जलवायु और पर्यावरण

स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण की उपलब्धता, अब एक मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने, शुक्रवार को पहली बार ये पहचान दी है कि स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण की उपलब्धता, एक मानवाधिकार है.

समुद्री तापमान में वृद्धि - एक दशक में 14 फ़ीसदी मूँगा चट्टानों को नुक़सान

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2009 और 2018 के बीच, समुद्री तापमान में बढ़ोत्तरी जारी रहने की वजह से विश्व की 14 फ़ीसदी प्रवाल भित्तियाँ या मूंगा चट्टानें (coral reefs) ख़त्म हो गई हैं. 

बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण मंडराता जल संकट – WMO की चेतावनी

जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा सहित अन्य जल-सम्बन्धी जोखिमों में वृद्धि हो रही है और आबादी के साथ माँग बढ़ने व जल उपलब्धता में कमी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने अपनी एक नई रिपोर्ट में दुनिया पर मंडराते जल संकट पर चेतावनी जारी की है. 

व्यापार एवँ विकास पर यूएन सम्मेलन – निर्बल देशों के लिये समर्थन बढ़ाने का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने व्यापार एवँ विकास पर यूएन के एक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए, कोविड-19 से पुनर्बहाली को टिकाऊ व समावेशी बनाने पर बल दिया है. बारबेडॉस की राजधानी ब्रिजटाउन में सोमवार को 'UNCTAD15' सम्मेलन की शुरुआत हुई है जिसमें यूएन प्रमुख ने कर्ज संकट पर पार पाने के लिये चार-सूत्री कार्रवाई योजना को पेश किया है. 

विश्व पर्यावास दिवस: हरित व ऊर्जा कुशल नगरों के अनगिनत लाभ

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि नगरों को और ज़्यादा पर्यावरण अनुकूल बनाने के बहुत सारे लाभ हैं, जिनमें कम जलवायु जोखिम, ज़्यादा रोज़गार, और बेहतर स्वास्थ्य व रहन-सहन जैसे फ़ायदे शामिल हैं.

महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई के लिये 'समय बीता जा रहा है'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) से चन्द हफ़्ते पहले, देशों से कार्बन उत्सर्जन घटाने और जलवायु कार्रवाई के लिये वित्त पोषण सुनिश्चित करने का आहवान किया है. यूएन प्रमुख ने गुरूवार को इटली के मिलान शहर में सम्मेलन से पहले तैयारियों के तहत आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है.

युवा जलवायु 'लीडर्स' को, यूएन प्रमख की पुकार - अपनी आवाज़ें बुलन्द करते रहें

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि ऐसे में जबकि जलवायु संकट के कारण पहले ही बहुत से लोगों की ज़िन्दगियाँ और रोज़गार व आजीविकाएँ तबाह हो रही हैं, तो वैश्विक कार्रवाई को आगे बढ़ाने में, युवजन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. 

भोजन की हानि व बर्बादी से प्रतिवर्ष 400 अरब डॉलर का नुक़सान, रोकथाम उपायों की पुकार

भोजन को आधा-अधूरा खाकर उसे कूड़ेदान में फेंक देने की प्रवृत्ति से, भोजन बर्बादी की समस्या गम्भीर रूप धारण कर रही है, और यह ऐसे समय में हो रहा है जब 80 करोड़ से अधिक लोग भूखे पेट सोने के लिये मजबूर हैं. इस मुद्दे की ओर, बुधवार, 29 सितम्बर, को 'भोजन की हानि व बर्बादी पर अन्तरराष्ट्रीय जागरूकता दिवस' पर विशेष  ध्यान आकर्षित किया गया है. 

भारत: संयुक्त राष्ट्र के साथ 17 युवा जलवायु कार्यकर्ता एकजुट

भारत में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने जलवायु परिवर्तन पर स्थानीय नेतृत्व को प्रदर्शित करने के इरादे से ‘We The Change’ (‘हम ही बदलाव हैं’) नामक अपनी जलवायु मुहिम शुरू करने की घोषणा की है. इस अभियान के तहत, संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) से कुछ हफ्तों पहले,  भारत के 17 युवा जलवायु कार्यकर्ताओं द्वारा विकसित जलवायु समाधानों को रेखांकित किया जाएगा. 

भोजन नहीं है व्यापार की वस्तु, बल्कि है मानवाधिकार - यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हर दिन करोड़ों लोग भूखे पेट सोते हैं. तीन अरब लोगों के लिये पोषक आहार उनकी पहुँच से बाहर है. दो अरब लोगों का वज़न या तो आवश्यकता से अधिक है या फिर वे मोटापे का शिकार हैं, जबकि 46 करोड़ लोगों का वज़न कम है. दुनिया भर में कुल खाद्य उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा बर्बाद हो जाता है.