स्वास्थ्य

काँगो में सशस्त्र गुटों के हमले में ईबोला स्वास्थ्यकर्मियों की मौत

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में हथियारबंद गुटों ने घातक ईबोला बीमारी पर क़ाबू पाने के प्रयासों में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को निशाना बनाकर हमला किया है जिसमें चार की मौत हुई है और पांच अन्य घायल हुए हैं. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक़ ये हमले ऐसे समय हुए हैं जब ईबोला के मामलों में कमी देखने को मिली है लेकिन ऐसी घटनाओं से बीमारी से निपटने की कोशिशों को धक्का लग सकता है.  

अल्बानिया में शक्तिशाली भूकंप के बाद तेज़ी से बचाव कार्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के कर्मचारी अल्बानिया में भूकंप के बाद वहाँ अधिकारियों की सहायता करने में लगे हैं. इस भूकंप में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं और 650 से अधिक घायल होने की ख़बरें हैं.

एचआईवी ग्रस्त लोगों को सशक्त बनाने से ख़त्म होगी ये बीमारी

एचआईवी - एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों की अगुवाई कर रही एजेंसी यूएनएड्स ने कहा है कि एचआईवी के संक्रमित लोगों को जब उनकी ख़ुद की देखभाल करने के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने का मौक़ा मिलता है तो संक्रमण के नए मामले कम होते हैं और ऐसी स्थिति में ज़्यादा संख्या में संक्रमित लोगों को इलाज की सुविधा हासिल होती है.

​​​​​​​एड्स का दैत्य निगल जाता है हर दिन 320 बच्चों व किशोरों को

दुनिया भर में हर साल हर दिन क़रीब 320 बच्चे और किशोर युवा एड्स से संबंधित बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने एचआईवी और एड्स के बारे में एक वैश्विक संक्षिप्त रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार साल 2018 में हर घंटा लगभग 13 बच्चों और युवाओं की जान एड्स की वजह से चली गई.

किशोर उम्र में आलस, दिन में एक घंटा भी कसरत नहीं

विश्व भर में किशोर उम्र में नियमित व्यायाम का घटता रुझान एक बड़ी समस्या के रूप में उभर रहा है जिससे वयस्क होने पर लोगों के स्वास्थ्य को एक बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का एक नया अध्ययन दर्शाता है कि 11-17 वर्ष की उम्र में 80 फ़ीसदी से ज़्यादा किशोर प्रतिदिन 60 मिनट से भी कम शारीरिक गतिविधियों में बिता रहे हैं.

डेंगू पर क़ाबू पाने के लिए नई तकनीक परीक्षण के लिए तैयार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मच्छरों से फैलने वाले डेंगू बुख़ार से आधी से ज़्यादा दुनिया को ख़तरा है. इसकी गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र इसे जड़ से मिटाने के वैश्विक प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इन प्रयासों के तहत लाखों की संख्या में बधिया कीटों को छोड़े जाने के असर को मापने की घोषणा की गई है.

खुले में शौच से गरिमा और जीवन पर मंडराता है ख़तरा

शौच के बाद और भोजन करने से पहले साबुन से हाथ नहीं धोने जैसी स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई की आदतें न होने से सालाना 8 लाख से ज़्यादा लोग मौत का शिकार हो जाते हैं – जोकि मलेरिया से होने वाली मौतों की संख्या  से भी अधिक है. खुले में शौच करना मनुष्य की गरिमा, स्वास्थ्य और कल्याण का अपमान है – ख़ासतौर पर लड़कियों और महिलाओं का.

नाईजीरिया में संयुक्त राष्ट्र का ख़सरा अभियान

नाईजीरिया के उत्तरी हिस्से में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने एक टीकाकरण अभियान शुरू किया है जिसके माध्यम से दो करोड़ 80 लाख से अधिक बच्चों को ख़सरा और मैनिनजाइटिस यानी दिमाग़ी बुख़ार से बचाया जाएगा. 16 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान को राष्ट्रीय प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल विकास एजेंसी और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने ‘गैवी, द वैक्सीन एलायंस’ (GAVI) के सहयोग से चलाया है.

सड़क सुरक्षा: विशालकाय मगर अदृश्य बन चुके संकट से निबटने की पुकार

सड़कों पर यातायात सुरक्षा में बेहतरी करके लोगों की ज़िंदगियाँ बचाना भी 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा में एक लक्ष्य के रूप में शामिल है. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की याद में मनाए जाने वाले दिवस के मौक़े पर जारी अपने संदेश मे ये बात कही है. ये दिवस नवंबर के तीसरे रविवार को मनाया जाता है और 2019 में ये 17 नवंबर को मनाया गया.

अनगिनत ख़तरों से जूझने को मजबूर हैं हाथ से मैला ढोने वाले सफ़ाईकर्मी

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि विकासशील देशों में स्वच्छता कर्मचारियों की दुर्दशा पर तात्कालिक कार्रवाई होनी चाहिए.  मंगलवार, 19 नवंबर, को 'विश्व शौचालय दिवस' से ठीक पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शौचालय, सीवर और सेप्टिक टैंक साफ़ करने वाले करोड़ों लोगों के लिए ख़तरों को उजागर किया है. यूएन एजेंसी ने कहा है कि सफ़ाई कर्मचारियों के अधिकार, उनका स्वास्थ्य और सम्मान ख़तरे में है.