स्वास्थ्य

'ईबोला से एक कदम आगे रहने की ज़रूरत'

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख हेनरिएटा फ़ोर ने सचेत किया है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में अगर ज़रूरी निवेश नही किया गया और वहां असुरक्षा कायम रही तो ईबोला संक्रमण तेज़ी से फैलने का ख़तरा बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे रास्ते ढूंढे जाने चाहिए ताकि ईबोला वायरस से लड़ाई में हमेशा  आगे रहा जा सके. 

ख़सरा के मामले एक साल में हुए दोगुना

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया भर में ख़सरा के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है जो चिंता का कारण है. शुरुआती आंकड़े दिखाते हैं कि 2017 की तुलना में 2018 में ख़सरा के दोगुने मामले सामने आए हैं. इनसे निपटने के लिए टीकाकरण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जा रहा है. 

दूषित भोजन से होने वाली मौतों को रोकना 'साझा दायित्व'

हर साल, जीवाणुओं, विषाणुओं, परजीवियों, विषैले तत्वों और रसायनों से दूषित भोजन 60 करोड़ से अधिक लोगों की बीमारियों का कारण बनता है. चार लाख से ज़्यादा लोगों की मौत प्रति वर्ष असुरक्षित भोजन की वजह से होती है. ऐसे में खाद्य श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के प्रयासों के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर एक सम्मेलन में विचार हो रहा है. 

तेज़ आवाज़ में संगीत सुनना नुक़सानदेह, नए यूएन दिशानिर्देश जारी

स्मार्टफ़ोन पर तेज़ आवाज़ में गाने सुनने की आदत बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकती है. संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि दुनिया में 12 से 35 साल की उम्र के 1 अरब से ज़्यादा लोगों को सुनने की शक्ति कम होने या उसे पूरी तरह खोने के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है. 

टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में ठोस प्रगति

टीबी से पीड़ित लेकिन अपनी बीमारी से अनजान 15 लाख मरीज़ों का इस साल के आख़िर तक पता लगाने और उनका इलाज करने की एक संयुक्त पहल के ठोस परिणाम सामने आए हैं. तपेदिक की बीमारी का बोझ झेल रहे भारत सहित छह एशियाई देशों ने सिर्फ़ पिछले साल टीबी के साढ़े चार लाख नए मामलों का पता लगाया है.  

सर्वाइकल कैंसर का जल्द निदान बचा सकता है लाखों महिलाओं की जान

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और इलाज सफल होने की अधिक संभावनाओं के बावजूद हर साल 3 लाख से ज्यादा महिलाओं को कैंसर का यह रूप अपना शिकार बनाता है. हर एक मिनट में एक महिला में इस बीमारी की पहचान होती है. विश्व कैंसर दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि सर्वाइकल कैंसर से मौत का शिकार होने वाली हर दस में से नौ महिलाएं गरीब देशों की होती हैं.