जलवायु और पर्यावरण

भारत और पाकिस्तान भीषण गर्मी की चपेट में, जीवनरक्षा के लिये ऐहतियाती उपायों पर ज़ोर

विश्व में घनी आबादी वाले देशों में शुमार होने वाले भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों में इन दिनों करोड़ों लोग भीषण गर्मी में झुलस रहे हैं और तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को छू चुका है. इसके मद्देनज़र, दोनों देशों में मौसम विज्ञान विभाग, स्वास्थ्य व आपदा प्रबन्धन एजेंसियों साथ मिलकर उन उपायों को प्रभावी ढँग से लागू करने में जुटे हैं, जिनकी मदद से अतीत के सालों में ज़िन्दगियों की रक्षा कर पाना सम्भव हुआ है. 

प्रति दिन एक से अधिक आपदा की आशंका, जोखिम में कमी के लिये कार्रवाई का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी जारी की गई है कि मानवीय गतिविधियाँ और बर्ताव की वजह से, दुनिया भर में आपदाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे लाखों-करोड़ों ज़िन्दगियों के लिये ख़तरा उत्पन्न हो रहा है. साथ ही, हाल के दशकों में दर्ज की गई आर्थिक व सामाजिक प्रगति पर भी जोखिम मंडरा रहा है.

पृथ्वी को पहुँची क्षति की भरपाई और जलवायु कार्रवाई - पाँच समाधान

अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस चिन्तन मनन करने का एक अवसर है कि मानवता ने हमारे ग्रह के साथ किस तरह का बर्ताव किया है. और सही बात ये है कि हम ख़राब रखवाले साबित हुए हैं. जलवायु परिवर्तन पर अन्तर-सरकारी पैनल (IPCC) की रिपोर्टों में पृथ्वी की मौजूदा हालत की चिन्ताजनक तस्वीर उकेरी गई है, मगर आशा का दामन छोड़ने का कारण नहीं है. दुनिया भर में जलवायु कार्रवाई के लिये, पहले से कहीं अधिक गम्भीर प्रयास किये जा रहे हैं और लोग पृथ्वी को पहुँची क्षति की भरपाई करने के लिये एक साथ मिलकर समाधानों पर काम कर रहे हैं.  

भारत: हरित पूंजी में व्यय के लिये चुनौतीपूर्ण रास्ता

नवम्बर 2021 में ग्लासगो में जलवायु सम्मेलन (COP26 )के दौरान, भारत ने नैट ज़ीरो प्राप्ति के लिये, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के लिये 2050 और चीन के लिये 2060 की तुलना में, 2070 की लक्ष्य तिथि निर्धारित की. भारत ने साथ ही, कोयले के सम्बन्ध में अपने संकल्प के शब्दों को "चरणबद्ध तरीक़े से ख़त्म" करने की बजाय "चरणबद्ध तरीक़े से कम करने" में बदल दिया. ये दूरगामी निर्णय थे, जिन्हें जलवायु परिवर्तन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के कमज़ोर पड़ने के रूप में देखा गया. भारत के उस निर्णय की पृष्ठभूमि, व देश की वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (GHGs) कटौती की प्रतिबद्धताओं पूरा करने की योजना के बारे में, विश्व बैंक के जलवायु और स्थाई वित्त विशेषज्ञ अमन हंस के इस ब्लॉग में विस्तृत विश्लेषण...

माँ पृथ्वी दिवस पर, जैव विविधता और पारिस्थितिकी संरक्षण की ज़रूरत रेखांकित

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने शुक्रवार को अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस के अवसर पर, जैव विविधता की हिफ़ाज़त सुनिश्चित करने और पारिस्थितिकी के संरक्षण का आहवान किया है.

अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस: तिहरे पर्यावरणीय संकटों से निपटने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि पृथ्वी पर तीन बड़े संकट – जलवायु व्यवधान, प्रकृति व जैवविविधता की हानि, और प्रदूषण व अपशिष्ट – करोड़ों लोगों के रहन-सहन और वजूद के लिये जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं. उन्होंने शुक्रवार, 22 अप्रैल, को ‘अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर इन तिहरी आपदाओं से निपटने के लिये महत्वाकांक्षी कार्रवाई का आहवान किया है.

दुनिया के नगरों के भाग्य के साथ जुड़ा है - टिकाऊ विकास

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने गुरूवार को आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) की एक विशेष बैठक में कहा है कि टिकाऊ विकास का भविष्य, शहरों के भाग्य के साथ जुड़ा हुआ है. साथ ही ये ज़ोर भी दिया गया है कि इस समय दुनिया की लगभग आधी से ज़्यादा आबादी, नगरीय वातावरण में रहती है और ये संख्या वर्ष 2050 तक, बढ़कर क़रीब 70 प्रतिशत होने का अनुमान है.

'बेहतर नियोजन से बदल सकती हैं, अफ़्रीका की जलवायु तकलीफ़े'

विश्व प्रदूषण में, योरोप या अमेरिका जैसे अन्य महाद्वीपों की तुलना में, अलबत्ता अफ़्रीका का बहुत कम योगदान है, फिर भी इस महाद्वीप को जलवायु परिवर्तन का बड़ा असर झेलना पड़ रहा है. इससे विभिन्न इलाक़ों में लगातार सूखा या बाढ़ की समस्या के कारण, खाद्य सुरक्षा और कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ता है. संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और अफ़्रीकी जोखिम क्षमता क्लस्टर के महानिदेशक, इब्राहिमा चेइख़ डियोंग ने, हाल ही में दुबई में हुए विश्व उद्यमिता व निवेश फ़ोरम (WEIF) के दौरान, अफ़्रीका के समक्ष जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी जोखिमों पर, यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ बातचीत की. वीडियो रिपोर्ट...

यूनेस्को: स्मारक व स्थल दिवस पर जलवायु कार्रवाई की महत्ता रेखांकित

संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन – यूनेस्को ने सोमवार को अन्तरराष्ट्रीय स्मारक और विरासत स्थल दिवस के अवसर पर आगाह किया है कि इस समय दुनिया भर में हर तीन में से एक प्राकृतिक स्थल और छह में से एक सांस्कृतिक स्थल, जलवायु परिवर्तन के जोखिम का सामना कर रहे हैं.

प्रवाल भित्तियों का वजूद ख़तरे में, यूनेस्को की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने चेतावनी देते हुए कहा है कि विश्व की सर्वश्रेष्ठ ज्ञात प्रवाल भित्तियों को अगर गरम होते समुन्दरों के अनुरूप ढालने के लिये और ज़्यादा प्रयास नहीं किये गए तो वो इस सदी के अन्त तक पूरी तरह से लुप्त भी हो सकती हैं.