स्वास्थ्य

कोविड-19: 'भारत में रोकथाम के लिए उपाय समयोचित'

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में कोविड-19 संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी के बीच कहा है कि देश के अनेक ज़िलों में तालाबंदी करने का फ़ैसला समयोचित है. भारत में कोविड-19 के संक्रमण के लगभग 390 मामलों (349 भारतीय, 41 विदेशी नागरिक) की पुष्टि हुई है और सात लोगों की मौत होने की ख़बर है.  विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिए देश के अनेक राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में तालाबंदी लागू की गई है.

कोविड-19: दुनिया भर में लड़ाई ख़त्म करके महामारी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर में किसी भी स्थान पर जारी संघर्ष या युद्ध में शामिल पक्षों से अपील की है कि वो अपने हथियार डाल दें ताकि विश्व के सामने दरपेश एक ज़्यादा बड़ी चुनौती कोविड-19 का मुक़ाबला करने में उनका सहयोग काम आ सके. सोमवार को जारी इस अपील में उन्होंने कहा कि कोविड-19 एक ऐसा दुश्मन है जिसने पूरी मानवता के लिए ख़तरा पैदा कर दिया है. 

कोविड-19: संक्रमितों की संख्या पहुँची दो लाख से ऊपर

कोविड-19 संक्रमण के पहले एक लाख मामलों की पुष्टि होने में क़रीब तीन महीने का समय लगा था, लेकिन उस संख्या के दोगुने होने में महज़ 12 दिन लगे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि कोविड-19 हर दिन एक नए और त्रासदीपूर्ण पड़ाव पर पहुंच रहा है. 

कोविड-19: भ्रान्तियाँ, अफ़वाहें व तथ्य

कोविड-19 महामारी ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. इस बीमारी के वायरस के बारे में सटीक जानकारी व इलाज के अभाव में लोग अक्सर भ्रमित हैं और भ्रान्तियों व अफ़वाहों का भी शिकार हो रहे हैं. इस वीडियो में कुछ भ्रान्तियों व ग़लतफ़हमियों को दूर करने की कोशिश...

कोविड-19 की आपदा में सटीक जानकारी व सूचना का निर्बाध प्रवाह अहम

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कोविड-19 महामारी से रोज़मर्रा के जीवन में आए अभूतपूर्व व्यवधानों के बीच सचेत किया है कि इस कठिन समय में सूचना का बेरोकटोक प्रवाह सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है. उन्होंने कहा है कि झूठी सूचनाओं के फैलने से अव्यवस्था फैल सकती है और स्वास्थ्य को क्षति पहुंच सकती है इसलिए तथ्यपरक जानकारी की सुलभता, लोगों की निजता व पत्रकारों की आज़ादी का ख़याल रखा जाना अहम है. 

कोविड-19 से निपटने में फ़लस्तीनियों के साथ भेदभाव स्वीकार्य नहीं

संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने इसराइल, फ़लस्तीनी प्राधिकरण और हमास से आग्रह किया है कि उन्हें ग़ाज़ा, पश्चिमी तट और पूर्वी येरूशेलम में सभी फ़लस्तीनी लोगों को भी कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिए उनके स्वास्थ्य का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी ज़िम्मेदारियाँ भली-भाँति तरीक़े से निभाएँ.

कोविड-19: 'एकजुटता, उम्मीद व समन्वित कार्रवाई की दरकार'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से लोगों में डर और अनिश्चितता गहरा रही है इसलिए इस संकट पर पार पाने के लिए आपसी एकजुटता, आशा और राजनैतिक इच्छाशक्ति की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है. महासचिव गुटेरेश ने गुरुवार को एक ऑनलाइन प्रेस वार्ता में ये बातें कहीं. 

कोविड-19: प्रवासियों व शरणार्थियों के साथ गरिमामय बर्ताव ज़रूरी

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एजेंसी (आईओएम) ने कहा है कि महामारी कोविड-19 से उपजे संकट के दौर में भी यह हमेशा ध्यान रखना होगा कि प्रवासियों व शरणार्थियों के साथ गरिमा व सम्मान के साथ बर्ताव हो. यूएन एजेंसी के प्रवक्ता जोएल मिलमैन ने यूएन न्यूज़ को बताया कि इस महामारी के कारण व्यापक स्तर पर तालाबंदी होने से प्रवासियों, विशेषकर खाद्य उद्योग में कार्यरत लोगों, पर भी असर पड़ रहा है.

कोविड-19: वैक्सीन का प्रायोगिक परीक्षण शुरू, एकजुटता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा है कि चीन द्वारा कोविड-19 के जैनेटिक चरित्र के बारे में जानकारी साझा करने के 60 दिनों के भीतर इस वायरस के इलाज की वैक्सीन का प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल) शुरू हो गया है. संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बुधवार को इसे “एक असाधारण उपलब्धि” क़रार देते हुए विश्व भर से उसी तरह की एकजुटता की भावना दिखाने का आग्रह किया जो ईबोला पर क़ाबू पाने में नज़र आई थी.

कोविड-19: बाल मन में पनपी बेचैनियों को शांत करने के उपाय

दुनिया के 150 से ज़्यादा देशों में कोविड-19 के मामलों की पुष्टि होने से लोगों में भय, बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल है और इस भावना से बच्चे भी अनछुए नहीं है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने इस कठिन समय में बच्चों के मन में चल रही उथल-पुथल को समझने का प्रयास किया है. साथ ही अभिभावकों को बच्चों के साथ खुले  व सौम्य ढंग से बातचीत कर उनकी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है.