जलवायु परिवर्तन

मरुस्थलीकरण व सूखा विरोधी दिवस

मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का स्वास्थ्य भी ख़राब चल रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी की तकलीफ़ों में और इज़ाफ़ा हुआ है. मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

पृथ्वी का ख़याल करें, तुरन्त!

भारत की अनेक आस्था व धार्मिक हस्तियों ने इस वर्ष पर्यावरण दिवस के मौक़े पर पृथ्वी की धरोहर को सहेजने के लिए विभिन्न उपाय करने की अपील की है. इनमें प्रकृति को नुक़सान नहीं पहुँचाना और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना शामिल है. पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों की बेहतरी के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है. इन धार्मिक हस्तियों का वीडियो सन्देश...

जैव विविधता दिवस

यूएन महासचिव ने 22 को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौक़े पर कहा है कि इन्सानों के तमाम समाधान प्रकृति में समाहित हैं इसलिए बेहतर वांछित भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर कलयाण के लिए प्रकृति के साथ बेहतर सन्तुलन बनाना बहुत ज़रूरी है. वीडियो सन्देश...

मधुमक्खियों की अहमियत

20 मई को मधुमक्खी दिवस मनाया जा रहा है. इस मौक़े पर खाद्य आपूर्ति, जैव विविधता व पारिस्थितिकी तन्त्र में परागण जीवों के योगदान के बारे में जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है. शहद के अलावा मधुमक्खियों की और भी है अहमियत. देखें ये वीडियो...

एशिया-प्रशान्त के महासागरों की पुनर्बहाली की उम्मीद

हाल के वर्षों में समुद्री प्रदूषण, अत्यधिक मत्स्य-पालन और तेज़ी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के महासागरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है. लेकिन एशिया और प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) द्वारा बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि कोविड -19 महामारी के कारण इन्सानी गतिविधियों, मानवीय गतिशीलता और संसाधनों की माँग अस्थायी रूप से बन्द होने से समुद्री पर्यावरण को राहत मिली है. 

प्रवासी पक्षियों की दुनिया

दुनिया भर में ऐसे हज़ारों-लाखों पक्षी हैं जिनकी फ़ितरत प्रवासी है, यानि वो अपने अस्तित्व के लिए किसी एक जगह नहीं ठहर सकते और प्रवासन के लिए अक्सर हज़ारों मील का सफ़र तय करते हैं, अक्सर अदृश्य रास्तों से. ये एक अनोखी दुनिया है कि प्रवासी पक्षी किस तरह अपनी ज़िन्दगी जीते हैं. एक झलक पेश करती ये वीडियो जिसका फ़िल्मांकन कुछ समय पहले  किया गया था, और अब इसे नए अंदाज़ में पेश किया गया है...

पृथ्वी दिवस पर डिजिटल कॉन्सर्ट

पृथ्वी दिवस की 50 वीं वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार और पर्यावरणविद् रिकी केज ने 22 अप्रैल को एक 'डिजिटल कॉन्सर्ट - रिकी केज एट वन पेज स्पॉटलाइट' का आयोजन किया. इस कॉन्सर्ट का उद्देश्य, वैश्विक समुदाय को एकजुट करना और करुणा, बलिदान व आशा का संदेश फैलाने में मदद करना था. इसमें यूनेस्को, एमझीआईईपी, यूएनसीसीडी, यूनीसेफ़ इंडिया, समेत 5 ग्रैमी पुरस्कार विजेताओं समेत 44 संगीतकार शामिल हुए.

भारत: फ़ायदेमन्द प्राकृतिक खेती का रुख़

भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में किसान जागरूक होकर प्राकृतिक खेती की ओर रुख़ कर रहे हैं. इसमें रसायनिक उर्वरकों के बजाय स्थानीय स्तर पर तैयार देसी खाद इस्तेमाल किया जाता है जिससे अच्छी क़िस्म की फ़सल होती है. ये प्राकृतिक खेती लोकप्रिय हो रही है और अगले कुछ वर्षों के दौरान ज़्यादा से ज़्यादा किसान शून्य बजट प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से अपनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं. एक वीडियो डॉक्यूमेंटरी...

कोविड-19: ‘कार्बन उत्सर्जन में अस्थाई गिरावट’ से नहीं रुकेगा जलवायु परिवर्तन

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों पर अभूतपूर्व असर हुआ है जिससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में गिरावट आने की संभावना जताई गई है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने सचेत किया है कि यह एक अच्छी ख़बर है मगर अस्थाई है क्योंकि सामान्य जीवन के फिर शुरू होने के बाद कार्बन उत्सर्जन में फिर से तेज़ी आने की संभावना है.

कोविड-19: पृथ्वी के बाशिन्दों को 'नींद से जगा देने वाली अभूतपूर्व घंटी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को ‘अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी मॉं दिवस’ (International Mother Earth Day) के अवसर पर ध्यान दिलाया है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 एक नींद से जगा देने वाली एक अभूतपूर्व घंटी है लेकिन इससे सबक़ लेते हुए ऐसे विकास की दिशा में संसाधन निवेश करने होंगे जिनसे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिले और टिकाऊ विकास का मार्ग प्रशस्त हो.