स्वास्थ्य

लैगो रोबोट की हाथ सफ़ाई

जॉर्डन के ज़ैतारी शरणार्थी शिविर में नवीकरण का इस्तेमाल करके एक ऐसा लैगो रोबोट बनाया गया है जो हाथ लगाए बिना ही लोगों की हाथ सफ़ाई में मदद करता है. संक्रमण का फैलाव रोकने के प्रयासों के तहत इस तकनीक को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाया जा रहा है. देखें वीडियो...

कोविड-19: सामाजिक संरक्षा व्यापक व मज़बूत करनी होगी

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि विकासशील देशों में कोविड-19 ने सामाजिक सुरक्षा कवरेज में ख़ामियों को उजागर कर दिया है जिसके कारण महामारी से उबरने के प्रयासों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और करोड़ों लोग ग़रीबी के गर्त में धकेले जा सकते हैं. ऐसा हुआ तो इसी तरह के संकटों का सामना करने की वैश्विक तैयारी भी प्रभावित होगी. 

कोविड-19: 'जनता वैक्सीन' के लिए विश्व नेताओं ने दिखाई एकजुटता

एचआईवी/एड्स मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNAIDS) विश्व नेताओं की ओर से एक पहल आगे बढ़ाई गई है जिसमें वैश्विक महामारी कोविड-19 को दुनिया में सभी लोगों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाने की पुकार लगाई गई है. गुरूवार को 140 से ज़्यादा विश्व नेताओं और अन्य हस्तियों ने एक ‘खुले ख़त’ पर हस्ताक्षर किए हैं जिसमें कोविड-19 के ख़िलाफ़ 'जनता वैक्सीन' के लिए एकजुटता ज़ाहिर करने का अनुरोध किया गया है. 

पाबन्दियाँ हटाने में सावधानी, नहीं तो बढ़ सकता है विनाश

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कोविड-19 वायरस के फैलाव को नियन्त्रित करने के लिए लागू की गई पाबन्दियाँ और तालाबन्दी को हटाने के सम्भावित ख़तरों के प्रति आगाह किया है. ध्यान रहे कि कुछ देश ये पाबन्दियाँ और तालाबन्दी हटाने पर विचार कर रहे हैं.

मानसिक स्वास्थ्य का बहुत ध्यान ज़रूरी

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में इंसानों के ना केवल शारीरिक वजूद पर चोट की है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरी तरह हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि दुनिया भर में हर जगह, हर इंसान के मानसिक स्वास्थ्य का ख़याल रखा जाना बहुत ज़रूरी है और ये अभी के लिए नहीं, बल्कि महामारी पर क़ाबू पाए जाने के बाद के समय के लिए भी सुनिश्चित करना है. वीडियो सन्देश...

कोविड-19: मानसिक स्वास्थ्य संकट से निर्बलों को बचाने का आहवान

मानसिक स्वास्थ्य ज़रूरतों को पूरा करने वाली प्रणालियाँ दशकों से कम निवेश और उपेक्षा का शिकार रही हैं और वैश्विक महामारी कोविड-19 ने इन कमज़ोरियों को पूरी तरह उजागर  कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र ने इन ख़ामियों, नशीली दवाओं के इस्तेमाल और आत्महत्या के बढ़ते मामलों से उपजी चिन्ता के बीच गुरुवार को सभी देशों से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए महत्वाकाँक्षी संकल्प लेने का आहवान किया है. 

रोहिंज्या शिविरों में ऐहतियाती तैयारियाँ

म्याँमार में 2017 में भड़की हिंसा व सुरक्षा बलों के दमन से बचकर भागे लगभग साढ़े सात लाख रोहिंज्या शरणार्थी बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं. वहाँ पहले से लाखों अन्य रोहिंज्या शरणार्थी भी रहे हैं जिन्हें मिलाकर ये विशालतम शरणार्थी बस्ती बन गई है. यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने इस भीड़ भरी बस्ती में कोविड-19 महामारी के फैलने की आशंका के बीच यूएन ख़ास तैयारियाँ की हैं. देखें वीडियो फ़ीचर...

कोविड-19: स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ से बाल स्वास्थ्य के लिए गहराया संकट

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ा है और ज़रूरी सेवाओं में व्यवधान आया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने गम्भीर हालात के मद्देनज़र आशंका जताई है कि तत्काल उपायों के अभाव में अगले छह महीनों के दौरान हर दिन पॉंच साल से कम उम्र के छह हज़ार बच्चों की अतिरिक्त मौतें हो सकती है जबकि इन्हें टाला जा सकता है. बच्चों को राहत प्रदान करने के लिए यूएन एजेंसी ने एक अरब 60 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील की है. 

इसराइल संचालित जेलों में बन्दी फ़लस्तीनी बच्चों की रिहाई की पुकार

मध्य पूर्व क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के तीन बड़े अधिकारियों ने इसराइल द्वारा संचालित जेलों में बन्द फ़लस्तीनी बच्चों को रिहा करने का आहवान किया है. उनका कहना है कि मौजूदा हालात में उन बच्चों का कोविड-19 महामारी के संक्रमण में आने की बहुत ज़्यादा आशंका है. इनका कहना है कि मार्च के अन्त तक के आँकड़ों के अनुसार 194 फ़लस्तीनी बच्चों को बन्दी बनाकर इसराइल द्वारा संचालित जेलों में रखा गया था.

कोविड-19: एचआईवी के ख़िलाफ़ लड़ाई के कमज़ोर पड़ने की आशंका

कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाले व्यवधान को अगर दूर नहीं किया गया तो एचआईवी से निपटने में अब तक हुई प्रगति जोखिम में पड़ जाएगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और एड्स मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था (UNAIDS) के ताज़ा अनुमान के मुताबिक ज़रूरी इलाज के अभाव में एड्स-सम्बन्धी बीमारियों से लाखों की संख्या में अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं.