जलवायु परिवर्तन

क्या दुनिया कोयला युग समाप्त करने के लिए तैयार है?

बिजली की सर्व उपलब्धता ने दुनिया बदल दी है, इससे देशों की अर्थव्यवस्थाएं विकसित हुईं हैं और लाखों लोग ग़रीबी के चंगुल से बाहर निकले हैं. हालांकि इस सफलता की एक बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी है - जीवाश्म ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से  के लिए ज़िम्मेदार है. ये उन ग्रीनहाउस गैसों में से एक है जो वायुमंडल में गर्मी को क़ैद करके पृथ्वी को गर्म करती हैं - और इसका लगभग दो - तिहाई उत्सर्जन कोयले से आता है.

2019 जलवायु सम्मेलन: कॉप-25 बैठक की पांच महत्वपूर्ण बातें

जलवायु परिवर्तन तेज़ रफ़्तार से हो रहा है – औद्योगिक क्रांति के बाद पृथ्वी का औसत तापमान 1.1 डिग्री बढ़ चुका है जिसका लोगों के जीवन पर व्यापक असर हुआ है, और अगर मौजूदा रुझान इसी तरह से जारी रहे तो इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी 3.4 से 3.9 डिग्री सेल्सियस तक हो सकती है. मानवता के लिए इसके विनाशकारी नतीजे होंगे. स्पेन के मैड्रिड शहर में 2 दिसंबर से शुरू हुए वार्षिक यूएन जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) से ठीक पहले यह चेतावनी जारी की गई है.

जलवायु सम्मेलन: हरित अर्थव्यवस्था को आगे बढ़कर अपनाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हरित अर्थव्यवस्था से डरने के बजाय उसे खुलकर अपनाया जाना चाहिए. यूएन प्रमुख ने सोमवार को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में वार्षिक यूएन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP25) के पहले दिन प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दोहराया कि महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई के लिए मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति दर्शाए जाने के साथ-साथ कार्बन की क़ीमत तय किए जाने की ज़रूरत है. 

जलवायु संकट: "गर्त में खड़े रहकर खुदाई रोकनी होगी, नहीं तो..."

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा है कि विश्व स्तर पर मौजूद जलवायु संकट का मुक़ाबला करने के लिए दुनिया को ज़्यादा जवाबदेही, ज़िम्मेदारी और प्रभावशाली नेतृत्व की ज़रूरत है. इसके लिए उन्होंने सोमवार को मैड्रिड में शुरू हो रहे जलवायु सम्मेलन कॉप-25 में तमाम देशों से और ज़्यादा महत्वाकांक्षाएँ व संकल्पों का भी आहवान किया है.

तापमान 3 डिग्री के उछाल की राह पर, जलवायु लक्ष्य हासिल हुए तब भी

वर्ष 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों और संकल्पों को हासिल भी कर लिया जाए तो भी दुनिया तापमान में 3.2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी की राह पर आगे बढ़ रही है.  जिसका मतलब होगा कि दुनिया में जलवायु परिवर्तन के और भी ज़्यादा व्यापक व विनाशकारी प्रभाव होंगे, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने ये चेतावनी वार्षिक कार्बन अंतर रिपोर्ट में मंगलवार को जारी की है.

वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी

संयुक्त राष्ट्र मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी जारी की है कि वातावरण में तीन प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों – कार्बन डाय ऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड - का स्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे मानवता के भविष्य के लिए ख़तरा पैदा हो रहा है. यूएन एजेंसी ने सरकारों से अपील की है कि जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के लिए तत्काल प्रयास करने होंगे जिनकी पुकार वर्ष 2015 के पेरिस समझौते में भी लगाई गई है.

नेपाल: जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए नई परियोजना मंज़ूर

नेपाल में जलवायु परिवर्तनों के असर के प्रति सहनशीलता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के उद्देश्य से बुधवार को तीन करोड़ 90 लाख डॉलर की एक परियोजना को मंज़ूरी दी गई है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित ग्रीन क्लाइमेट फ़ंड (GCF) के बोर्ड ने ताज़ा निर्णय पर जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट से दस लाख नेपाली नागरिकों को लाभ होगा. 

यूएन का नया वन प्रोजेक्ट जलवायु संकल्पों को पूरा करने में देशों की मदद करेगा

संयुक्त राष्ट्र ने बेहतर वन प्रबंधन पर एक ऐसा नया प्रोजेक्ट तैयार किया है जिसकी मदद से एशिया, अफ्रीका और लातीनी अमेरिका के देशों में जलवायु परिवर्तन का सामना करने में मदद मिलेगी. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ) ने ये योजना तैयार की है जिसे सोमवार को जारी किया गया.

अनप्लास्टिक इंडिया-बढ़ती मुहिम

जलवायु संकट का मुक़ाबला करने के लिए दुनिया भर में युवाओं ने भी कमर कस ली है. ऐसे ही एक युवा शैलेश सिंघल ने भारत में प्लास्टिक के ख़िलाफ़ अनोखी मुहिम छेड़ी है जिसका नाम है - अनप्लास्टिक इंडिया. यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने शैलेश के साथ ख़ास बातचीत की.

लड़ाई-झगड़ों में पर्यावरण को नुक़सान पहुँचाने के चलन को रोकना होगा

अगर दुनिया को इस पृथ्वी और इस पर बसने वाले सभी इंसानों और जीव-जंतुओं के लिए एक टिकाऊ भविष्य का लक्ष्य हासिल करना है तो युद्धों और संघर्ष के हालात में पर्यावरण को महफ़ूज़ रखने के लिए ज़्यादा कार्रवाई करनी होगी. ये चेतावनी भरे शब्द संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की मुखिया इन्गा एंडरसन ने बुधवार को युद्ध व सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण को नुक़सान पहुँचाने से रोकने के लिए मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर कहे.