जलवायु और पर्यावरण

चीन में साफ़ पानी की ख़ातिर...

चीन में, बीजिंग की एक युवती ने एक ऐसा मोबाइल ऐप बनाया है जिससे ग्रामीणों को यह पता चलता है कि उनके स्थानों पर उपलब्ध पानी पीने के लिये सुरक्षित है या नहीं. इसके लिये उन्हें संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण पुरस्कार - 'यंग चैम्पयिन ऑफ़ द अर्थ' से नवाज़ा गया है... (वीडियो)

विद्युत मोहन: यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ-2020

भारत के युवा इंजीनियर विद्युत मोहन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ((UNEP) का - यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ 2020 चुना गया है. विद्युत मोहन ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जिसके ज़रिये, खेतीबाड़ी के कूड़े-करकट को पर्यावरण अनुकूल ईंधन में तब्दील किया जा सकता है, जिससे ना केवल प्रदूषण को रोकने में मदद मिलती है, बल्कि उससे आमदनी भी होती है. देखिये, इस वीडियो में...

युवा पृथ्वी चैम्पियन: स्वच्छ ऊर्जा की चाह पूर्ति के वाहक, विद्युत मोहन

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने, भारत के एक युवा इंजीनियर विद्युत मोहन को, एक ऐसी अदभुत तकनीक ईजाद करने के लिये पुरस्कृत किया है, जिससे ना केवल ऊर्जा पैदा होती है, बल्कि हवा को भी साफ़-सुथरा रखने में मदद मिलती है और अन्ततः जलवायु परिवर्तन में भी कमी होती है.

जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020

ऐतिहासिक पेरिस समझौता वजूद में आने के पाँच वर्ष बाद, विश्व नेताओं ने जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिये, और अब तक हुई प्रगति को आगे बढ़ाने के लिये, जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020 में, नए संकल्प व्यक्त किये. कुछ झलकियाँ... (वीडियो)

CAS-20: नए महत्वाकाँक्षी लक्ष्य, जलवायु आपदा घोषित करने की पुकार भी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020 में विश्व नेताओं से अपील की है कि वो अपने यहाँ तब तक जलवायु आपदा घोषित कर दें जब तक कि कार्बन निष्पक्षता का लक्ष्य नहीं हासिल कर लिया जाता है. विभिन्न देशों ने कार्बन उत्सर्जन निष्पक्षता की स्थिति हासिल करने के लिये नई योजनाओं, नीतियों और समय सीमा के महत्वाकाँक्षी लक्ष्यों की घोषणा की है.

जलवायु महत्वाकाँक्षा सम्मेलन-2020 पर विशेष सामग्री

नवीन यूएन जलवायु पहल

यूएन जलवायु सम्मेलन-2019 से उत्पन्न अनेक पहलें, जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ लड़ाई में प्रगति दर्ज कर रही हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. जलवायु कार्रवाई गठबन्धन, नैट-ज़ीरो की दौड़ का नेतृत्व कर रहा है. एक झलक...

पृथ्वी के साथ सुलह करने का समय

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि 21वीं सदी के लिये - जलवायु संकट के ख़िलाफ़ लड़ाई सर्वोच्च प्राथमिकता है. न्यूयॉर्क स्थित कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में दिये एक भावुक भाषण में उन्होंने स्पष्ट कहा, "इसे सीधे शब्दों में कहें तो ग्रह टूटने के कगार पर पहुँच गया है और पृथ्वी के साथ सुलह करने का वक़्त है." वीडियो सन्देश...

जलवायु आपदा: 'प्रकृति के साथ सुलह करने की घड़ी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु आपदा के ख़िलाफ़ लड़ाई को 21वीं सदी की सर्वोच्च प्राथमिकता क़रार दिया है. उन्होंने न्यूयॉर्क के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में दिये गए अपने एक उत्साहपूर्ण और स्पष्ट भाषण में ये बात कही.

कोविड-19: एक लड़की की नज़र में भविष्य

दुनिया भर की लड़कियाँ एक ऐसे भविष्य की कल्पना करती हैं जो समावेशी और निष्पक्ष हो. माली में 15 साल की मकदीदिया कहती हैं, "मैं सभी बच्चों के अभिभावकों से कहना चाहता हूँ कि वो यह समझें कि हम कुछ कहना चाहते हैं, और हमारे विचार मायने रखते हैं, क्योंकि हम दुनिया का भविष्य हैं." 

यह वीडियो, लड़कियों ने ख़ुद बनाकर, अपने विचार, अपने शब्दों में, कैमरे में समेटे हैं... (वीडियो सौजन्य: यूनीसेफ़)
 

काँच की बोतलें और उदित सिंघल

दुनिया भर में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रयासों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिये संयुक्त राष्ट्र ने 17 युवाओं को एसडीजी चैम्पियन घोषित किया है. इनमें, भारत के उदित सिंघल भी शामिल हैं. काँच के कूड़े की समस्या भी प्लास्टिक के कूड़े जैसी न बन जाए, इस विचार के साथ उदित सिंघल ने भारत की राजधानी दिल्ली में, 2019 में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर Glass2Sand की स्थापना की. तब उदित सिंघल की उम्र 17 वर्ष थी.

उदित सिंघल ने तब से लेकर अब तक लगभग 8 हज़ार काँच की बोतलों को कूड़ा घर (Landfill) में जाने से रोका है, और उन बोतलों को 4 हज़ार 800 किलोग्राम उच्च ग्रेड सिलिका रेत में परिवर्तित करने में सफलता हासिल की है. उदित सिंघल, अपनी इस पहल को स्वयंसेवक नेटवर्क के माध्यम से फैलाकर, पूरे दिल्ली शहर को, बोतलों से छुटकारा दिलाने की मुहिम में जुटे हैं. 

यूएन न्यूज़ हिन्दी ने उदित सिंघल से सम्पर्क करके, टिकाऊ विकास पर उनके कार्य को लेकर विस्तार से बातचीत की.... (वीडियो)