जलवायु परिवर्तन

कोरिया गणराज्य: 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के संकल्प का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोरिया गणराज्य द्वारा वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता  (Carbon neutrality) हासिल करने का संकल्प लिये जाने की घोषणा का स्वागत किया है. यूएन प्रमुख ने इसे सही दिशा में एक बेहद सकारात्मक क़दम क़रार दिया है. इससे पहले सोमवार को जापान ने भी इसी अवधि में नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य करने के प्रति अपने संकल्प को साझा किया था. 

मौसम सम्बन्धी घटनाओं के असर पर ध्यान केन्द्रित करना होगा

जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसम और जलवायु सम्बन्धी घटनाओं की आवृत्ति, तीव्रता और गम्भीरता में बढ़ोत्तरी हुई है जिसका निर्बल समुदायों पर गहरा और ग़ैर-आनुपातिक असर हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) की एक नई रिपोर्ट में हालात की गम्भीरता की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए असरदार समय-पूर्व चेतावनी प्रणालियों में ज़्यादा संसाधन निवेश किये जाने की अहमियत को रेखांकित किया गया है. 

आपदा जोखिम प्रबन्धन के बिना हालात बद से बदतर होते हैं, यूएन प्रमुख

ऐसे में जब तमाम देश एक साथ अनेक संकटों का सामना कर रहे हैं और हाल के दशकों में मौसम की चरम घटनाओं में बहुत तेज़ बढ़ोत्तरी हुई है, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एक ज़्यादा मज़बूत, अनुकूलन में निपुण व सुरक्षित विश्व का निर्माण करने के लिये आपदा जोखिम प्रबन्धन मज़बूत किये जाने का आहवान किया है.

वित्त मन्त्रियों से जलवायु परिवर्तन पर 'निर्णायक नेतृत्व' का आहवान 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि एक ऐसे दौर में जब देश विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और उसके विनाशकारी प्रभावों से उबर रहे हैं, कार्बन पर विश्व अर्थव्यवस्था की निर्भरता घटाने और एक ज़्यादा समावेशी व सहनशील भविष्य के निर्माण के लिये प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना होगा. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने सोमवार को जलवायु कार्रवाई पर आयोजित एक बैठक में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों में कटौती लाने, जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी यानि अनुदान घटाने और जलवायु जोखिमों व अवसरों को वित्तीय नीतियों में समाहित किये जाने का आग्रह किया है.

पिछले 20 वर्षों के दौरान जलवायु आपदाओं में चिन्ताजनक बढ़ोत्तरी हुई

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि 21वीं शताब्दी के पहले 20 वर्षों में जलवायु आपदाओं में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने सोमवार को एक नई रिपोर्ट जारी करने के मौक़े पर एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि लगभग सभी देशों ने उन नुक़सानदेह उत्सर्जनों से निपटने के लिये पर्याप्त क़दम नहीं उठाए हैं जोकि जलवायु ख़तरों से जुड़े हैं और बड़ी संख्या में त्रासदियों के लिये ज़िम्मेदार हैं.  

'तेज़ बुखार में तप रही दुनिया' के लिये महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को जलवायु कार्रवाई पर आयोजित एक गोलमेज़ बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्व इस समय तेज़ ज्वर से पीड़ित है और जल रहा है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर दुनिया मौजूदा पथ पर ही आगे बढ़ती रही तो जलवायु व्यवधान से होने वाली पीड़ा का स्तर हमारी कल्पना से भी परे होगा, इसलिये तात्कालिक रूप से ठोस जलवायु कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है.

12 दिसम्बर को ब्रिटेन में होगा जलवायु सम्मेलन

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश और ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री बोरिस जॉनसन ने जलवायु मुद्दे पर एक वैश्विक सम्मेलन 12 दिसम्बर को संयुक्त रूप से आयोजित करने की घोषणा की है. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन मुद्दे पर हर वर्ष अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करता है जिसे कॉप के नाम से जाना जाता है, मगर कोविड-19 के कारण पैदा हुए व्यवधानों से ये सम्मेलन भी प्रभावित हुआ है.

ओज़ोन सन्धियाँ: राजनैतिक इच्छाशक्ति के प्रेरणादायक उदाहरणों की स्रोत

संयुक्त राष्ट्र ने पृथ्वी के चारों तरफ़ सुरक्षात्मक परत – ओज़ोन को बहाल करने के लिये हुए तमाम वैश्विक समझौतों की कामयाबी को पहचान देने के लिये बुधवार को अन्तरराष्ट्रीय ओज़ोन परत संरक्षा दिवस मनाया है. 

जलवायु परिवर्तन: उत्तरी गोलार्द्ध में रिकॉर्ड गर्मी से अमेरिका में आग से तबाही पर चिन्ताएँ

विश्व मौसम संगठन ने कहा है कि उत्तरी गोलार्द्ध में अगस्त महीना अभी तक का सबसे गर्म रहा है. संगठन की ये ताज़ा रिपोर्ट मंगलवार को ऐसे हालात के बीच जारी की गई है जिनके कारण संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तटीय इलाक़ों में विनाशकारी जंगली आगों ने तबाही मचा रखी है.

भारत के रेलवे नैटवर्क को हरित करने की मुहिम

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रन (UNEP) भारत में रेलवे नैटवर्क को हरित बनाने की मुहिम में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के ज़रिये अहम योगदान दे रहा है. भारतीय रेलवे की गिनती दुनिया के विशालतम रेलवे बुनियादी ढाँचों में होती है जो हर दिन करोड़ों लोगों को सेवाएँ मुहैया कराता है.