स्वास्थ्य

कोविड-19: विकलांग व्यक्तियों पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत

विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर कैटालीना डेवन्डस ने आगाह करते हुए कहा है कि बहुत से विकलांग व्यक्ति बहुत नाज़ुक परिस्थितियों का सामना करते हुए जीवन जीते हैं, फिर भी कोविड-19 विश्व महामारी से बचने के उपायों के तहत अभी विकलांग व्यक्तियों को समुचित व पर्याप्त दिशा-निर्देश व सहायता उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

कोविड-19: दक्षिण-पूर्व एशिया में तेज़ कार्रवाई का आग्रह

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को कोविड-19 से होने वाले संक्रमणों पर क़ाबू पाने के लिए जल्द से जल्द और बहुत तेज़ रफ़्तार से प्रयास करने और उनका दायरा बढ़ाए जाने की ज़रूरत है. इस क्षेत्र के देशों में अब तक संक्रमितों की संख्या 480 से ज़्यादा हो गई है और आठ लोगों की मौत हो चुकी है. सभी संदिग्ध मामलों की जांच किए जाने को बेहद अहम बताया गया है.

कोविड-19: संकट काल में मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल ज़रूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जनवरी 2020 में नॉवल कोरोनावायरस (कोविड-19) को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य एमरजेंसी’ घोषित किया और फिर मार्च में इसे विश्वव्यापी महामारी के रूप में परिभाषित किया गया. लगातार फैलती बीमारी से दुनिया के माथे पर तनाव की लकीरें गहरी हुई हैं जिसका लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा की अहमियत को समझते हुए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं.
 

कोविड-19: यूएन का स्पष्ट संदेश - टैस्ट टैस्ट टैस्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोनावायरस यानी कोविड-19 के संकट से निपटने के सभी देशों के लिए ज़रूरी है कि हर संदिग्ध मामले का टैस्ट किया जाए क्योंकि यही तरीक़ा इस बीमारी पर क़ाबू पाने का आधार है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख डॉक्टर टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने स्पष्ट शब्दों मे कहा कि इस विश्वव्यापी महामारी को तब तक नियंत्रित नहीं किया जा सकता जब तक कि संक्रमितों के बारे में पूरी जानकारी ना मालूम हो जाए.

कोविड-19 के संक्रमण के बढ़ते मामलों का नया केंद्र बना योरोप

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि ‘विश्वव्यापी महामारी’ कोविड-19 ने अब योरोप को अपनी चपेट मे ले लिया है जहां अब किसी अन्य क्षेत्र के देशों की तुलना में सबसे ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो रही है. इस महामारी से निपटने के प्रयासों के तहत यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अन्य साझीदार संगठनों के साथ मिलकर एकजुटता फ़ंड शुरू किया है जिसमें लोगों व संगठनों का योगदान देना संभव हो सकेगा.

कोविड-19 महामारी के बारे में पाँच अहम बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोनावायरस (कोविड-19) को ‘विश्वव्यापी महामारी’ (Pandemic) परिभाषित किया है. कोरोनावायरस को ‘विश्वव्यापी महामारी’ की श्रेणी में रखे जाने के क्या मायने हैं और इस घोषणा से वायरस से निपटने के प्रयासों पर क्या असर पड़ेगा? कोविड-19 से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब यहाँ देख सकते हैं.

कोरोनावायरस (कोविड-19) 'विश्वव्यापी महामारी' परिभाषित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में विश्व भर में लगातार बढ़ोत्तरी को देखते हुए कोविड-19 को 'विश्वव्यापी महामारी' परिभाषित कर दिया है. चीन के बाद हाल के दिनों में इटली, ईरान और कोरिया गणराज्य में बड़ी संख्या में संक्रमित मरीज़ों की पुष्टि हुई है और अन्य देशों में भी मामले सामने आ रहे हैं.  यूएन एजेंसी ने दोहराते हुए कहा है कि इस महामारी को क़ाबू में करना संभव है लेकिन इसके लिए देशों को पुरज़ोर प्रयास करने होंगे. 

कोविड-19: यूएन मुख्यालय में ऐहतियाती उपाय, आम लोगों का प्रवेश बंद

कोरोनावायरस कोविड-19 का संक्रमण रोकने के प्रयासों के तहत दुनिया भर में अनेक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बड़ी संख्या में बच्चे स्कूलों से दूर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन - यूनेस्को ने मंगलवार को ये जानकारी देते हुए बताया कि दुनिया भर में लगभग 36 करोड़ 30 बच्चों की स्कूली शिक्षा बाधित हुई है.

कोविड-19 के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी चपत लगने की आशंका

विश्व भर में कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी का फैलना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए त्रासदीपूर्ण नतीजों का सबब रहा है, लेकिन इसकी एक बड़ी आर्थिक क़ीमत भी चुकानी पड़ सकती है. यूएन की व्यापार और विकास मामलों की एजेंसी (UNCTAD) ने आशंका जताई है कि कोविड-19 की वजह से कुछ देशों को मंदी का सामना करना पड़ेगा और वार्षिक वैश्विक वृद्धि दर 2.5 फ़ीसदी से भी नीचे रहने की आशंका है.

धनी या निर्धन, हर देश के लिए बड़ा ख़तरा है कोरोनावायरस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा है कि चाहे अमीर हो या ग़रीब, दुनिया का कोई भी देश कोरोनावायरस संक्रमण के ख़तरे से अनछुआ नहीं है. उन्होंने चिंता जताई है कि कुछ देश इस महामारी से निपटने के लिए ज़रूरी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं. विश्व भर में कोरोनावायरस के अब तक 95 हज़ार 265 मामले सामने आ चुके हैं और तीन हज़ार 281 लोगों की मौत हुई है.