आर्थिक विकास

तापमान बढ़ने से 2,400 अरब डॉलर का नुक़सान होने का अनुमान

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में कामकाज की उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ने वाला है जिससे आमदनी वाले कामकाज और भारी आर्थिक नुक़सान होगा. ग़रीब देश सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे और कृषि व निर्माण क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे.

दुनिया के सामने ‘जलवायु रंगभेद’ का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि जलवायु से जुड़े रंगभेद का एक ऐसा नया दौर शुरू होने का ख़तरा नज़र आ रहा है जहाँ बढ़ते तापमान और भूख से बचने के लिए अमीर लोग धन के बल पर अपने लिए बेहतरी का रास्ता बना लेंगे. उनका मानना है कि पिछले 50 वर्षों में जितना भी विकास हुआ, वैश्विक स्वास्थ्य में बेहतरी आई है और ग़रीबी कम करने के प्रयास हुए हैं, जलवायु परिवर्तन की वजह से वे सभी विफल हो सकते हैं. 

30 वर्षों में विश्व आबादी हो जाएगी नौ अरब 70 करोड़

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की जनसंख्या बढ़कर नौ अरब 70 करोड़ हो जाएगी.  भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है. सोमवार को जारी हुई नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बच्चे पैदा होने की दर में कमी आ रही है और कई देशों को बूढ़ी होती जनसंख्या से उपजने वाली चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा.

प्रवासियों द्वारा भेजी रक़म से ग़रीबों को बड़ा सहारा

अपने घर, गाँव, शहर और देश छोड़कर रोज़ी रोटी कमाने के लिए निकलने वाले लोग दुनिया में जहाँ भी रहते हैं वहाँ से अपने मूल स्थानों में रहने वाले परिवारों व समुदायों को हर साल भारी रक़म भेजते हैं. प्रवासियों के इस योगदान को महत्व देने के लिये हर वर्ष 16 जून को अंतरराष्ट्रीय दिवस (International Day of Family Remittances) मनाया जाता है. 

शहरों में ग़रीबी और असमानता दूर करने के लिए नई सोच और नई तकनीक की ज़रूरत

अगर टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने की जद्दोजहद की जीत या हार शहरों में निर्धारित होनी है तो फिर वहाँ की आबादियों की दीर्घकालीन रूप से देखभाल सुनिश्चित करनी होगी और ये भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पीछे ना छूट जाए.

वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्त पड़ती रफ़्तार टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए ख़तरा

अनसुलझे व्यापारिक तनावों, अंतरराष्ट्रीय नीतिगत अनिश्चितता और कमज़ोर होते व्यापारिक भरोसे के बीच विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था व्यापक मंदी का सामना कर रही है. संयुक्त राष्ट्र ‘विश्व आर्थिक स्थिति एवं संभावना’ 2019 की मध्यावधि रिपोर्ट में आशंका ज़ाहिर की गई है कि धीमी पड़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था के चलते टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों पर संकट मंडरा रहा हैं.

काम के तनाव, ओवरटाइम और बीमारियों से हर साल 28 लाख मौतें

कार्यस्थलों पर असुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माहौल, ज़्यादा तनाव, काम करने के लंबे घंटों और बीमारियों की वजह से हर साल 28 लाख कामगारों की मौत होती है. हर साल 37.4 करोड़ लोग नौकरी से जुड़ी वजहों के चलते या तो बीमार पड़ते हैं या फिर ज़ख़्मी होते हैं. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट में ये तथ्य उभरकर सामने आए हैं.

 

'अवसरों से भरा क्षेत्र' है मध्य पूर्व

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि मध्य पूर्व में टिकाऊ विकास और निवेश के लिए प्रचुर अवसर उपलब्ध हैं. जॉर्डन में मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका पर विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान यूएन प्रमुख ने संघर्ष और अस्थिरता से जूझते क्षेत्र की मदद के लिए हरसंभव कूटनीतिक प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता जताई.

टिकाऊ विकास और जलवायु कार्रवाई के लिए दक्षिण-दक्षिण सहयोग अहम

जलवायु परिवर्तन के विरूद्ध लड़ाई और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को पाने में दक्षिण-दक्षिण सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर दूसरे उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यह बात कही. 

क्या है 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' और यह अहम क्यों है?

इस सप्ताह अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में 20-22 मार्च को दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर दूसरे उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सरकारी प्रतिनिधिमंडल, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों समेत एक हज़ार से ज़्यादा लोग एकत्र हो रहे हैं.