जलवायु परिवर्तन

काँच की बोतलें और उदित सिंघल

दुनिया भर में टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रयासों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिये संयुक्त राष्ट्र ने 17 युवाओं को एसडीजी चैम्पियन घोषित किया है. इनमें, भारत के उदित सिंघल भी शामिल हैं. काँच के कूड़े की समस्या भी प्लास्टिक के कूड़े जैसी न बन जाए, इस विचार के साथ उदित सिंघल ने भारत की राजधानी दिल्ली में, 2019 में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर Glass2Sand की स्थापना की. तब उदित सिंघल की उम्र 17 वर्ष थी.

उदित सिंघल ने तब से लेकर अब तक लगभग 8 हज़ार काँच की बोतलों को कूड़ा घर (Landfill) में जाने से रोका है, और उन बोतलों को 4 हज़ार 800 किलोग्राम उच्च ग्रेड सिलिका रेत में परिवर्तित करने में सफलता हासिल की है. उदित सिंघल, अपनी इस पहल को स्वयंसेवक नेटवर्क के माध्यम से फैलाकर, पूरे दिल्ली शहर को, बोतलों से छुटकारा दिलाने की मुहिम में जुटे हैं. 

यूएन न्यूज़ हिन्दी ने उदित सिंघल से सम्पर्क करके, टिकाऊ विकास पर उनके कार्य को लेकर विस्तार से बातचीत की.... (वीडियो)

नीले व चमकीले आकाश की ख़ातिर

सोमवार, सात सितम्बर को दुनिया भर में प्रथम “नीले आसमानों के लिये स्वच्छ वायु का अन्तरराष्ट्रीय दिवस” मनाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सभी इनसानों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी और स्वास्थ्य के लिये स्वच्छ वायु की अहमियत को ध्यान में रखते हुए ये दिवस मनाए जाने की मंज़ूरी दी है. 

प्रदूषणरहित भविष्य के लिये अपील

दुनिया भर में, हर दस में से नौ लोग प्रदूषित हवा में साँस लेते हैं. वायु प्रदूषण हृदय की बीमारियों, आघात, फेफड़ों का कैंसर और साँस लेने की अन्य बीमारियों में सहायक बनता है. वायु प्रदूषण के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है, ये मौतें मुख्य रूप से निम्न – और मध्य आय वाले देशों में होती हैं.

वायु प्रदूषण से अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के लिये भी ख़तरा पैदा होता है.

“नीले आसमानों की ख़ातिर स्वच्छ वायु पर अन्तरराष्ट्रीय दिवस” पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एंतोनियो गुटेरेश ने अपने  सन्देश में सभी देशों से स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन अपनाने की अपील की...
 

खेतों में आग: बदली-बदली सी है फ़िजाँ, बदलनी होंगी आदतें भी

वर्ष 2019 में, भारत की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास, इतना धुँधलका छा गया था कि विमानों की उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा, हज़ारों स्कूल बन्द करने पड़े और देश की राजधानी में लोगों को या तो घरों के भीतर ही रहने या फिर फ़ेस मास्क पहनने की सलाह दी गई. सवाल है कि आख़िर ऐसी नौबत क्यों आई?

स्वच्छ, कुशल ऊर्जा में भारत की अहम भूमिका

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को 19वें दरबारी सेठ स्मारक व्याख्यान को सम्बोधित किया. ये व्याख्यान ऊर्जा व शोधन संस्थान (टैरी) भारत, ने अपने संस्थापक और जलवायु कार्रवाई के प्रणेता, दरबारी सेठ के सम्मान में आयोजित किया था. इस व्याख्यान में महासचिव ने कोविड-19 पुनर्बहाली में जलवायु कार्रवाई को प्रमुखता देते हुए ज़ोर देकर कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाकर अपनी दो शीर्ष प्राथमिकताएँ प्राप्त कर सकता है - ग़रीबी उन्मूलन और ऊर्जा की सार्वभौमिक पहुँच की गारण्टी. उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन की बजाय अक्षय ऊर्जा में निवेश करने से तीन गुना अधिक रोज़गार उत्पन्न हो सकते हैं.

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत निभा सकता है अहम भूमिका

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा है कि भारत समेत सभी देशों को प्रदूषण फैलाने वाले जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता ख़त्म करके, स्वच्छ और आर्थिक रूप से सुदृढ़ सौर ऊर्जा में निवेश करना होगा.  महासचिव ने शुक्रवार को भारत के ऊर्जा शोध संस्थान (TERI) के 19वें दरबारी सेठ स्‍मारक व्‍याख्‍यान में ये बात कही है.

परिवार और परम्परा ने दिखाई जलवायु कार्रवाई की राह

जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में जुटी भारत की अर्चना सोरेंग का मानना है कि आदिवासी जनजातियों को जलवायु कार्रवाई के केन्द्र में रखा जाना अहम है और पर्यावरण संरक्षण के उपायों के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही उनकी परम्पराओं और प्रथाओं से सीख ली जानी चाहिए. अर्चना उन सात युवाओं में से हैं जिन्हें दुनिया भर से महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल किया गया है.

'यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ' के फ़ाइनलिस्ट - पूरव देसाई

पर्यावरण को बेहतर बनाने के क्षेत्र में नवाचार वाले समाधान तलाश करने के लिये 2020 के 'यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ' की अन्तिम सूची में दुनिया भर से 35 युवा होनहार चुने गए हैं जिनमें भारत के पूरव देसाई भी हैं.  क्या है उनका असाधारण व नवाचार वाला काम, जानिये इस वीडियो में...

मरुस्थलीकरण व सूखा विरोधी दिवस

मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का स्वास्थ्य भी ख़राब चल रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी की तकलीफ़ों में और इज़ाफ़ा हुआ है. मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

पृथ्वी का ख़याल करें, तुरन्त!

भारत की अनेक आस्था व धार्मिक हस्तियों ने इस वर्ष पर्यावरण दिवस के मौक़े पर पृथ्वी की धरोहर को सहेजने के लिए विभिन्न उपाय करने की अपील की है. इनमें प्रकृति को नुक़सान नहीं पहुँचाना और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना शामिल है. पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों की बेहतरी के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है. इन धार्मिक हस्तियों का वीडियो सन्देश...