जलवायु और पर्यावरण

इंटरव्यू: यूएन छत पर सोलर पैनल

जलवायु आपदा का सामना करने के प्रयासों के तहत संयुक्त राष्ट्र में कान्फ्रेंस इमारत की छत पर सोलर पैनल और हरी घास लगए गए हैं. ये काम मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र के संचालन विभाग के अवर महासचिव अतुल खरे की देखरेख में हुआ है. उनके साथ ख़ास बातचीत.

जलवायु कार्रवाई की उम्मीदों पर 'खरे नहीं उतर रहे' विश्व नेता

युवा जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर वार्ता को संबोधित करते हुए विश्व नेताओं को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ठोस जलवायु कार्रवाई से जुड़ी आशाओं पर अगर वे खरे नहीं उतरे तो उन्हें कभी माफ़ नहीं किया जाएगा. थुनबर्ग ने बिना लाग-लपेट के कहा है कि इतने बड़े संकट के सामने खड़े होने के बावजूद नेता परिपक्व ढंग से सीधी-सच्ची बात नहीं कर रहे हैं.

जलवायु एमरजेंसी से विश्व शांति को ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने टिकाऊ और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण के लिए तत्काल जलवायु कार्रवाई की अहमियत को रेखांकित किया है ताकि पर्यावरण और मानव सुरक्षा व कल्याण को उपज रहे ख़तरों की रोकथाम हो सके. न्यूयॉर्क में शुक्रवार को एक शांति सभा संबोधित करते हुए महासचिव गुटेरेश ने आगाह किया है कि मौजूदा दौर में विश्व शांति के समक्ष नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं जिनसे तत्काल निपटा जाना ज़रूरी है.

इंटरव्यू: शांति और पृथ्वी की हिफ़ाज़त के लिए ज़रूरी कार्रवाई करने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व नेताओं से दुनिया के सामने तमाम नाटकीय समस्याओं का समाधान निकालने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आहवान किया है. महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र के 74वें सत्र के शुरू होने के अवसर पर यूएन समाचार के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में ये पुकार लगाई है.

कॉप-14, माहिरों की राय

मरुस्थलीकरण रोकने और भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने के प्रयासों को मज़बूती देने के इरादे से कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 सम्मेलन भारत की राजधानी दिल्ली में 2 से 13 सितंबर तक हुआ. विभिन्न देशों और क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों में से कुछ के विचार...

मरुस्थलीकरण सम्मेलन कॉप-14 भारत में

दुनिया भर में भूमि क्षय और मरुस्थलीकरण को रोकर ज़मीन को खेतीबाड़ी के लिए उपजाऊ बनाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के उपायों में सहयोग देने के रास्ते तलाश करने के लिए कॉप-14 सम्मेलन भारत में 2 से 13 सितंबर तक हो रहा है. एक झलक...

उपजाऊ भूमि का मरुस्थल में बदलना बड़ी समस्या

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने सोमवार को 'विश्व मरुस्थलीकरण रोकथाम दिवस' पर अपने वीडियो संदेश में सचेत किया है कि दुनिया हर साल 24 अरब टन उपजाऊ भूमि खो देती है. उन्होंने कहा कि भूमि की गुणवत्ता ख़राब होने से राष्ट्रीय घरेलू उत्पाद में हर साल आठ प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. भूमि क्षरण और उसके दुष्प्रभावों से मानवता पर मंडराते जलवायु संकट के और गहराने की आशंका है. 

मुश्किल समय में आशा की उजली किरण:यूएन महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नववर्ष की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में कहा है कि दुनिया कई खतरों से जूझते हुए एक मुश्किल दौर से गुजर रही है .  पिछले साल 2018 के आगमन पर दिए अपने संदेश में जारी एक रेड अलर्ट की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उस समय की कई चुनौतियां आज भी बनी हुई हैं लेकिन आशा का दामन थामे रखने के भी कई कारण हैं.