स्वास्थ्य

कोविड-19 ने क़ैदियों को बुरी तरह प्रभावित किया - यूएन विशेषज्ञ

जेल सुधारों पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ फ़िलिप माइज़नर ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान, दुनिया भर के बन्दीगृहों में लोगों पर विषमतापूर्ण असर हुआ है. जेलों में कोविड-19 महामारी के असर के मुद्दे पर, बुधवार को जापान के क्योटो में, अपराध रोकथाम और आपराधिक न्याय पर संयुक्त राष्ट्र काँग्रेस की 14वीं बैठक हो रही है. इस आयोजन में शिरकत कर रहे फ़िलिप माइज़नर से यूएन न्यूज़ के साथ विशेष बातचीत...

दुनिया में हर तीन में से एक महिला, हिंसा पीड़ित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और साझीदार संगठनों का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, युवा उम्र से ही शुरू हो जाती है और बुरी तरह व गहराई से जड़ें जमाए हुए है. इस रिपोर्ट को महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा पर, अब तक का सबसे विस्तृत अध्ययन बताया गया है, जिसके अनुसार, अपने जीवनकाल में, हर तीन में से एक महिला यानि लगभग 73 करोड़ 60 लाख महिलाओं को, शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है, और इस आँकड़े में पिछले एक दशक में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है.

'कोविड-19: वायरस भेदभाव नहीं करता, समाज करता है'

वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के प्रयासों में अग्रिम मोर्चे पर मुस्तैद महिला चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा संकट ने महिलाओं के लिये स्वास्थ्य देखभाल की सुलभता और पेशवर जगत में समाई, लैंगिक खाईयों को उजागर किया है. उन्होंने लैंगिक चुनौतियों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि कोरोनावायरस ने तो भेदभाव नहीं किया, लेकिन समाजों ने ज़रूर किया है. 

कोविड-19: वैक्सीन उत्पादन की गति तत्काल बढ़ाना ज़रूरी, चार उपाय पेश

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि यह सप्ताह, न्यायसंगत वैक्सीन वितरण के लिये शुरू की गई, कोवैक्स पहल के नज़रिये से अभूतपूर्व साबित हुआ है. कोवैक्स के तहतअब तक, 20 देशों में दो करोड़ टीकों की ख़ुराकें पहुँचाई जा चुकी हैं. मगर, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने आगाह भी किया है कि वैक्सीन उत्पादन की रफ़्तार धीमी है और महामारी पर जल्द क़ाबू पाने के लिये, वैक्सीन उत्पादन क्षमता, जल्द से जल्द बढ़ानी होगी. 

'महामारी से जुड़ी पाबन्दियों से करोड़ों बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर जोखिम'

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान राष्ट्रव्यापी सार्वजनिक स्वास्थ्य आदेशों या अनुशंसाओं के कारण, दुनिया भर में करोड़ों बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिये जोखिम उत्पन्न हो गया है, और इन हालात के कारण, हर सात में से लगभग एक बच्चा अपने घर पर ही रहने को विवश है.

2050 तक, उपचार के अभाव में, ढाई अरब लोगों की श्रवण क्षमता खोने का ख़तरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में, हर चार में से एक व्यक्ति, यानि लगभग 25 प्रतिशत आबादी, किसी ना किसी हद तक, श्रवण क्षमता में कमी की अवस्था के साथ जी रही होगी. यूएन एजेंसी ने, बुधवार, 3 मार्च, को ‘विश्व श्रवण दिवस’ के अवसर पर पहली बार, इस विषय में एक रिपोर्ट जारी की है. 

यूएन प्रमुख को लगा दूसरा टीका

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, शुक्रवार 28 फ़रवरी को, न्यूयॉर्क के एक वैक्सीन केन्द्र में, कोविड-19 का दूसरा टीका लगवाया. उनकी आयु 65 वर्ष से अधिक होने के कारण, दूसरा टीका लगवाने के लिये उनका नाम, प्राथमिकता सूची में आया था. यूएन समर्थित एक पहल के तहत, वर्ष 2021 के अन्त तक, दो अरब लोगों को कोविड-19 के टीके लगवाने का लक्ष्य है.

वैक्सीनें कैसे कारगर होती हैं!

वैक्सीन टीके, हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली को, वायरस की पहचान, पहले से ही करने और उसके ख़िलाफ़ सुरक्षा कवच बनाने में सक्षम बनाते हैं. वैक्सीन टीके, हमें सुरक्षित बनाते हैं और वायरस को फैलने से रोकते हैं. अगर पर्याप्त संख्या में, लोगों को टीके लग जाएँ, तो पूरे समुदाय की सुरक्षा की जा सकती है. देखें ये वीडियो...

'डूबना या तैरना, एक साथ': कोवैक्स के बारे में 5 अहम बातें

कोविड-19 महामारी के सन्दर्भ में, हाल के दिनों में कोवैक्स का बहुत ज़िक्र सुना - देखा गया है. ख़ासतौर पर, यह कहते सुना गया है कि कोविड-19 की वैक्सीन की पहली खेप, कोवैक्स के तहत घाना व अन्य अफ़्रीकी देशों को भेजी गई है. कोवैक्स के बारे में कुछ अहम जानकारी, यूएन न्यूज़ ने तैयार की है...

कोविड-19: सात हफ़्तों में पहली बार संक्रमण मामलों में वृद्धि

कोविड-19 महामारी के संक्रमण मामलों में लगातार छह सप्ताह तक गिरावट आने के बाद, पिछले हफ़्ते पहली बार, फिर से कोरोनावायरस संक्रमण मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इस बीच, कोवैक्स पहल के तहत घाना और आइवरी कोस्ट में वैक्सीन ख़ुराकें पहुँचने के पश्चात, टीकाकरण शुरू हो गया है, और पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों और निर्बल समूहों को टीके लगाए जा रहे हैं.