में लोग डर, नफ़रत और विस्थापन की भी चपेट में

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यमन में कोविड-19 महामारी के फैलने के डर ने लोगों को नए सिरे से विस्थापित होने के लिये मजबूर कर दिया है. अनेक वर्षों से युद्धग्रस्त देश यमन में बहुत से लोगों को जीवित रहने की ख़ातिर अपने पास बचा-खुचा सामान बेचने के लिये भी मजबूर होना पड़ा है. 

कोविड-19: आदिवासी समुदायों में संक्रमण बढ़ने से बढ़ी चिन्ता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि वैसे तो कोविड-19 से हर इन्सान प्रभावित हुआ है लेकिन विश्व के निर्धनतम और निर्बलतम लोगों के लिये इस महामारी का जोखिम ज़्यादा है. वायरस से सबसे अधिक प्रभावितों में आदिवासी समुदाय, विशेषत: अमेरिका क्षेत्र के आदिवासी लोग भी हैं जहाँ अब यह महामारी तेज़ रफ़्तार से फैल रही है. यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को बताया कि 6 जुलाई तक अमेरिका क्षेत्र में 70 हज़ार आदिवासी लोगों के संक्रमित होने और दो हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौतें होने की पुष्टि हुई थी.

नेलसन मण्डेला पुरस्कार: मानव सेवा में समर्पित ग्रीस और गिनी के कार्यकर्ता सम्मानित

कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद के लिये वर्षों से प्रयासरत ग्रीस की मारियाना वार्दिनॉयॉनिस और महिला जननांग विकृति का ख़ात्मा करने की मुहिम में अहम भूमिका निभाने वाले गिनी के डॉक्टर मॉरिसाना कोयाते को वर्ष 2020 के नेलसन मण्डेला पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई है. हर पाँचवे वर्ष में दिये जाने वाले मण्डेला पुरस्कार के ज़रिये मानवता की सेवा में जुटे कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाता है.

कोविड-19: युवाओं के लिये मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने की ज़रूरत

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण युवाओं के कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य पर असर हुआ है. कोरोनावायरस संकट की नई वास्तविकताओं के मद्देनज़र युवा अपनी जि़न्दगी को किस तरह ढाल सकते हैं और मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखते हुए आगे बढ़ सकते हैं, संयुक्त राष्ट्र ने इसी विषय पर बुधवार को एक वेबिनार का आयोजन किया जिसमें महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भी शिरकत की. 

कोविड-19: खाद्य सुरक्षा को क्षति कम करने के लिए ‘देश-स्फूर्त’ दृष्टिकोण ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन के प्रमुख ने कोरोनोवायरस महामारी ख़त्म होने के बाद के लिये एक नई योजना शुरू करते हुए  कहा है कि अब 'सामान्य तरीक़े से व्यापार चलाना’ कोई विकल्प नहीं रह गया है और देश स्तर पर आधारित नीतियाँ बनाने और लागू करने के विकल्प पर भी ग़ौर करना होगा.

कोविड-19: जीवनदायी टीकाकरण सेवाओं में बड़ी गिरावट की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से टीकाकरण सेवाओं में आए व्यवधान की वजह से जीवनरक्षक वैक्सीन पाने वाले बच्चों की संख्या में चिन्ताजनक गिरावट दर्ज किये जाने की चेतावनी जारी की है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) का कहना है कि इन रुकावटों और सुरक्षा चक्र टूटने से अब तक कड़ी मेहनत से हासिल हुई प्रगति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

भारत में कोरोना योद्धा - महामारी के दौरान मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल

कोविड-19 महामारी के कारण हुई तालाबन्दी से स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे  यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. इन ठोस चुनौतियों के बावजूद, कई साहसी महिलाओं ने आगे आकर ये सुनिश्चित किया कि महामारी के दौरान महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य व अधिकारों की उपेक्षा न हो पाए. विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर, भारत की ऐसी ही कुछ महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ सेवाओं की झलक, जो संकट के समय पूरी प्रतिबद्धता से अपना कर्तव्य निभा रही हैं. 
 

कोविड-19: ‘ग़लत दिशा’ में आगे जा रहे हैं अनेक देश

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के संक्रमण के तेज़ी से बढ़ते मामलों से चिन्तित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी जारी की है कि बहुत से देश ग़लत दिशा में आगे जा रहे हैं और आने वाले दिनों में वहाँ हालात और भी ज़्यादा ख़राब हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि व्यापक रणनैतिक कार्रवाई और स्थानीय लोगों द्वारा ऐहतियाती उपायों के पालन से संक्रमण की कड़ी को तोड़ना सम्भव है लेकिन कई देशों में स्थिति की गम्भीरता के अनुरूप क़दम नहीं उठाए जा रहे हैं.