जलवायु परिवर्तन

कोविड-19: मौसम निगरानी प्रणाली की सटीकता पर संदेह के बादल

संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने कोविड-19 के कारण मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और निगरानी प्रक्रिया में आने वाले व्यवधान पर चिंता जताई है. यूएन एजेंसी का कहना है कि ऑंकड़ों की उपलब्धता और मौसम विश्लेषण की गुणवत्ता प्रभावित होने से पूर्व चेतावनी प्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका है. 

जल की बूंद-बूंद को सहेजा जाना ज़रूरी

बाढ़, भारी बारिश, सूखा और पिघलते हिमनद...जलवायु परिवर्तन के कई बड़े संकेत स्पष्ट रूप से जल पर आधारित हैं. इस वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर यूएन की मौसम विज्ञान एजेंसी ने जल और जलवायु के आपसी संबंध को रेखांकित करते हुए जल संबंधी ऑंकड़ों की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है.   
 

जलवायु समस्या के समाधान का हिस्सा है टिकाऊ जल प्रबंधन

रविवार, 22 मार्च, को ‘विश्व जल दिवस’ (World Water Day) पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक अहम रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और उनके असर को कम करने के लिए जल संसाधानों के इस्तेमाल के तरीक़ों में बड़ा बदलाव आवश्यक है. नई रिपोर्ट में बढ़ते जल संकट और कृषि व उद्योगों में जल के दक्षतापूर्ण उपयोग के लिए ठोस प्रयासों की पुकार लगाई है.
 

जलवायु परिवर्तन से जंग स्कूली छात्रों के संग

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर व्यापक असर पड़ रहा है. इस विशालकाय चुनौती से निपटने में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों की क्या भूमिका हो सकती है और वे किस तरह नए और अभिनव समाधानों का हिस्सा बन सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की एक पहल इसी दिशा में प्रयासों पर केंद्रित है.

कृषि जैवविविधता की सफलता की कहानी

चावल का 90 फ़ीसदी से ज़्यादा उत्पादन और खपत एशिया में है. भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति शुरू होने से पहले धान की एक लाख से ज़्यादा क़िस्में थी जिनमें स्वाद, पोषण, कीट-प्रतिरोधक क्षमता के विविध गुणों का मिश्रण होने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार ढलने की भी क्षमता भी नीहित थी. जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौती के मद्देनज़र ऐसी क़िस्मों को फिर से बढ़ावा देने के प्रयासों में सफलता मिल रही है. 

प्रवासी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कॉप-13

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (सीएमएस) को लेकर 13वां कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13, भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित किया जा रहा है. 15 फरवरी से 22 फरवरी तक चलने वाले सीएमएस कॉप-13 में 110 देशों के लगभग 1200 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और तेज़ी से लुप्त होती प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के बारे में चर्चा करेंगे. 

बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों से जलवायु कार्रवाई की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अगर विश्व के प्रमुख औद्योगिक देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं की तो जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए अभिशाप बन कर रह जाएगा. स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि कई छोटे विकासशील देशों और योरोपीय संघ ने वर्ष 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी (नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन की स्थिति) का संकल्प लिया है लेकिन बड़े उत्सर्जक देशों द्वारा कार्रवाई किया जाना अभी बाक़ी है.

हेती: भूकंप के प्रभावितों की याद, भविष्य संवारने में मदद का वादा भी

हेती में जनवरी 2010 में आए विनाशकारी भूकंप में लगभग दो लाख 20 लोगों की मौत हो गई थी और तीन लाख से ज़्यादा घायल हुए थे. मृतकों में संयुक्त राष्ट्र के 102 कर्मचारी भी थे.  केवल 35 सेकंड तक चले 7.0 की तीव्रता वाले उस भूकंप के बाद लगभग 15 लाख लोग बेघर भी हो गए थे. भूकंप के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रभावितों को यूएन मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सम्मान के साथ याद किया गया.

जलवायु संकट से जीवन की गुणवत्ता प्रभावित, बढ़ रहा है असंतोष

जलवायु संकट, दुनिया भर में लगातार जारी गंभीर विषमताएँ, खाद्य असुरक्षा के बढ़ते स्तर और कुपोषण जैसी स्थितियाँ बहुत से समाजों में लोगों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं जिनके कारण असंतोष भी बढ़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र की विश्व आर्थिक स्थिति व संभावनाओं पर वर्ष 2020 की रिपोर्ट में ये आकलन पेश किया गया है. रिपोर्ट के लेखकों ने संकट का सामना करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव करने का आहवान किया है.  

2019 रिकॉर्ड पर दूसरा सर्वाधिक गर्म वर्ष: यूएन की पुष्टि

संयुक्त राष्ट्र के मौसम संगठन ने बुधवार को पुष्टि की है कि 2019 रिकॉर्ड पर दूसरा सबसे ज़्यादा गर्म वर्ष दर्ज किया गया है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुमान के मुताबिक़ वर्ष 2019 में वार्षिक वैश्विक वृद्धि 1.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज की गई. ये 1850-1900 के दौर से भी गर्म था. इस दौर को पूर्व आद्योगिक काल कहा जाता है.