स्वास्थ्य

कोविड-19 के कारण महिलाओं पर हिंसा में बढ़ोत्तरी

 कोविड-19 पर क़ाबू पाने के प्रयासों के तहत अनेक देशों में तालाबंदी विश्व आबादी का एक बड़ा हिस्सा घरों में सिमट गया है. महासचिव ने इन हालात में महिलाओं व लड़कियों के प्रति घरेलू हिंसा के मामलों में ‘भयावह बढ़ोत्तरी’ दर्ज किए जाने पर चिंता जताई है...

कोविड-19: युवाओं के पास डिजिटल समाधान पेश करने का अवसर 

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने कोविड-19 महामारी का मुक़ाबले की मुहिम में युवा डेटा विज्ञानियों, डिज़ाइनरों और नवोन्मेषकों (इनोवेटर) को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. इस सिलसिले में एक महीने तक चलने वाले हैकाथॉन की शुरुआत हुई है जिसके ज़रिए विश्वव्यापी महामारी की चुनौती से निपटने के लिए डिजिटल समाधानों तैयार किए जाएंगे. 

'भारत में आमजन को तालाबंदी का मतलब समझाए जाने की ज़रूरत थी'

भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर रेनाटा डिज़ालिएन ने कहा है कि तालाबंदी के प्रभावों के बारे में आमजन को आसान भाषा में समझाए जाने की ज़रूरत थी और उन प्रभावों से निपटने के लिए समुचित नोटिस दिया जाना चाहिए था. यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि देश में कोविड-19 से सामाजिक व आर्थिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे पूरी तरह निपटने में भारत सरकार द्वारा घोषित 24 अरब डॉलर का पैकेज भी कम साबित हो सकता है.

कोविड-19: असरदार कार्रवाई के लिए समाज की सहभागिता अहम

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (WHO SEARO) ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के फैलने की रफ़्तार तेज़ होने से गहरी हुई चिंताओं के बीच कहा है कि इस चुनौती से सरकारें व समाज पूरी तरह एकजुट होकर ही निपट सकते हैं. यूएन एजेंसी के मुताबिक कोरोनावायरस के फैलाव पर क़ाबू करने और मानव जीवन व अन्य संसाधनों को होने वाले नुक़सान को रोकने के लिए कार्रवाई के केंद्र में लोगों व समुदायों को रखना होगा. 

कोविड-19: 'साझा लड़ाई में ऊर्जा का हर क़तरा अहम' 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया में आज सिर्फ़ एक ही लड़ाई की ज़रूरत है, जो विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ साझा लड़ाई है. उन्होंने चेतावनी जारी की है कि अनेक हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में महामारी के कारण हालात अभी और भी बदतर हो सकते हैं इसलिए शांति व एकता की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है. 

कोविड-19: ऑटिज़्म वाले लोगों के 'अधिकारों का ना हो हनन'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से निपटने की कार्रवाई में ऑटिज़्म के साथ रह रहे लोगों का भी ख़याल रखा जाना ज़रूरी है. गुरुवार, 2 अप्रैल, को ‘विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस’ पर यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया है कि संकट की इस घड़ी में विकलांगों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए. 

भारत में आंतरिक प्रवासियों की दशा पर चिंता, एकजुटता की पुकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मशेल बाशेलेट ने कहा है कि भारत में कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिए लॉकडाउन यानी तालंबादी की अचानक हुई घोषणा से बुरी तरह प्रभावित हुए लाखों अंदरूनी प्रवासियों की विशाल तकलीफ़ें देखकर वो बहुत चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि इन कामगारों को लॉकडाउन की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर अपने कामकाज के स्थानों को छोड़कर अपने घरों व मूल स्थानों के लिए रवाना होना पड़ा क्योंकि उनके पास भोजन व घर का किराया देने के लिए धन नहीं बचा था.

कोविड-19: पीड़ितों व ज़रूरतमंदों के लिए राहत के मरहम की पुकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित लोगों और ज़रुरतमंद समुदायों के लिए भोजन सहित अन्य आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित करने का आहवान किया है. उन्होंने भारत सरकार की उस योजना का उल्लेख किया है जिसके तहत विकट हालात का सामना कर रहे लोगों की मदद के लिए 24 अरब डॉलर के राहत पैकेज की घोषणा की गई है. 

बांग्लादेश: कोविड-19 से बचाव के लिए फ़ेस मास्क बनाने में जुटा स्थानीय समुदाय

कोविड-19 महामारी फैलने की आंच बांग्लादेश तक भी पहुंच रही है और कॉक्सेस बाज़ार में रह रहे लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों और स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य के लिए ख़तरा पैदा रहा है. इस बीमारी की रोकथाम के उपायों को इन समुदायों तक पहुंचाने के काम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे हैं. संक्रमण से उनकी सुरक्षा व बचाव के लिए एक नई पहल शुरू की गई है जिसमें स्थानीय समुदाय के सदस्य कपड़े के हज़ारों फ़ेस मास्क बना रहे हैं.

कोविड-19: संकट काल में खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र की तीन प्रमुख एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि कोविड-19 से अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण की रक्षा करते समय देशों को यह ध्यान में रखना होगा कि व्यापार-संबंधी ऐसे क़दम ना उठाए जाएं जिनसे खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (फ़ूड सप्लाई चेन) या खाद्य सुरक्षा पर असर पड़े.