जलवायु और पर्यावरण

भारत: गंगा नदी में प्लास्टिक प्रदूषण के ख़िलाफ़ यूनेप की मुहिम

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) ने 2020 में ,एशिया और प्रशान्त क्षेत्र की गंगा और मीकांग नदियों में, प्लास्टिक कचरे के रिसाव की निगरानी और सर्वेक्षण करने के लिये ‘काउण्टरमैज़र परियोजना’ (CounterMEASURE project) शुरू की थी. यह परियोजना जापान से वित्त पोषित है. इसके तहत भारत में, गंगा नदी के किनारे बसे हरिद्वार, आगरा और प्रयागराज (पूर्व इलाहाबाद) शहरों में, प्लास्टिक जमाव और रिसाव वाले मुख्य केन्द्रों की पहचान की जी रही है. पूरी कार्रवाई पर भारत में यूनेप की सम्पादकीय सलाहकार, अनूषा कृष्णन की रिपोर्ट...

बांग्लादेश: किसानों के लाभ के लिये जलवायु निवेश ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने सरकारों से, छोटे किसानों की ज़रूरतों को जलवायु वित्तपोषण चर्चाओं के केन्द्र में रखने की अपील की है. वर्तमान में केवल 1.7 प्रतिशत जलवायु वित्त ही विकासशील देशों में छोटे किसानों के पास जाता है, जबकि उनपर जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज़्यादा है. बांग्लादेश के छोटे किसानों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते संकट पर एक वीडियो रिपोर्ट..

भारत: युवजन ही लाएंगे बदलाव

भारत एक वैश्विक जलवायु नेतृत्व की ओर अग्रसर है. भारत का लक्ष्य है - 2030 तक अपनी कुल ऊर्जा का 40% नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न करना. भारत की जलवायु महत्वाकांक्षा को साकार करने के लिये, युवजन भी दृढ़ता से खड़े हैं. भारत में WETHECHANGENOW अभियान के तहत जलवायु कार्रवाई पर एक वीडियो रिपोर्ट...
 

जलवायु परिवर्तन: सहनसक्षम विश्व की ओर

विश्व के जलवायु संकट का मतलब है कि हम ज़्यादा सघन तूफ़ान, समुद्रों का बढ़ता जल स्तर, बढ़ता सूखा, और ज़्यादा इनसानी तकलीफ़ें देख रहे हैं. मगर, एक प्रमुख भारतीय पर्यावरणविद सुनीता नारायण का कहना है कि ज़रूरी नहीं कि हम इसे स्वीकार ही करके बैठ जाएँ. हम जानते हैं कि अपने गाँवों, खेतों, शहरों, रास्तों और घरों को किस तरह सुरक्षित बनाया जाए. हमें इंसाफ़ की ख़ातिर, तत्काल कार्रवाई करनी होगी. जलवायु मुद्दे पर यूएन वीडियो सिरीज़ में अगली कड़ी...

कॉप26: 2030 तक वनों की पुनर्बहाली का लक्ष्य, 100 से अधिक देशों ने जताई प्रतिबद्धता 

कॉप26 जलवायु सम्मेलन के दौरान, विश्व नेताओं की शिखर बैठक के दूसरे दिन, वन संरक्षण व पुनर्बहाली के लिये एक अहम प्रतिज्ञा की आधिकारिक घोषणा की गई है. इसके साथ ही, सार्वजनिक व निजी सैक्टर के पक्षकारों ने जलवायु परिवर्तन, जैविविधता लुप्त होने, भुखमरी और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिये संकल्प व्यक्त किये हैं.