जलवायु परिवर्तन

आर्कटिक: जंगलों में आग धधकने और समुद्री बर्फ़ की मात्रा घटने से चिन्ता

साइबेरिया में लम्बे समय से औसत तापमान का स्तर ऊँचा होने के कारण आर्कटिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अमेरिका के फ़्लोरिडा प्रान्त से भी ज़्यादा गर्मी दर्ज की गई है जिससे लगातार दूसरे साल जंगलों में दावानल धधक रहा है. शुक्रवार को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने क्षेत्र में मौजूदा हालात के बारे में जानकारी देते हुए आर्कटिक तट पर समुद्री बर्फ़ की मात्रा घटने और उसके दुष्परिणामों के प्रति चेतावनी जारी की है. 

वातानुकूलित उपकरणों को ऊर्जा दक्ष बनाने से ग्रीनहाउस गैसों में भारी कटौती सम्भव

गर्मी से राहत दिलाने वाले और घरों व कार्यालयों को ठण्डा करने वाले उपकरणों को जलवायु अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाकर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अगले चार दशकों में 460 अरब टन की कटौती की जा सकती है - यह मात्रा वर्ष 2018 में उत्सर्जन के स्तर के आधार पर  लगभग आठ वर्षों के कुल वैश्विक उत्सर्जन के बराबर है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की एक साझा रिपोर्ट में पर्यावरण के लिये हानिकारक उत्सर्जनों से निपटने में जलवायु अनुकूल समाधानों की अहमियत को रेखांकित किया गया है.  

बढ़ता वैश्विक तापमान जलवायु लक्ष्य पूरा करने में 'बड़ी चुनौती'

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के नए आँकड़ों के अनुसार आने वाले पाँच वर्षों में वार्षिक वैश्विक तापमान, पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में कम से कम 1° सैल्सियस बढ़ने की आशंका है, जिससे वैश्विक जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य खटाई में पड़ सकते हैं. 

जलवायु संकट को समझने के लिए आसमान का सहारा

अनन्त तक विस्तृत ब्रह्माण्ड के अध्ययन के ज़रिये क्या जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ लड़ाई में मदद मिल सकती है? हवाई विश्वविद्यालय के दो खगोलशास्त्रियों (Astronomers) का मानना है कि सौरमण्डल के ज्ञान के सहारे पृथ्वी के वायुमण्डल के गरम होने की रफ़्तार को कम किया जा सकता है. यूएन न्यूज़ ने हाल ही में अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के साथ हवाई की यात्रा की और दोनों खगोलशास्त्रियों से मुलाक़ात की. यह ख़ास बातचीत 30 जून को ‘अन्तरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस’ से पहले की गई. 

प्लास्टिक कचरा प्रबन्धन पर सरकारों को करने होंगे ज़्यादा प्रयास

प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए ऊँची उम्मीदों के बावजूद वास्तविकता के धरातल पर असरदार कार्रवाई’ के बीच में अब भी एक बड़ा अन्तर  बना हुआ है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और 'फ़ूड इन्डस्ट्री एशिया'(FIA) ने मंगलवार को दक्षिण-पूर्व एशिया में उपभोक्ताओं और खाद्य व पेय व्यवसायों के एक क्षेत्रीय सर्वेक्षण के नतीजे जारी किये हैं जिसमें यह बात उजागर हुई है. पिछले कुछ महीनों में कोविड-19 महामारी के कारण कचरे में बढ़ोत्तरी के अलावा प्लास्टिक प्रदूषण की चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं.

आर्कटिक में तापमान के नए कीर्तिमान की सम्भावना

विश्व मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने उन रिपोर्टों को अपनी स्वीकृति दे दी है जिनमें आर्कटिक सर्किल में अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया है.  पिछले सप्ताहान्त रूस के एक गाँव में 38 डिग्री सेल्सियस (100.4F) तापमान दर्ज किया गया जोकि एक रिकॉर्ड है, हालाँकि अन्तरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा इस आँकड़े की सटीकता की अन्तिम पुष्टि अभी किया जाना बाक़ी है. 

मछली खपत में इज़ाफ़ा, टिकाऊ प्रबन्धन की सख़्त ज़रूरत

दुनिया भर में इन्सानों के भोजन में मछलियों की खपत वर्ष 2018 में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई थी और आने वाले दशक के दौरान इसमें और भी ज़्यादा वृद्धि होने का अनुमान है. खाद्य और कृषि संगठन ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ये तथ्य पेश करते हुए टिकाई मत्स्य प्रबन्धन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. इसे सोफ़िया रिपोर्ट कहा जाता है.

महासागर संरक्षण के लिए ज़रूरत है फ़ौलादी इरादों की

दुनिया जब कोविड-19 महामारी की चपेट में नज़र आ रही है तो महासागरों की हिफ़ाज़त करने के लिए फ़ौलादी इरादे वाले व्यवहारवाद की आवश्यकता है. ये कहना है महासागरों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के विशेष दूत पीटर थॉम्पसन का, जिन्होंने 8 जून को मनाए जाने वाले विश्व महासागर दिवस के मौक़े पर ये बात कही है. 

भारत में बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय

कोविड-19 महामारी से पूरे विश्व की पर्यावरण, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रणालियों की कमज़ोरी सामने आ गई है. संकट अभी जारी है, जिससे ये स्पष्ट होता जा रहा है कि किस तरह अनगिनत आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत कारक वैश्विक तापमान और मानव स्वास्थ्य जैसे पर्यावरण जोखिमों को बढ़ाते हैं. भारत दुनिया में सबसे अधिक आपदा-प्रवण देशों में से एक है, जिसमें हाइड्रोलॉजिकल (पानी से संबंधित) आपदाएँ सबसे ज़्यादा होती हैं, जो अनगिनत मौतों और संपत्ति के नुक़सान का कारण बनती है.

कोविड-19 व जलवायु चुनौतियाँ: निडर और दूरगामी नेतृत्व की पुकार

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और मानवता के अस्तित्व पर मंडराते जलवायु संकट से निपटने का एकमात्र विश्वसनीय रास्ता बहुपक्षवाद पर आधारित निडर, दूरगामी और सहयोगपूर्ण नेतृत्व में निहित है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय चर्चा में यह बात कही है. यूएन प्रमुख ने ज़िंदगियों पर मंडराते ख़तरों, पंगु हो रहे व्यवसायों और क्षतिग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं की पृष्ठभूमि में सचेत किया है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए भी जोखिम पैदा हो गया है.