स्वास्थ्य

नौनिहालों और माता-पिता को बेहतर माहौल मिलना ज़रूरी

कामकाज और पारिवारिक जीवन के बीच स्वस्थ संतुलन क़ायम करने और दोनों स्थानों पर आनंदपूर्वक जीवन जीने में सहायक नीतियाँ बनाने में अनेक विकसित और धनी देश बहुत पीछे हैं. जबकि स्वीडन, नॉर्वे, आइसलैंड, एस्तोनिया और पुर्तगाल ऐसे देश हैं जहाँ कामकाजी जीवन के साथ परिवारिक जीवन जीने और माता-पिता के लिए छोटे बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना आसान होता है.

अस्पताल की अंधेरी दुनिया में सूरज की रौशनी

अब्राहम लियर ने दक्षिणी सूडान के जोंगलेई राज्य में स्थित एक मात्र सक्रिय स्वास्त्य केंद्र - बोर अस्पताल में काफ़ी लंबे समय से काम किया है और उन्होंने वहाँ बहुत सी घुप्प अंधेरी रातें देखी हैं, मगर अब रौशनी की किरणों ने अस्पताल की अंधेरी रातों को जगमगा दिया है.

हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में मानसिक समस्याएं ले रही हैं विकराल रूप

हिंसा और संघर्ष प्रभावित इलाक़ों में रह रहे हर पांच व्यक्तियों में से एक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक निवेश किए जाने की अपील की है.

यौन संक्रमण से हर दिन दस लाख लोग प्रभावित

संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि दुनिया भर में यौन गतिविधियों से होने वाले संक्रमण के बढ़ते मामले तुरंत चेत जाने की चेतावनी देते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार हर 25 में से एक व्यक्ति ऐसे यौन संक्रमण से प्रभावित है जिसका इलाज संभव है. इसका अर्थ है कि हर लगभग दस लाख लोग यौन संक्रमण का शिकार हो जाते हैं.

सुरक्षित आहार है सेहमतंद जीवन का आधार

असुरक्षित भोजन हर साल चार लाख से ज़्यादा लोगों की मौत का कारण बनता है - इनमें पांच साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या सवा लाख है. इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए 7 जून को पहली बार ‘सुरक्षित आहार दिवस’ मनाया जा जा रहा है जिसके ज़रिए दूषित भोजन से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने और उनकी रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

भारी-भरकम ख़र्च से जच्चा-बच्चा को है गंभीर ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि बहुत महंगी स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल की वजह से बहुत सी महिलाओं को बच्चे को जन्म देने से पहले और बाद में अक्सर जच्चा-बच्चा दोनों का ही जीवन ख़तरे में डालना पड़ता है. यूनीसेफ़ ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी है जिसमें बताया गया है कि बहुत सी गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर ना तो कोई डॉक्टर मिलता है और ना ही कोई नर्स या दाई उपलब्ध होती है.

शिशु विकास के लिए माता-पिता की देखभाल ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने दुनिया भर के नेताओं का आहवान किया है कि वो पारिवारिक जीवन को आसान और बेहतर बनाने वाली नीतियाँ बनाएँ ताकि माता-पिता और अभिभावकों को अपने बच्चों को जीवन की अच्छी शुरूआत देने में मदद मिल सके. इस बारे में और ज़्यादा जागरूकता बढ़ाने के लिए यूनीसेफ़ ने जून महीने को माता-पिता व अभिभावक महीना घोषित किया है.

तंबाकू को अपनी ज़िंदगी की साँसें ना चुराने दें, स्वास्थ्य एजेंसी का संदेश

तंबाकू सेवन से हर वर्ष लगभग 80 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इन गंभीर हालात के मद्देनज़र विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तमाम देशों की सरकारों से धूम्रपान की चुनौती का सामना करने के लिए तेज़ उपाय करने का आग्रह किया है.

छह लाख अफ़ग़ान बच्चे कुपोषण से मौत के कगार पर

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में मदद के लिए अगर तुरन्त क़रीब 70 लाख डॉलर की रक़म मुहैया नहीं कराई गई तो देश में गंभीर कुपोषण के शिकार लाखों बच्चों की मौत हो सकती है.

काँगो में ईबोला नियंत्रण के प्रयासों के लिए समय बहुत ज़्यादा नहीं

संयुक्त राष्ट्र ने काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में ईबोला पर क़ाबू पाने के लिए अपने प्रयास और ज़्यादा तेज़ और सघन करने की घोषणा की है. काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य में ईबोला की महामारी फैले हुए क़रीब दस महीने हो चुके हैं और हाल के सप्ताहों में ईबोला के संक्रमण के मामलों में भी बढ़ोत्तरी हुई है.