संस्कृति और शिक्षा

विश्व ब्रेल दिवस: सुलभ जानकारी की महत्ता पर ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र ने, सोमवार, 4 जनवरी को, विश्व ब्रेल लिपि दिवस पर नेत्रविकारों वाले व्यक्तियों और आंशिक रूप से दृष्टिबाधित लोगों के मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान करने के वाली, वैश्विक स्पर्शनीय संचार प्रणाली की महत्ता पर विशेष ज़ोर दिया है.

एक ऐसा वायरस जिसने विश्व को घुटनों पर ला दिया: शिक्षा का संकट

वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी से निपटने के उपायों के तहत, दुनिया भर में अनेक स्थानों पर स्कूल भी बन्द करने पड़े हैं, जिसके कारण विश्व भर में बच्चों की शिक्षा में व्यवधान पैदा हुआ. स्कूल खुल और बन्द हो रहे हैं, अलबत्ता कुछ बच्चों को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिये ऑनलाइन माध्यम भी उपलब्ध हैं, जबकि बहुत से बच्चे इससे वंचित हैं. मगर, निस्सन्देह, कमज़ोर हालात वाले बच्चे, तालाबन्दी उपायों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. इस लेख में, शिक्षा क्षेत्र पर कोविड-19 महामारी के असर के बारे में एक नज़र...

वर्ष 2020: जिसे कोविड-19 ने बिल्कुल उलट-पलट कर दिया...

संकट में संस्कृति: कोविड-19 के कारण कला जगत पर मंडराया ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने कहा है कि पूरे विश्व में 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार देने वाले सांस्कृतिक क्षेत्र पर, कोरोनोवायरस महामारी के कारण अपेक्षा से अधिक मार पड़ी है. यूनेस्को से मुताबिक इस संकट से उबरने के लिये क्षेत्र को लक्षित नीतियों और कार्रवाई की ज़रूरत है.

स्कूल बन्द करना, कोविड-19 के ख़िलाफ़ रणनीति में ग़लत क़दम, यूनीसेफ़

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि जो देश कोरोनावायरस महामारी का मुक़ाबला कर रहे हैं, वो इन प्रयासों के तहत राष्ट्रीय स्तर पर या बड़े पैमाने पर स्कूल बन्द करने का रास्ता ना अपनाएँ क्योंकि ये महामारी से लड़ने का ग़लत तरीक़ा है और इसके सामाजिक स्तर पर बहुत गम्भीर नुक़सान हैं.

एक डिजिटल खाई: 1.3 अरब बच्चों के पास घर पर शिक्षा के लिये इंटरनेट नहीं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में स्कूल जाने की उम्र – 3 से 17 वर्ष - के बच्चों की लगभग दो तिहाई संख्या – यानि लगभग 1 अरब 30 करोड़ बच्चों के पास अपने घरों पर इंटरनेट कनेक्शन नहीं है, जिसके कारण वो ऐसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने से वंचित हो रहे हैं जिनकी आधुनिक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिये ज़रूरत होती है.

महामारी लम्बी खिंचने से एक पूरी पीढ़ी के भविष्य पर जोखिम

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से संक्रमित होने वाले बच्चों में लक्षण तो मामूली ही नज़र आ रहे हैं, लेकिन संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, साथ ही उनकी शिक्षा और पोषण पर भी दीर्घकालीन प्रभाव बढ़ रहा है, और युवाओं की एक पूरी पीढ़ी का स्वास्थ्य व रहन-सहन उनके पूरे जीवन को ही बदल देने वाला होने की आशंका है. 

क़रीब एक तिहाई बच्चे, स्कूलों में होते हैं - हिंसा व बदमाशी के शिकार

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनिया भर में बच्चों को स्कूलों में हिंसा और डराने-धमकाने यानि बदमाशी का सामना करना पड़ रहा है, हर तीन में से एक छात्र को कम से कम एक महीने में हमलों का निशाना बनाया जाता है, और 10 में से एक बच्चे को, साइबर बदमाशी का भी सामना करना पड़ता है.

कोविड-19 ने निर्धन देशों में बच्चों को किया चार महीने की स्कूली पढ़ाई से वंचित

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 ने निर्धनतम देशों में स्कूली बच्चों को लगभग चार महीने की पढ़ाई-लिखाई से वंचित कर दिया है जबकि उच्च आय वाले देशों में बच्चों की छह हफ़्ते की पढ़ाई पर ही असर पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF), संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवँ सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) और विश्व बैंक (World Bank) की एक साझा रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई है. 

पाकिस्तान: पेशावर में धार्मिक स्कूल पर हमले की कड़ी निन्दा

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने पाकिस्तान के पेशावर शहर में मंगलवार को एक धार्मिक स्कूल पर हुए हमले की कड़ी शब्दों में निन्दा की है. इस हमले में सात से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है और 130 के घायल होने की ख़बर है. 

कोविड-19: शिक्षा पर संकट - पीढ़ीगत तबाही रोकने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि कोविड-19 महामारी के कारण दुनिया भर में छात्रों की शिक्षा के लिये भीषण संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने आगाह किया है कि मौजूदा समय में विश्व पर एक पीढ़ीगत तबाही का जोखिम मँडरा रहा है जिसे टालने के लिये हरसम्भव प्रयास किये जाने होंगे.