जलवायु और पर्यावरण

डेढ़ अरब लोगों का गुज़ारा, नमक की अधिकता वाली अनुपजाऊ ज़मीनों पर निर्भर

दुनिया भर के सभी महाद्वीपों में सिंचाई योग्य भूमि का 20 से 50 प्रतिशत हिस्सा इतना नमकीन हो गया है कि वो पूरी तरह से उपजाऊ नहीं बचा है, जिसके कारण, उन ज़मीनों में अपनी फ़सलें उगाने वाले लगभग डेढ़ अरब लोगों के लिये गम्भीर चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं.

जलवायु परिवर्तन लक्ष्य प्राप्ति और जीवाश्म ईंधन उत्पादन योजनाओं के बीच गहरी खाई

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और साझीदार संगठनों ने कहा है कि जलवायु महत्वाकांक्षा में बढ़ोत्तरी और कार्बन तटस्थता संकल्पों के बावजूद, देशों की सरकारें, जीवाश्म ईंधन उत्पादन, वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी का लक्ष्य 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये, ज़रूरी मात्रा से दोगुनी मात्रा में उत्पादन की योजनाओं पर काम कर रही हैं. बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है. 

सम्पूर्ण अफ़्रीका में जलवायु परिवर्तन का जोखिम बढ़ा: रिपोर्ट

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और साझीदार संगठनों द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़्रीका में वर्ष 2020 के दौरान, खाद्य असुरक्षा, ग़रीबी और विस्थापन में, जलवायु परिवर्तन बहुत बड़ी हद तक ज़िम्मेदार रहा है.

जैव-विविधता संरक्षण की ख़ातिर, यूनेस्को की eDNA परियोजना

यूनेस्को ने, दुनिया भर में स्थित, तमाम वैश्विक समुद्री विरासत स्थलों की जैव-विविधता सम्बन्धी प्रचुर समृद्धि को समझने के लिये, जैव-विविधता को सहेजने और उसकी हिफ़ाज़त करने के लक्ष्य से, सोमवार को एक परियोजना शुरू की है जो पर्यावरणीय डीएनए (eDNA) के अध्ययन पर आधारित है.

प्रकृति के साथ समरसतापूर्ण जीवन और जैवविविधता संरक्षण के लिये संकल्प

चीन के कुनमिंग में आयोजित ‘संयुक्त राष्ट्र जैवविविधता सम्मेलन’ (कॉप15) के उच्चस्तरीय खण्ड के समापन पर कुनमिंग घोषणापत्र को पारित किया गया है. इस घोषणापत्र में सम्बद्ध पक्षों ने एक कारगर वैश्विक फ़्रेमवर्क को विकसित, पारित और लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक जैवविविधता को पुनर्बहाली मार्ग पर वापिस लाना है. 

आपदाओं से रक्षा में, विकासशील देशों के लिये अन्तरराष्ट्रीय सहयोग पर बल

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार, 13 अक्टूबर, को ‘अन्तरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस’ के अवसर पर जारी अपने सन्देश में, प्राकृतिक आपदाओं के ख़तरों का सामना कर रहे विकासशील देशों की रक्षा के लिये वैश्विक एकजुटता की पुकार लगाई है. 

‘प्रकृति के साथ आत्मघाती युद्ध का अन्त करने के लिये’ निडर कार्रवाई का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘यूएन जैवविविधता सम्मेलन’ (कॉप15) को सम्बोधित करते हुए आगाह किया है कि विश्व में दस लाख से अधिक प्रजातियों के लुप्त होने का जोखिम मण्डरा रहा है. इसके मद्देनज़र, देशों को एक साथ मिलकर पृथ्वी व मानवता के लिये एक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करना होगा.

जलवायु परिवर्तन का सामना करने में व्यापार की अहम भूमिका – नई रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में स्थित देशों की अर्थव्यवस्थाओं को तत्काल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में कटौती करने की ज़रूरत है. ऐसा करना, सीमाओं पर कार्बन टैक्स में बढ़ोत्तरी की सम्भावना के मद्देनज़र, व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के नज़रिये से अहम होगा. 

WHO: कोविड महामारी से पुनर्बहाली के लिये, ठोस जलवायु कार्रवाई है ज़रूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले जलवायु सम्मेलन (कॉप26) के सम्बन्ध में, सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि तमाम देशों द्वारा, कोविड-19 महामारी से स्वस्थ, हरित और टिकाऊ पुनर्बहाली के लिये, महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताएँ अति महत्वपूर्ण हैं.

स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण की उपलब्धता, अब एक मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने, शुक्रवार को पहली बार ये पहचान दी है कि स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण की उपलब्धता, एक मानवाधिकार है.