जलवायु और पर्यावरण

कॉप-14, माहिरों की राय

मरुस्थलीकरण रोकने और भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने के प्रयासों को मज़बूती देने के इरादे से कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़ यानी कॉप-14 सम्मेलन भारत की राजधानी दिल्ली में 2 से 13 सितंबर तक हुआ. विभिन्न देशों और क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों में से कुछ के विचार...

मरुस्थलीकरण सम्मेलन कॉप-14 भारत में

दुनिया भर में भूमि क्षय और मरुस्थलीकरण को रोकर ज़मीन को खेतीबाड़ी के लिए उपजाऊ बनाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के उपायों में सहयोग देने के रास्ते तलाश करने के लिए कॉप-14 सम्मेलन भारत में 2 से 13 सितंबर तक हो रहा है. एक झलक...

उपजाऊ भूमि का मरुस्थल में बदलना बड़ी समस्या

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने सोमवार को 'विश्व मरुस्थलीकरण रोकथाम दिवस' पर अपने वीडियो संदेश में सचेत किया है कि दुनिया हर साल 24 अरब टन उपजाऊ भूमि खो देती है. उन्होंने कहा कि भूमि की गुणवत्ता ख़राब होने से राष्ट्रीय घरेलू उत्पाद में हर साल आठ प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. भूमि क्षरण और उसके दुष्प्रभावों से मानवता पर मंडराते जलवायु संकट के और गहराने की आशंका है.