आर्थिक विकास

चीन में भूस्खलन पीड़ितों के प्रति शोक

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चीन में रविवार को भूस्खलन के कारण मलबे में दब जाने से कई लोगों की मौत होने पर गहरी संवेदना व्यक्त की है. दक्षिणी चीन के ग्वेज़ो प्रांत में भारी बारिश की वजह से  भूस्खलन की घटना हुई जिसमें 20 से ज़्यादा घर मलबे में दब जाने की ख़बरें हैं. इस दुर्घटना में 36 लोगों के मारे जाने और अनेक के लापता होने की आशंका है. 

इकोसॉक की नई अध्यक्ष की बुनियादी स्वतंत्रताओं की हिमायत

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद (इकोसॉक) की नई अध्यक्ष मोना जुऊल ने अपना पद संभालने के मौक़े पर कहा है कि इस संस्था के आदर्श और गतिविधियाँ उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कि 1945 में थे जब इसका गठन किया गया था. नॉर्वे मूल की मोना जुऊल ने कहा कि ये परिषद आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वजूद में आई थी.

नवप्रवर्तन में स्विट्ज़रलैंड सबसे आगे, भारत की रैंकिंग में सुधार

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की नई रिपोर्ट ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2019’ के अनुसार नवप्रवर्तन (इनोवेशन) के क्षेत्र में स्विटज़रलैंड विश्व में पहले स्थान पर है और उसके बाद अमेरिका, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन का नंबर आता है. रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत ने  अपनी रैंकिंग में सुधार जारी रखते हुए 2019 में इस सूची में 52वां स्थान हासिल किया है जबकि 2015 में उसका नंबर 81वां था. 

एसडीजी के लिए भारत की सक्रियता

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में सक्रिय योगदान की प्रतिबद्धता दर्ज कराई है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय राजनैतिक मंच में भाग लेने के लिए मुख्यालय में आए नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर राजीव कुमार से यूएन समाचार ने ख़ास बातचीत की और यही जानना चाहा कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों में भारत किस तरह और कितना योगदान कर रहा है. रिपोर्टर महबूब ख़ान.

देशों के बीच और भीतर भारी असमानता मगर राहत के संकेत भी

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में बहुत से देशों के बीच और देशों के भीतर विभिन्न वर्गों व समाज के ग़रीब तबकों के लोगों में भारी असमानता व्याप्त है. अनेक देशों में ग़रीबी कम करने के प्रयासों में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है. इनमें भारत, कंबोडिया और बांग्लादेश प्रमुख हैं.

ग़रीबी और पर्यावरण चुनौतियों के लिए वैश्विक प्रयास ‘काफ़ी नहीं’ रहे हैं - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ग़रीबी और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए साल 2015 में विश्व नेताओं ने जो लक्ष्य निर्धारित किए थे उन्हें हासिल करने के लिए प्रयासों में समुचित महत्वाकांक्षा नज़र नहीं आई है. महासचिव ने  17 टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के प्रयासों में हुई प्रगति पर ताज़ा रिपोर्ट में ये विचार व्यक्त किए हैं. 

"बात करने और सीखने का असाधारण मौक़ा"

“हमारे पास एक दूसरे से बात करने का और एक दूसरे से सीखने का असाधारण अवसर है” ये कहना है संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (इकोसॉक) की अध्यक्ष इन्गा रहोंडा किंग का. उन्होंने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर उच्च स्तरीय राजनैतिक फ़ोरम (एचएलपीएफ़) का उदघाटन करते हुए ये विचार व्यक्त किए.

तापमान बढ़ने से 2,400 अरब डॉलर का नुक़सान होने का अनुमान

जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में कामकाज की उत्पादन क्षमता पर गंभीर असर पड़ने वाला है जिससे आमदनी वाले कामकाज और भारी आर्थिक नुक़सान होगा. ग़रीब देश सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे और कृषि व निर्माण क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे.

दुनिया के सामने ‘जलवायु रंगभेद’ का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि जलवायु से जुड़े रंगभेद का एक ऐसा नया दौर शुरू होने का ख़तरा नज़र आ रहा है जहाँ बढ़ते तापमान और भूख से बचने के लिए अमीर लोग धन के बल पर अपने लिए बेहतरी का रास्ता बना लेंगे. उनका मानना है कि पिछले 50 वर्षों में जितना भी विकास हुआ, वैश्विक स्वास्थ्य में बेहतरी आई है और ग़रीबी कम करने के प्रयास हुए हैं, जलवायु परिवर्तन की वजह से वे सभी विफल हो सकते हैं. 

30 वर्षों में विश्व आबादी हो जाएगी नौ अरब 70 करोड़

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की जनसंख्या बढ़कर नौ अरब 70 करोड़ हो जाएगी.  भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है. सोमवार को जारी हुई नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बच्चे पैदा होने की दर में कमी आ रही है और कई देशों को बूढ़ी होती जनसंख्या से उपजने वाली चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा.