जलवायु और पर्यावरण

कॉप26: जलवायु संकट से सर्वाधिक प्रभावितों में महिलाएँ, चुकाती हैं एक बड़ी क़ीमत

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में कॉप26 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को, जलवायु परिवर्तन से महिलाओं पर होने वाले असर व जलवायु कार्रवाई में उनकी ज़रूरतों को समाहित किये जाने के मुद्दे पर चर्चा हुई. प्राकृतिक संसाधनों की देखरेख में महिलाओं व लड़कियों के ज्ञान की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, और उनमें निवेश के ज़रिये, पूर्ण समुदायों तक लाभ पहुँचाया जा सकता है. इस बीच, एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि कॉप26 में विश्व नेताओं की घोषणाओं के बावजूद, दुनिया विनाशकारी तापमान वृद्धि की ओर बढ़ रही है.

एक नए विश्लेषण में, कृषि आधारित खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के, कार्बन पद चिन्ह उजागर

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (FAO) के नेतृत्व में कराए गए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, घरेलू उपभोग और अपशिष्ट व कूड़ा-कचरा फेंके जाने की पूरी प्रक्रिया, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जकों की शीर्ष सूची में धकेल रही है. ये रिपोर्ट ग्लासगो में चल रहे यूएन जलवायु सम्मेलन के मौक़े पर सोमवार को जारी की गई है.

कॉप26: निर्बल देशों का कड़ा सन्देश, जलवायु वित्त पोषण के वादे निभाएँ विकसित देश

भीषण बाढ़, वनों में विनाशकारी आग और बढ़ता समुद्री जलस्तर, ये ऐसी वास्तविकताएँ हैं जिनका सामना अनेक विकासशील व द्वीपीय देशों को करना पड़ रहा है, और जिनसे अनगिनत लोगों के जीवन व आजीविका पर असर पड़ा है. ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) के दूसरे सप्ताह की शुरुआत पर, सोमवार को जलवायु अनुकूलन, क्षति व हानि पर चर्चा केन्द्रित रही और जलवायु जोखिमों को झेल रहे देशों ने विकसित देशों से जलवायु कार्रवाई के लिये वित्तीय सहायता के वादों को पूरा करने का आग्रह किया. 

जलवायु परिवर्तन व स्वास्थ्य जोखिम: देशों के पास समर्थन व धनराशि का अभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु प्रभावों से आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिये, देशों की सरकारें सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को प्राथमिकता दे रही हैं, मगर कारगर कार्रवाई के लिये अनेक देशों के पास पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं है.

वर्ष 2020 में, यूएन व्यवस्था के ग्रीनहाउस उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कमी

संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था ने वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिये लागू की गईं यात्रा पाबन्दियों और ज़्यादातर स्टाफ़ द्वारा अपने घरों से ही काम करने की बदौलत, वर्ष 2019 की तुलना में, लगभग 25 प्रतिशत कम, ग्रीनहाउस उत्सर्जन किया.

कॉप26: आदिवासी जन, प्रदर्शन और 'प्रकृति पर युद्ध समाप्ति' की पुकार

दुनिया भर के अनेक शहरों में लाखों लोगों ने ज़्यादा बड़ी व त्वरित जलवायु कार्रवाई की मांग करते हुए, प्रदर्शन किये हैं, तो वहीं, यूएन जलवायु सम्मेलन कॉप26 में शिरकत करने वाले कुछ देशों ने, प्रकृति पर आधारित समाधानों में और ज़्यादा संसाधन निवेश करने, व कृषि के ज़्यादा हरित तरीक़े अपनाए जाने की प्रतिज्ञाएँ व्यक्त की हैं.

कॉप26: ग्लासगो की सड़कों पर उतरे हज़ारों युवा कार्यकर्ता, जलवायु कार्रवाई की मांग

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु सम्मेलन कॉप26 के दौरान शुक्रवार, 5 नवम्बरका दिन, ‘युवजन’ के नाम समर्पित रहा और हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतर कर, जलवायु कार्रवाई के समर्थन में प्रदर्शन किया. ग्लासगो का केन्द्रीय इलाक़ा इन नारों से गूंज उठा: “हम क्या चाहते हैं? जलवायु न्याय! हम यह कब चाहते हैं? अभी!”

सूनामी जागरूकता दिवस: आपदा जोखिम रोकथाम के लिये नवाचारी उपायों पर ज़ोर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार, 5 नवम्बर, ‘विश्व सूनामी जागरूकता दिवस’ पर घातक सूनामी लहरों के जोखिमों में कमी लाने के लिये नवाचारी समाधान अपनाए जाने पर बल दिया है.  

कॉप26 में ‘ऊर्जा दिवस’, जीवाश्म ईंधन के प्रयोग पर रोक के लिये उठी आवाज़ें

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन कॉप26 में गुरूवार को, दिन का मुद्दा या मुख्य विषय ‘ऊर्जा’ रहा और इस ‘ऊर्जा दिवस’ के मौक़े पर सूरज की गर्मी भी महसूस की गई, जो बुधवार को ही बादल हटाकर, जैसे जलवायु हस्तियों को अभिवादन करने के लिये निकल आया था.

जलवायु अनुकूलन में जान फूँकने के लिये तेज़ प्रयासों की ज़रूरत, यूनेप

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने गुरूवार को प्रकाशित अपनी एक नई रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिये नीतियाँ व योजनाएँ बढ़ तो रही हैं, मगर वित्त और क्रियान्वयन अब भी पीछे है.