जलवायु परिवर्तन

ओज़ोन सन्धियाँ: राजनैतिक इच्छाशक्ति के प्रेरणादायक उदाहरणों की स्रोत

संयुक्त राष्ट्र ने पृथ्वी के चारों तरफ़ सुरक्षात्मक परत – ओज़ोन को बहाल करने के लिये हुए तमाम वैश्विक समझौतों की कामयाबी को पहचान देने के लिये बुधवार को अन्तरराष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षा दिवस मनाया है. 

जलवायु परिवर्तन: उत्तरी गोलार्द्ध में रिकॉर्ड गर्मी से अमेरिका में आग से तबाही पर चिन्ताएँ

विश्व मौसम संगठन ने कहा है कि उत्तरी गोलार्द्ध में अगस्त महीना अभी तक का सबसे गर्म रहा है. संगठन की ये ताज़ा रिपोर्ट मंगलवार को ऐसे हालात के बीच जारी की गई है जिनके कारण संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तटीय इलाक़ों में विनाशकारी जंगली आगों ने तबाही मचा रखी है.

भारत के रेलवे नैटवर्क को हरित करने की मुहिम

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रन (UNEP) भारत में रेलवे नैटवर्क को हरित बनाने की मुहिम में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के ज़रिये अहम योगदान दे रहा है. भारतीय रेलवे की गिनती दुनिया के विशालतम रेलवे बुनियादी ढाँचों में होती है जो हर दिन करोड़ों लोगों को सेवाएँ मुहैया कराता है.

जलवायु परिवर्तन से मुक़ाबले में ‘विज्ञान, एकजुटता और समाधानों’ की दरकार

वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसों की सघनता अपने रिकॉर्ड स्तर पर है, कोविड-19 के कारण कार्बन उत्सर्जनों में दर्ज की गई क्षणिक गिरावट के बाद अब उत्सर्जन की मात्रा फिर बढ़ रही है और वैश्विक तापमान में वृद्धि नई ऊँचाइयों को छू रही है. संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को जलवायु परिवर्तन पर एक नई रिपोर्ट पेश की है जिसमें ये तथ्य उभर कर सामने आये हैं. 

नीले व चमकीले आकाश की ख़ातिर

सोमवार, सात सितम्बर को दुनिया भर में प्रथम “नीले आसमानों के लिये स्वच्छ वायु का अन्तरराष्ट्रीय दिवस” मनाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सभी इनसानों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी और स्वास्थ्य के लिये स्वच्छ वायु की अहमियत को ध्यान में रखते हुए ये दिवस मनाए जाने की मंज़ूरी दी है. 

प्रदूषणरहित भविष्य के लिये अपील

दुनिया भर में, हर दस में से नौ लोग प्रदूषित हवा में साँस लेते हैं. वायु प्रदूषण हृदय की बीमारियों, आघात, फेफड़ों का कैंसर और साँस लेने की अन्य बीमारियों में सहायक बनता है. वायु प्रदूषण के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है, ये मौतें मुख्य रूप से निम्न – और मध्य आय वाले देशों में होती हैं.

वायु प्रदूषण से अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के लिये भी ख़तरा पैदा होता है.

“नीले आसमानों की ख़ातिर स्वच्छ वायु पर अन्तरराष्ट्रीय दिवस” पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एंतोनियो गुटेरेश ने अपने  सन्देश में सभी देशों से स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन अपनाने की अपील की...
 

कोविड-19: टिकाऊ पुनर्बहाली के लिये महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सरकारों का आहवान किया है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से उबरने की कार्रवाई के हर आयाम में अर्थपूर्ण जलवायु कार्रवाई को समाहित करना होगा. टिकाऊ पुनर्बहाली पर चर्चा के लिये गुरुवार को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में यूएन प्रमुख ने मन्त्रियों को सम्बोधित करते हुए ध्यान दिलाया कि इस समय दुनिया दो गम्भीर संकटों से जूझ रही है: कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन.

खेतों में आग: बदली-बदली सी है फ़िजाँ, बदलनी होंगी आदतें भी

वर्ष 2019 में, भारत की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास, इतना धुँधलका छा गया था कि विमानों की उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा, हज़ारों स्कूल बन्द करने पड़े और देश की राजधानी में लोगों को या तो घरों के भीतर ही रहने या फिर फ़ेस मास्क पहनने की सलाह दी गई. सवाल है कि आख़िर ऐसी नौबत क्यों आई?

स्वच्छ, कुशल ऊर्जा में भारत की अहम भूमिका

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को 19वें दरबारी सेठ स्मारक व्याख्यान को सम्बोधित किया. ये व्याख्यान ऊर्जा व शोधन संस्थान (टैरी) भारत, ने अपने संस्थापक और जलवायु कार्रवाई के प्रणेता, दरबारी सेठ के सम्मान में आयोजित किया था. इस व्याख्यान में महासचिव ने कोविड-19 पुनर्बहाली में जलवायु कार्रवाई को प्रमुखता देते हुए ज़ोर देकर कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाकर अपनी दो शीर्ष प्राथमिकताएँ प्राप्त कर सकता है - ग़रीबी उन्मूलन और ऊर्जा की सार्वभौमिक पहुँच की गारण्टी. उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन की बजाय अक्षय ऊर्जा में निवेश करने से तीन गुना अधिक रोज़गार उत्पन्न हो सकते हैं.

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत निभा सकता है अहम भूमिका

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा है कि भारत समेत सभी देशों को प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता ख़त्म करके, स्वच्छ और आर्थिक रूप से सुदृढ़ सौर ऊर्जा में निवेश करना होगा.  महासचिव ने शुक्रवार को भारत के ऊर्जा शोध संस्थान (TERI) के 19वें दरबारी सेठ स्‍मारक व्‍याख्‍यान में ये बात कही है.