स्वास्थ्य

पोलियो और ख़सरा जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिये 'तत्काल कार्रवाई' की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया भर में कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण में आए व्यवधान के कारण लाखों बच्चों के पोलियो और ख़सरा का जोखिम बहुत बढ़ गया है. ये दोनों बेहद घातक बीमारियाँ हैं मगर ये भी सही है कि इन्हें रोका जा सकता है.

क़रीब एक तिहाई बच्चे, स्कूलों में होते हैं - हिंसा व बदमाशी के शिकार

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया भर में बच्चों को स्कूलों में हिंसा और डराने-धमकाने यानि बदमाशी का सामना करना पड़ रहा है, हर तीन में से एक छात्र को कम से कम एक महीने में हमलों का निशाना बनाया जाता है, और 10 में से एक बच्चे को, साइबर बदमाशी का भी सामना करना पड़ता है.

महामारी ने बदल दिया कामकाजी ढाँचा

कोविड-19 महामारी और ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र लागू की गई सख़्त पाबन्दियों के कारण बड़ी संख्या में कम्पनियों और कर्मचारियों के कामकाज के ढर्रे में रातों-रात व्यापक बदलाव आया है. कुछ लोगों के लिये घर बैठकर काम करने से जीवन आसान और उत्पादकता में सुधार आया है जबकि अन्य के लिये मानो दिन के 24 घण्टे ही ऑफ़िस के कामकाज में तब्दील हो गए हैं, जिससे यह वैकल्पिक व्यवस्था मानसिक थकावट का सबब भी बन रही है. हारवर्ड बिज़नेस स्कूल में प्रोफ़ेसर जैफ़्री पोल्ज़र और अन्य सहयोगी विशेषज्ञों के अध्ययन के नतीजों पर आधारित एक रिपोर्ट... 

स्वास्थ्य प्रणालियों में निवेश के ज़रिये ‘वायरस पर क़ाबू पाना सम्भव’

मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियाँ और वैश्विक तैयारियाँ ना केवल भविष्य में एक निवेश हैं बल्कि मौजूदा कोविड-19 स्वास्थ्य संकट से निपटने में असरदार जवाबी कार्रवाई की बुनियाद भी हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने दुनिया के अनेक देशों में संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच सोमवार को आगाह किया है कि पुख़्ता कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिये यह एक अहम क्षण है. 

कोविड-19: संक्रमण से दीर्घकालीन स्वास्थ्य पर असर के मामले चिन्ताजनक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोविड-19 महामारी के उन मामलों पर चिन्ता जताई है जिनमें लोग कोरोनावायरस के संक्रमण से उबरने के बावजूद लम्बे समय तक पूर्ण रूप से स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे है. इस बीच गुरूवार को आपात समिति की बैठक में मौजूदा हालात की समीक्षा के बाद स्पष्ट किया गया है कि वैश्विक महामारी अब भी अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा है. 

कोविड-19: वैज्ञानिक शोध की उपलब्धता और सुलभता को बढ़ावा देने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र की तीन प्रमुख एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने वैज्ञानिक शोध को सभी के लिये सुलभ बनाये जाने (Open science) की दिशा में वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया है. यूएन अधिकारियों ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ जवाबी कार्रवाई में पारस्परिक सहयोग को बेहद अहम बताया है और तथ्य-आधारित ज्ञान को महज़ राय के रूप में पेश किये जाने में निहित जोखिमों के प्रति भी आगाह किया है. 

कोविड-19: विज्ञान, एकता और एकजुटता, महामारी को हराने के कारगर औज़ार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि बेहतर तैयारी, विज्ञान को सुनने व समझने और एकजुट कार्रवाई ऐसे चन्द औज़ार हैं जिनका इस्तेमाल दुनिया भर में सभी देश कोरोनावायरस संकट पर क़ाबू पाने में कर सकते हैं. यूएन महासचिव गुटेरेश ने रविवार को विश्व स्वास्थ्य शिखर वार्ता को सम्बोधित करते हुए यह बात कही.

कोविड-19: महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में अगले कुछ महीने 'बेहद कठिन'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के बढ़ते मामलों से चिन्तित शुक्रवार को चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में दुनिया एक अहम चरण में प्रवेश कर रही है और देशों की सरकारों को वायरस पर क़ाबू पाने के लिये तत्काल कार्रवाई करनी होगी. हाल के दिनों में योरोप और अमेरिका में कोरोनावायरस संक्रमण के नए मामले तेज़ी से बढ़े हैं और विश्व में प्रति दिन अब चार लाख से ज़्यादा मामले दर्ज किये जा रहे हैं. 

भारत: बच्चों में होने वाले एचआईवी संक्रमण से जंग - ब्लॉग

भारत में यूएनएड्स ने अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर बच्चों में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम पर काफ़ी प्रगति की है, लेकिन कोविड-19 ने इसके रास्ते में अनेक चुनौतियाँ भी पेश की हैं. इसी मुद्दे पर, भारत में यूएनएड्स के देश निदेशक, डॉक्टर बिलाली कमारा का ब्लॉग...

कोविड-19: संक्रमण और मौतों के मामलों में तेज़ी, बुनियादी उपायों पर ज़ोर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने योरोप और उत्तर अमेरिका में कोविड-19 महामारी के मामलों में बढ़ोत्तरी के बीच सरकारों और लोगों से आग्रह किया है कि सावधानी बरतना जारी रखना होगा. यह सतर्कता अस्पतालों में भर्ती मरीज़ों और महामारी से निपटने की कार्रवाई में अग्रिम मोर्चे पर डटे लोगों की बेहतरी के लिये आवश्यक है.