स्वास्थ्य

कोविड-19 के बावजूद पोलियो के ख़िलाफ़ मुहिम

पाकिस्तान में यूनीसेफ़ की एक स्टाफ़ सदस्य हुसना गुल कोविड-19 वायरस का संक्रमण होने के बाद के हालात से जूझते हुए भी ये सुनिश्चित करने में जी-जान से जुटी हुई हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को पोलियो से बचाने वाली दवाई पिलाई जी सके.

कोविड-19: ‘वैक्सीन राष्ट्रवाद’ के ख़िलाफ़ चेतावनी, न्यायसंगत वितरण पर बल 

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिए असरदार वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने “वैक्सीन राष्ट्रवाद” के ख़तरे के प्रति सचेत किया है. उन्होंने दोहराया है कि कोरोनावायरस संकट पर पार पाने के लिए वैश्विक एकजुटता बेहद अहम है और कोई भी कहीं भी तब तक सुरक्षित नहीं है जब तक हर एक हर जगह सुरक्षित नहीं है.

कोविड-19: बाल संरक्षण व सामाजिक सेवाओं में व्यवधान बना चुनौती

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण घरेलू हिंसा की रोकथाम और ज़रूरी सहायता सेवाओं में आए व्यवधान से 100 से ज़्यादा देशों मे बच्चे शोषण व दुर्व्यवहार का शिकार होने के जोखिम का सामना कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के एक नए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है.  यूनीसेफ़ ने कहा है कि सरकारों को जल्द दीर्घकालीन उपायों को अपनाते हुए बाल हेल्पलाइन सेवाओं को मज़बूत बनाना होगा और सामाजिक सेवाओं में निवेश करना होगा ताकि बच्चों को इस ख़तरे से बचाया जा सके.

कोविड-19: स्कूलों में स्वच्छ जल व हाथ धोने की सुविधा का प्रबंध ज़रूरी

दुनिया में लगभग 82 करोड़ बच्चों के पास स्कूलों में हाथ धोने की बुनियादी सुविधाओं का अभाव है जिससे उनके कोविड-19 महामारी और अन्य संक्रामक बीमारियों से संक्रमित होने का ख़तरा ज़्यादा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साझा निगरानी कार्यक्रम द्वारा गुरुवार को जारी नई रिपोर्ट के आँकड़े दर्शाते हैं कि विश्व के हर पाँच में से दो स्कूलों में महामारी से पहले ही इन मूलभूत सुविधाओं की कमी थी. यूएन एजेंसियों के मुताबिक साफ़-सफ़ाई का समुचित प्रबंध किया जाना स्कूलों को फिर खोले जाने की एक अनिवार्य शर्त है. 

कोविड-19: पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में फिर शुरू हुआ पोलियो टीकाकरण अभियान

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से टीकाकरण अभियानों में आए व्यवधान के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में पोलियो उन्मूलन अभियान फिर शुरू हो गए हैं. महामारी के कारण पोलियो टीकाकरण कार्यक्रमों की रफ़्तार थमने से लगभग पाँच करोड़ बच्चे पोलियो वैक्सीन की ख़ुराक से दूर थे और दोनों देशों में पोलियो के नए मामले सामने आए थे. 

कोविड-19: महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में ‘उम्मीद की किरण’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा है कि कोरोनावायरस संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या इस सप्ताह दो करोड़ का आँकड़ा पार कर जाने की सम्भावना है. यूएन एजेंसी प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि बहुत से देशों को महामारी पर क़ाबू पाने में काफ़ी हद तक सफलता भी मिली है जो इस लड़ाई में आशा का संचार करता है और फैलाव पर क़ाबू पाने में बुनियादी स्वास्थ्य उपायों की अहमियत को रेखांकित करता है. 

कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिये वैश्विक एकजुटता ही एक मात्र विकल्प

दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के संक्रमण के लगभग एक करोड़ 85 लाख से ज़्यादा मामले हो गए हैं और सात लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने गुरूवार को तमाम देशों से इस महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में एकजुट होने की अपील फिर दोहराई है.

कोविड-19 के दौरान धार्मिक कार्यों के लिये मार्गदर्शिका जारी

यूनीसेफ़ और अनेक आस्था समूहों ने कोविड-19 के दौरान अपने धर्म और आस्था के रास्ते पर सुरक्षापूर्वक चलने, ग़लत सूचनाओं व जानकारी का मुक़ाबला करने और कमज़ोर और वंचित लोगों की मदद करने के लिये दिशानिर्देश जारी किये हैं. 

स्तनपान और कोविड-19 के बीच सम्बन्ध नगण्य है – यूएन स्वास्थ्य एजेंसी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि स्तनपान कराने से कोविड-19 संक्रमण होने का ख़तरा नगण्य है और इस प्रकार का कोई भी मामला अब तक दर्ज नहीं किया गया है. साथ ही यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने स्तनपान को बढ़ावा देने और ज़रूरी समर्थन जुटाने की पुकार लगाई है. संगठन की ओर से यह अपील ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के अवसर पर जारी की गई है जिसमें आगाह भी किया गया है कि माँ का दूध ना मिल पाने की वजह से हर वर्ष आठ लाख 20 हज़ार बच्चों की मौत होती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को 300 अरब डॉलर का नुक़सान होता है. 

सीसा धातु से 80 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर

यूनीसेफ़ और ‘प्योर अर्थ’ संस्थान की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सीसा धातु एक बड़े पैमाने पर बच्चों को प्रभावित कर रहा है. वैश्विक स्तर पर औसतन हर तीन में से एक बच्चों के रक्त में सीसा धातु का स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे भी ज़्यादा है. इनमें से लगभग आधे बच्चे दक्षिण एशिया में रहते हैं. स्थिति की गम्भीरता को पेश करती ये वीडियो रिपोर्ट...