आर्थिक विकास

कोविड-19: विश्व में कामकाजी घंटों और रोज़गार में भारी नुक़सान की आशंका

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 की चपेट में आने के कारण विश्व अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में दुनिया भर में कुल कामकाजी घंटों में 6.7 फ़ीसदी का नुक़सान होगा – यह आँकड़ा 19 करोड़ 50 लाख पूर्णकालिक कर्मचारियों के कामकाज के बराबर है. 

कोविड-19: विश्व अर्थव्यवस्था के एक फ़ीसदी तक सिकुड़ने की आशंका

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण विश्व अर्थव्यवस्था इस साल एक फ़ीसदी तक सिकुड़ सकती है. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग (UNDESA) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि अगर लोगों की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों पर पाबंदियों की मियाद बढ़ती है और पर्याप्त वित्तीय उपाय नहीं किए गए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोनावायरस का असर और भी ज़्यादा व्यापक हो सकता है. 

कोविड-19: उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए 2.5 ट्रिलियन डॉलर की ज़रूरत

विश्व की दो-तिहाई आबादी (चीन को छोड़कर) को कोविड-19 के कारण अभूतपूर्व आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है और हालात बेहतर होने से पहले और भी ज़्यादा ख़राब होने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र ने स्थिति की गंभीरता के मद्देनज़र सोमवार को विकासशील देशों के लिए ढाई ट्रिलियन डॉलर के राहत पैकेज की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की भावना को ठोस कार्रवाई का आकार दिया जा सके. 

कोविड-19 संकट के बावजूद संयुक्त राष्ट्र का मुख्य कामकाज जारी

संयुक्त राष्ट्र के चार प्रमुख अंगों के अध्यक्षों ने सदस्य देशों को भरोसा दिलाते हुए कह है कि कि कोविड-19 महामारी ने संयुक्त राष्ट्र को भी काम करने के नए तरीक़े अपनाने पर मजबूर कर दिया है, इसके बावजूद दुनिया भर में संगठन के महत्वपूर्ण कार्य बिना रुके जारी हैं. इन अध्यक्षों ने शुक्रवार को ऑनलाइन के ज़रिए सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान ये बात कही.

'कोविड-19 हमारी अर्थव्यवस्थाओं की भंगुरता को दर्शाता है', गाय राइडर, आईएलओ

कोविड-19 महामारी के मानवीय जीवन पर परिणाम हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था से कहीं आगे तक पहुँचते है. इससे हमारे भविष्य के आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक सभी पहलू प्रभावित होंगे. हमारी प्रतिक्रिया तत्काल एकजुट और वैश्विक होनी चाहिए, और तुरंत उन लोगों तक मदद पहुंचानी चाहिए जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है.

'मज़बूत नेतृत्व व ठोस नीतियों' से करोड़ों का रोज़गार बचाना संभव

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कोविड-19 के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बादलों के बीच रोज़गार बचाए रखने के लिए अनेक उपाय सुझाए हैं. यूएन एजेंसी ने कहा है कि अगर सरकारों ने जल्द क़दम उठाए तो कार्यस्थलों पर कर्मचारियों का ख़याल रखने, अर्थव्यवस्था को स्फूर्ति प्रदान करने और लाखों-करोड़ों लोगों का रोज़गार बचाना संभव हो सकेगा. 

कोविड-19: सावधानी व सहानुभूति

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कोरोनावायरस कोविड-19 के ख़िलाफ़ एकजुट जंग छेड़ने और एक दूसरे का ख़याल रखने की पुकार लगाई है. उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह पर अमल करते हुए ऐहतियाती उपाय मुस्तैदी से करने का भी आहवान किया है. साथ ही इस स्वास्थ्य आपदा का मुक़ाबला करने में  एक दूसरे का ख़याल रखने का भी ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.

कोविड-19 के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने की पुकार, रखें एक दूसरे का ख़याल

संयक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि कोरोनावायरस यानी कोविड-19 अपने चरम पर पहुँचेगा और विश्व अर्थव्यवस्था मंदी से उबर जाएगी, मगर तब तक, “हम सभी को इस वायरस के संक्रमण की रफ़्तार को धीमा करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा, और एक दूसरे का ख़याल रखना होगा.” उन्होंने कोविड-19 के संक्रमण के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने का भी आहवान किया.

जलवायु परिवर्तन: ज़मीन, हवा, वातावरण, हर कहीं बढ़ रहा है संकट

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा व व्यापक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के सभी पहलुओं पर बहुत बड़ा असर डाल रहा है, साथ ही जलवायु संकट दुनिया भर की आबादी के स्वास्थ्य और रहन-सहन को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है.

 

रोज़गार, शिक्षा और ट्रेनिंग से वंचित युवाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि रोज़गार, शिक्षा और प्रशिक्षण के दायरे से बाहर युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं के इस समस्या से प्रभावित होने की आशंका दोगुना है.