स्वास्थ्य

डीआर काँगो: इबोला के फैलाव पर पूरी तरह क़ाबू पाने में मिली सफलता 

काँगो लोकतान्त्रिक गणराज्य (डीआरसी) की सरकार ने देश में घातक इबोला वायरस का प्रकोप ख़त्म होने की घोषणा की है. सरकार ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य साझीदार संगठनों के समर्थन से पाँच महीने की जवाबी कार्रवाई के बाद  इस आशय की घोषणा की है.

ख़ामोश महामारी: अत्यधिक प्रयोग से एण्टीमाइक्रोबियल दवाओं का घटता असर

दुनिया भर में व्यक्तियों, पौधों और पशुओं की ऐसे संक्रमणों के कारण मौत हो रही है जिनका सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध दवाओं से भी उपचार नहीं किया जा सकता है. इसकी वजह सूक्ष्मजीवीरोधी प्रतिरोधक क्षमता (Antimicrobial resistance) का बढ़ना बताया गया है. बुधवार को ‘विश्व एण्टीमाइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह’ की शुरुआत पर संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवँ कृषि संस्था ने यह बात कही है.     

स्वच्छता के संकट का सामना करने के लिये बना एक कोष

संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को एक ऐसा कोष शुरू किया है जिसके ज़रिये स्वच्छता, साफ़-सफ़ाई और लड़कियों व महिलाओं के मासिक धर्म के इर्द-गिर्द सदियों पुरानी हानिकारक अवधारणाएँ बदलने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा जिनसे इस समय दुनिया भर में 4 अरब से भी ज़्यादा लोग प्रभावित होते हैं.

सर्वाइकल कैन्सर से छुटकारा पाने की रणनीति, बचाई जा सकेंगी लाखों जानें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सर्वाइकल कैन्सर से छुटकारा पाने के लिये मंगलवार को एक रणनीति पेश की है जिसके ज़रिये वर्ष 2050 तक इस कैंसर से अनुमानतः 50 लाख महिलाओं व लड़कियों को मौत के मुँह से बचाया जा सकेगा.

कोविड-19: फैलते संक्रमण के बीच ‘बेफ़िक्र’ होकर बैठने का समय नहीं 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सचेत किया है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में वैक्सीन परीक्षणों के उत्साहजनक नतीजों और सम्भावित नए औज़ारों से उपजी उम्मीद के बावजूद,  यह समय संतुष्ट हो कर बैठ जाने का नहीं है.    

कोविड-19: सार्वजनिक स्वास्थ्य में 'अल्प-निवेश के दुष्परिणाम' उजागर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोरोनावायरस संकट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में लम्बे समय से चली आ रही निवेश की कमी को उजागर किया है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि समाजों में स्वास्थ्य के महत्व पर पुनर्विचार किये जाने की ज़रूरत है. 

विश्व न्यूमोनिया दिवस: मेडिकल ऑक्सीजन से नन्ही जानों की रक्षा सम्भव

न्यूमोनिया एक गम्भीर स्वास्थ्य चुनौती है जिससे हर साल पाँच साल से कम उम्र के लगभग आठ लाख बच्चों की मौत होती है, लेकिन वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी ने इस घातक संक्रमण से निपटने के प्रयासों को और भी अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है.12 नवम्बर को ‘विश्व न्यूमोनिया दिवस’ पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि न्यूमोनिया संक्रमण के गम्भीर मामलों में हर साल 42 लाख से ज़्यादा बच्चों को ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है जिसे पूरा किया जाना होगा. 

दो दशकों में ख़सरा के सर्वाधिक मामले दर्ज – दो लाख से ज़्यादा की मौत

ख़सरा बीमारी के कारण वर्ष 2019 में दो लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है और पिछले 23 सालों में सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किये गये हैं. गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और बीमारियों पर नियन्त्रण के लिये अमेरिकी विभाग (CDC) की साझा रिपोर्ट दर्शाती है कि एक दशक में वैक्सीन की पर्याप्त कवरेज में मिली विफलता की वजह से ख़सरा के मामलों में तेज़ी देखी गई है.

पश्चिम अफ्रीका और सहेल के लिये उप महासचिव की एकजुटता यात्रा

संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना जे मोहम्मद ने पश्चिम अफ्रीका की दो पखवाड़े की यात्रा शुरू करते हुए पहले पड़ाव में सहेल क्षेत्र की यात्रा शुरू की है और वहाँ के देशों को कोविड-19 महामारी के दौरान संयुक्त राष्ट्र का समर्थन दोहराया है.

कोरोनावायरस वैक्सीन की तलाश - 'सुलभ विज्ञान' से जुड़ी पाँच अहम बातें

संयुक्त राष्ट्र ने विश्वसनीय वैज्ञानिक जानकारी और शोध, हर किसी को निशुल्क उपलब्ध कराए जाने की पुकार लगाई है. यूएन एजेंसियों के मुताबिक सुलभ विज्ञान (Open Science) के ज़रिये कोविड-19 वायरस के ख़िलाफ़ असरदार वैक्सीन पर शोधकार्य तेज़ी से आगे बढ़ाने, भ्रामक जानकारियों पर अंकुश लगाने और विज्ञान की पूर्ण सम्भावनाओं के द्वार खोल पाने में मदद मिलेगी.