आर्थिक विकास

मछली खपत में इज़ाफ़ा, टिकाऊ प्रबन्धन की सख़्त ज़रूरत

दुनिया भर में इन्सानों के भोजन में मछलियों की खपत वर्ष 2018 में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई थी और आने वाले दशक के दौरान इसमें और भी ज़्यादा वृद्धि होने का अनुमान है. खाद्य और कृषि संगठन ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ये तथ्य पेश करते हुए टिकाई मत्स्य प्रबन्धन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. इसे सोफ़िया रिपोर्ट कहा जाता है.

कोविड-19: दूसरे विश्व युद्ध के बाद विश्व अर्थव्यवस्था पर सबसे बड़ा संकट

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण तालाबन्दी और अन्य सख़्त पाबन्दियों से विश्व अर्थव्यवस्था पर बेहद तेज़ गति से बड़ा और भारी झटका लगा है जिससे गम्भीर संकट पैदा हो गया है. विश्व बैंक (World Bank) के ताज़ा अनुमान के अनुसार इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के बढ़ने के बजाय 5.2 प्रतिशत तक सिकुड़ने की आशंका है जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद अब तक की सबसे गहरी आर्थिक मन्दी होगी.  

महासागर संरक्षण के लिए ज़रूरत है फ़ौलादी इरादों की

दुनिया जब कोविड-19 महामारी की चपेट में नज़र आ रही है तो महासागरों की हिफ़ाज़त करने के लिए फ़ौलादी इरादे वाले व्यवहारवाद की आवश्यकता है. ये कहना है महासागरों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के विशेष दूत पीटर थॉम्पसन का, जिन्होंने 8 जून को मनाए जाने वाले विश्व महासागर दिवस के मौक़े पर ये बात कही है. 

खाद्य सुरक्षा दिवस: सभी की है अहम भूमिका

ख़राब या अस्वस्थ भोजन खाने से हर साल दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोग बीमार पड़ते हैं, जोकि लगभग हर दस व्यक्ति में से एक व्यक्ति का आँकड़ा है, इनमें से भी लगभग 4 लाख 20 हज़ार लोग हर साल ख़राब भोजन खाने के कारण मौत के मुँह में चले जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों ने रविवार को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के मौक़े पर इस मुद्दे की तरफ़ ध्यान आकर्षित किया है.

यूरो, पाउण्ड, डॉलर - प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली रक़म पर गाज

कहीं से यूरो, कहीं से पाउँड और कही से डॉलर, विदेशों में रहने वाले प्रवासी कामगार अपने मूल स्थानों पर रहने वाले अपने परिवारों को धन भेजते रहे हैं. इस धन से करोड़ों लोगों को अत्यन्त ग़रीबी से उबारने में मदद मिलती है और अन्ततः टिकाऊ विकास लक्ष्यों का दिशा में प्रगति होती है. उसके बाद आ गई कोविड-19 नामक महामारी, जिसने इस धन पर गहरी छाया छोड़ दी है.

कोविड-19: तत्काल कार्रवाई के अभाव में 'अकल्पनीय तबाही' का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के ख़िलाफ़ देशों ने साथ मिलकर अगर अभी प्रयास नहीं किए तो यह संकट दुनिया भर में अकल्पनीय तबाही और पीड़ा का कारण बन जाएगा. यूएन प्रमुख ने टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय पोषण पर गुरुवार को आयोजित एक वर्चुअल उच्चस्तरीय कार्यक्रम में छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तत्काल सामूहिक कार्रवाई की पुकार लगाई है.

कोविड-19: युवाओं के लिए रोज़गार, शिक्षा व ट्रेनिंग के अवसरों पर भारी असर

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया में 16 फ़ीसदी से ज़्यादा युवाओं का रोज़गार छिन गया है और जिनके पास काम है उनके भी कामकाजी घण्टों में 23 फ़ीसदी की कटौती हुई है. अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के नए अपडेट के मुताबिक कोरोनावायरस से युवाओँ पर तिहरी मार पड़ी है और उनके लिए रोज़गार के साथ-साथ शिक्षा व ट्रेनिंग के अवसरों पर भी संकट खड़ा हो गया है. 

अनौपचारिक रोज़गार पर गाज

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि कोविड-19 के कारण दुनिया भर में अनौपचारिक सैक्टर में काम करने वाले लगभग दो अरब लोगों की आजीविका पर संकट के बादल मँडराने लगे हैं. करोड़ों लोगों के भुखमरी के गर्त में चले जाने का भी ख़तरा है. एक वीडियो फ़ीचर...

कोविड-19: मानव विकास की दिशा में उलटफेर होने का ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने बुधवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि मानव विकास पथ पर प्रगति में पिछले तीन दशकों में पहली बार गिरावट आने की आशंका है. वैश्विक महामारी कोविड-19 के स्वास्थ्य प्रभावों के अलावा सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र में व्यापक असर से मानव विकास की दिशा में बड़ा उलटफेर हो सकता है.

कोविड-19: 'अफ्रीकी प्रगति को बचाने के लिए एकजुटता की दरकार'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी ने अफ्रीकी महाद्वीप में अभी तक हासिल की गई प्रगति के खो जाने का जोखिम पैदा कर दिया है. उन्होंने बुधवार को तमाम दुनिया से अफ्रीकी लोगों के साथ मज़बूती से खड़े होने का आग्रह किया है – अभी और महामारी से बेहतर तरीक़े से उबरने के प्रयासों के दौरान.