जलवायु परिवर्तन

जलवायु संकल्पों को पूरा करने के कितने पास है दुनिया?

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सितंबर में होने वाली जलवायु शिखर वार्ता की तैयारी ज़ोरों पर है जिसे हाल के दशको में होने वाले सबसे बड़े जलवायु सम्मेलनों में माना जा रहा है. जलवायु आपात स्थिति और उससे उपजती चुनौतियों के बीच इस संकट से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन क्या मौजूदा कार्रवाई पर्याप्त है?

बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए वैश्विक कार्रवाई की पुकार

भारत की राजधानी नई दिल्ली में कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 में सोमवार को उच्च-स्तरीय खंड का आयोजन हुआ जिसमें भूमि के मरुसस्थलीकरण से बचाकर उसे उपजाऊ बनाने के उपाय करने में तेज़ी लाने का आहवान किया गया.

'हम अपना भविष्य ख़ुद ही तबाह कर रहे हैं'- मानवाधिकार उच्चायुक्त

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की जिनीवा में सोमवार को वार्षिक बैठक मानवाधिकार उच्चायुक्त की इस चेतावनी के साथ शुरू हुई कि अमेजॉन में लगी भीषण आग ना सिर्फ़ जंगलों को जला रही है, बल्कि “हम भी अपने भविष्य को तबाह कर रहे हैं, सच में”.

'अगर पृथ्वी को बचाना है तो भूमि को बचाएं, अर्थव्यवस्था में जान फूँकें'

भूमि को बंजर होने से बचाकर उपजाऊ बनाने में ज़्यादा संसाधन निवेश करने से ना सिर्फ़ पृथ्वी ग्रह को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी, बल्कि वर्तमान के कुछ सबसे बड़े मुद्दों का समाधान तलाश करने की भी शुरुआत हो सकती है. दुनिया भर में मरुस्थलीकरण के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूएनसीसीडी के कार्यकारी सचिव इब्राहीम चियाओ ने नई दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के ज़रिए पत्रकारों से बातचीत में ये बात कही है. इस विषय पर 14 वां वैश्विक सत्र 2 से 13 सितंबर तक राजधानी दिल्ली में हो रहा है.

 

बहामास में डोरियन तूफ़ान की तबाही के बीच सहायता कार्य तेज़

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और उसके साझेदारों ने डोरियन तूफ़ान से बहामास में भारी तबाही होने की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वो इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होने वाले हर एक व्यक्ति के लिए चिंतित हैं. डोरियन तूफ़ान ने बहामास और अबाको दो कैरीबियाई द्वीपों को बुरी तरह प्रभावित किया है. 

भूमि प्रबंधन पर संयुक्‍त राष्ट्र सम्‍मेलन - कॉप-14 भारत में शुरू

भूमि को जलवायु परिवर्तन के ख़तरों से बंजर होने से बचाने के लिए कान्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप का 14वां सम्मेलन भारत में सोमवार को आरंभ हुआ. 2 से 13 सितंबर तक राजधानी दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा में होने वाले इस सम्मेलन में लगभग 196 देश शिरकत कर रहे हैं जो बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के तरीक़ों पर मंथन करेंगे.

'दशकों में हासिल हुई प्रगति कुछ ही घंटों में ख़त्म हो सकती है'

प्राकृतिक आपदाएँ जिस तरह विकास को नकारती हैं, शायद ही कोई और वजह ऐसा करती हो, ये कहना है संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का जिन्होंने सातवें टोकियो अंतरराष्ट्रीय अफ्रीका विकास सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिभागियों को संबोधित किया. इस सम्मेलन का ये सातवां वर्ष है.

ग्रेटा थनबर्ग का नाव काफ़िला न्यूयॉर्क पहुँचा, जलवायु मुद्दे को मिली नई ऊर्जा

 एक पखवाड़े की समुद्री यात्रा के बाद किशोरी क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग का नाव काफ़िला बुधवार को न्यूयॉर्क शहर पहुँचा जिसने जलवायु मुद्दे में कुछ और जान फूँक दी. ग्रेटा थनबर्ग संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सितंबर में होने वाले दो जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए यहाँ पहुँची हैं.

वन्य जीवों के संरक्षण के लिए रौशनी की किरण

दुनिया भर में अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे बहुत से वन्य जीवों को बुधवार को कुछ राहत मिली. वो इस तरह कि विश्व भर में पशुओं और पेड़-पौधों के व्यापार को टिकाऊ बनाने और उनके संरक्षण के लिए बेहतर उपाय करने के बारे में देशों ने जिनीवा में एक बड़ी बैठक हुई जिसमें आमतौर पर देशों के बीच सहमति बन गई.

जलवायु इमरजेंसी से निपटने के लिए 'मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति' की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया भर में लोग जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने और एक हरित व स्वच्छ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान कर रहे हैं. जी-7 नेताओं से वार्ता के दौरान उन्होंने ध्यान दिलाया कि जलवायु आपात स्थिति से निपटने के लिए साधनों की कमी नहीं है लेकिन इस संकट से पार पाने के लिए मज़बूत संकल्प और दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है.