जलवायु और पर्यावरण

कॉप26: एसडीजी या एनडीसी? कठिन शब्दावली, सरल भाषा में...

यदि आप, संयुक्त राष्ट्र के कामकाज या विभिन्न यूएन एजेंसियों की गतिविधियों के बारे में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपने शब्द समूहों के अनेक संक्षिप्त रूपों, तकनीकी भाषा और शब्दावली का बहुत अधिक इस्तेमाल होते हुए भी देखा होगा. वार्षिक यूएन जलवायु सम्मेलन और उसका संक्षिप्त रूप, यानि कॉप26 इसी की एक बानगी है. जलवायु मुद्दे पर इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, आपको ऐसे ही अनेक अन्य शब्दों से दो-चार होना पड़ सकता है. इसलिये, हमने प्रचलित शब्दावली को सरल बनाने का प्रयास किया है...

कॉप26 – अभी तक हमें क्या मालूम है, और ये क्यों अहम है: आपके लिये यूएन न्यूज़ गाइड

महामारी से अस्त-व्यस्त हो चुके विश्व में, और जलवायु त्रासदी टालने के लिये, तेज़ी से हाथ से निकल रहे समय के बीच, अति महत्वपूर्ण यूएन जलवायु सम्मेलन – कॉप26, रविवार को, स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में शुरू हो रहा है – जिसमें बहुत कुछ दाँव पर लगा हुआ है.

यूएन न्यूज़: कॉप26 जलवायु प्रश्नोत्तरी

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन कॉप26 और चर्चा में छाए रहने वाले अन्य बड़े मुद्दों के बारे में आप कितना जानते हैं? यूएन न्यूज़ ने एक जलवायु कार्रवाई प्रश्नोत्तरी (क्विज़) तैयार की है, जोकि आपके लिये, अपने ज्ञान को परखने का अवसर है (प्रश्नों के उत्तर नीचे उपलब्ध हैं)...

विकासशील जगत में जलवायु अनुकूलन, हरित औद्योगिक नीतियाँ अहम

व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) ने सचेत किया है कि विकासशील देशों में जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, अनुकूलन प्रयासों के लिये हरित औद्योगिक नीतियाँ अपनाया जाना बेहद अहम है. जलवायु-सम्बन्धी आपदाओं के कारण, विकासशील देशों को पहले ही, उच्च-आय वाले देशों की तुलना में तीन गुना आर्थिक नुक़सान झेलना पड़ रहा है. 

एशिया: चरम मौसम घटनाओं से हज़ारों की मौत, अरबों डॉलर का नुक़सान

चरम मौसम की घटनाओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से, एशिया में वर्ष 2020 में हज़ारों लोगों की मौत हुई है, लाखों विस्थापित हुए हैं और सैकड़ों अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और साझीदार संगठनों की एक नई रिपोर्ट में, इन आपदाओं से बुनियादी ढाँचे और पारिस्थितिकी तंत्रों पर हुए भीषण असर की भी पड़ताल की गई है.  

महासभा प्रमुख: एकजुट कार्रवाई से जलवायु संकट का समाधान सम्भव

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने, जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जनरल ऐसेम्बली में आयोजित एक उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान, बढ़ते समुद्री जलस्तर समेत उन कटु वास्तविकताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया है, जिनसे मालदीव और अन्य द्वीपीय देशों के लिये विशेष रूप से ख़तरा पैदा हो रहा है. 

'विनाशकारी तापमान वृद्धि' की ओर बढ़ती दुनिया - सुस्पष्ट जलवायु कार्रवाई व संकल्पों का आहवान

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु कार्रवाई के लिये नए और संशोधित संकल्प, पैरिस जलवायु समझौते में तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिये पर्याप्त नहीं हैं. स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन से कुछ ही दिन पहले जारी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया इस सदी में, वैश्विक तापमान में कम से कम 2.7 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की ओर बढ़ रही है.   

2020: वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की सघनता रिकॉर्ड स्तर पर

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के एक नए अध्ययन ‘ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन’ के अनुसार, वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा पिछले साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई और ये रुझान वर्ष 2021 में भी जारी है. वैश्विक तापमान में वृद्धि के लिये ज़िम्मेदार इन गैसों की मात्रा में बढ़ोत्तरी की वार्षिक वृद्धि दर को, 2011-2020 के औसत से अधिक मापा गया है.  

पर्यावरण कार्यकर्ताओं की रक्षा के लिये, नए तंत्र की स्थापना पर 'महत्वपूर्ण' सहमति

वृहद योरोपीय क्षेत्र में स्थित 46 देशों के समूह ने क़ानूनी रूप से बाध्यकारी, एक ऐसी ढाँचागत व्यवस्था स्थापित किये जाने पर सहमति जताई है, जिसके ज़रिये पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ताओं की रक्षा सम्भव हो सकेगी. योरोप के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (UNECE) ने शुक्रवार को इस आशय की जानकारी दी है.

वर्ष 2030 तक, प्लास्टिक प्रदूषण दोगुना होने की राह पर - UNEP

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक नई रिपोर्ट में महासागरों और अन्य जल क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण की तेज़ी से बढ़ती मात्रा पर चिन्ता जताई गई है, जिसके वर्ष 2030 तक दोगुना हो जाने का अनुमान है. यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) से 10 दिन पहले जारी इस रिपोर्ट में प्लास्टिक को भी एक जलवायु समस्या क़रार दिया गया है.