जलवायु परिवर्तन

कार्बन तटस्थता हासिल करने के प्रयासों की गति बढ़ाने पर ज़ोर

वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता (नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य) हासिल करने के लिये संकल्पित देशों की सरकारों और व्यवसायों की संख्या बढ़ रही है लेकिन दुनिया अब भी उस लक्ष्य की प्राप्ति से दूर है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में प्रयासों की पैरवी के लिये सोमवार को आयोजित एक कार्यक्रम में महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई पर ज़ोर दिया है.

सूनामी जागरूकता दिवस: 'असरदार आपदा जोखिम प्रबन्धन से ज़िन्दगियाँ बचती हैं'

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने दुनिया भर में तटीय इलाक़ों में रहने वाले समुदायों की हिफ़ाज़त सुनिश्चित करने के लिये तैयार रहने और लगातार जोखिम आकलन करते रहने की महत्ता रेखांकित की है. गुरूवार को विश्व सूनामी जागरूकता दिवस के मौक़े पर ये ध्यान दिलाया गया है.

पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने पर खेद

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सचिवालय (UNFCCC) ने अपना ये संकल्प दोहराया है कि वो वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर क़ाबू पाने के लिये हुई ऐतिहासिक सन्धि के अनुरूप संयुक्त राज्य अमेरिका में और अन्य स्थानों पर सक्रिय अपने साझीदारों के साथ मिलकर जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने का काम करता रहेगा. 

फ़िलीपीन्स: तूफ़ान गोनी से भारी तबाही, करोड़ों प्रभावित, राहत कार्य शुरू

फ़िलीपीन्स में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ और मानवीय सहायता संगठन सुपर तूफ़ान गोनी से प्रभावित समुदायों की मदद करने के लिये सक्रिय हो रहे हैं. इस तूफ़ान ने देश भर में भारी तबाही मचाई है.

कोरिया गणराज्य: 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के संकल्प का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोरिया गणराज्य द्वारा वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता  (Carbon neutrality) हासिल करने का संकल्प लिये जाने की घोषणा का स्वागत किया है. यूएन प्रमुख ने इसे सही दिशा में एक बेहद सकारात्मक क़दम क़रार दिया है. इससे पहले सोमवार को जापान ने भी इसी अवधि में नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के प्रति अपने संकल्प को साझा किया था. 

मौसम सम्बन्धी घटनाओं के असर पर ध्यान केन्द्रित करना होगा

जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम और जलवायु सम्बन्धी घटनाओं की आवृत्ति, तीव्रता और गम्भीरता में बढ़ोत्तरी हुई है जिसका निर्बल समुदायों पर गहरा और ग़ैर-आनुपातिक असर हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) की एक नई रिपोर्ट में हालात की गम्भीरता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए असरदार समय-पूर्व चेतावनी प्रणालियों में ज़्यादा संसाधन निवेश किये जाने की अहमियत को रेखांकित किया गया है. 

आपदा जोखिम प्रबन्धन के बिना हालात बद से बदतर होते हैं, यूएन प्रमुख

ऐसे में जब तमाम देश एक साथ अनेक संकटों का सामना कर रहे हैं और हाल के दशकों में मौसम की चरम घटनाओं में बहुत तेज़ बढ़ोत्तरी हुई है, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एक ज़्यादा मज़बूत, अनुकूलन में निपुण व सुरक्षित विश्व का निर्माण करने के लिये आपदा जोखिम प्रबन्धन मज़बूत किये जाने का आहवान किया है.

वित्त मन्त्रियों से जलवायु परिवर्तन पर 'निर्णायक नेतृत्व' का आहवान 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि एक ऐसे दौर में जब देश विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और उसके विनाशकारी प्रभावों से उबर रहे हैं, कार्बन पर विश्व अर्थव्यवस्था की निर्भरता घटाने और एक ज़्यादा समावेशी व सहनशील भविष्य के निर्माण के लिये प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना होगा. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने सोमवार को जलवायु कार्रवाई पर आयोजित एक बैठक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में कटौती लाने, जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी यानि अनुदान घटाने और जलवायु जोखिमों व अवसरों को वित्तीय नीतियों में समाहित किये जाने का आग्रह किया है.

पिछले 20 वर्षों के दौरान जलवायु आपदाओं में चिन्ताजनक बढ़ोत्तरी हुई

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि 21वीं शताब्दी के पहले 20 वर्षों में जलवायु आपदाओं में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने सोमवार को एक नई रिपोर्ट जारी करने के मौक़े पर एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लगभग सभी देशों ने उन नुक़सानदेह उत्सर्जनों से निपटने के लिये पर्याप्त क़दम नहीं उठाए हैं जोकि जलवायु ख़तरों से जुड़े हैं और बड़ी संख्या में त्रासदियों के लिये ज़िम्मेदार हैं.  

'तेज़ बुखार में तप रही दुनिया' के लिये महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को जलवायु कार्रवाई पर आयोजित एक गोलमेज़ बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्व इस समय तेज़ ज्वर से पीड़ित है और जल रहा है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर दुनिया मौजूदा पथ पर ही आगे बढ़ती रही तो जलवायु व्यवधान से होने वाली पीड़ा का स्तर हमारी कल्पना से भी परे होगा, इसलिये तात्कालिक रूप से ठोस जलवायु कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है.