जलवायु परिवर्तन

विश्व तापमान वृद्धि की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा व व्यापक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के सभी पहलुओं पर बहुत बड़ा असर डाल रहा है, साथ ही जलवायु संकट दुनिया भर की आबादी के स्वास्थ्य और रहन-सहन को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान के महानिदेशक डॉक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा के साथ विशेष बातचीत... 

जलवायु परिवर्तन से जंग स्कूली छात्रों के संग

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावरण से जुड़े हर पहलू पर व्यापक असर पड़ रहा है. इस विशालकाय चुनौती से निपटने में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों की क्या भूमिका हो सकती है और वे किस तरह नए और अभिनव समाधानों का हिस्सा बन सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की एक पहल इसी दिशा में प्रयासों पर केंद्रित है.

जलवायु परिवर्तन: ज़मीन, हवा, वातावरण, हर कहीं बढ़ रहा है संकट

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा व व्यापक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन पर्यावरण के सभी पहलुओं पर बहुत बड़ा असर डाल रहा है, साथ ही जलवायु संकट दुनिया भर की आबादी के स्वास्थ्य और रहन-सहन को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रहा है.

 

कृषि जैवविविधता की सफलता की कहानी

चावल का 90 फ़ीसदी से ज़्यादा उत्पादन और खपत एशिया में है. भारत में 1960 के दशक में हरित क्रांति शुरू होने से पहले धान की एक लाख से ज़्यादा क़िस्में थी जिनमें स्वाद, पोषण, कीट-प्रतिरोधक क्षमता के विविध गुणों का मिश्रण होने के साथ-साथ परिस्थितियों के अनुसार ढलने की भी क्षमता भी नीहित थी. जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौती के मद्देनज़र ऐसी क़िस्मों को फिर से बढ़ावा देने के प्रयासों में सफलता मिल रही है. 

बदलती दुनिया में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा

पक्षियों, मछलियों व स्तनपायी जानवरों सहित वन्यजीवों की कई प्रजातियां भोजन व प्रजनन के लिए हर साल अपने ठिकानों से दूर अन्य स्थानों व देशों का रुख़ करती हैं. जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता घटने के इस दौर में ऐसी प्रजातियों का ख़याल किस तरह रखा जा सकता है, इसी विषय पर प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (CMS) के 13वें सम्मेलन, कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13 में विचार-विमर्श हो रहा है. ये कॉप-13 सम्मेलन भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित हो रहा है.

जलवायु कार्रवाई तेज़ करने पर बल, शरणार्थियों की मदद के लिए पाकिस्तान की सराहना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने लंबे समय तक भारी संख्या में शरणार्थियों को अपने यहाँ पनाह देने में असाधारण दरिया-दिली और मज़बूती दिखाने व जलवायु परिवर्तन की चुनौती का मुक़ाबला करने में अहम भूमिका के लिए पाकिस्तान की सराहना की है. महासचिव ने रविवार को पाकिस्तान की तीन दिन की यात्रा शुरू करते हुए इस्लामाबाद में ये बात कही.

प्रवासी वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कॉप-13

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (सीएमएस) को लेकर 13वां कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13, भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित किया जा रहा है. 15 फरवरी से 22 फरवरी तक चलने वाले सीएमएस कॉप-13 में 110 देशों के लगभग 1200 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और तेज़ी से लुप्त होती प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के बारे में चर्चा करेंगे. 

जयपुर साहित्य महोत्सव में जलवायु मुद्दा भी चर्चा में

संयुक्त राष्ट्र ने भारत की गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव की पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन से तत्काल निपटने की अहमियत को फिर दोहराया है. भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर रेनाटा डेज़ालिएन ने जलवायु आपात स्थिति पर एक सत्र के दौरान बताया कि जलवायु संकट पर असरदार कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र अपनी सीमाओं से परे जाकर प्रयासों में जुटा है.

बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों से जलवायु कार्रवाई की अपील

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अगर विश्व के प्रमुख औद्योगिक देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं की तो जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए अभिशाप बन कर रह जाएगा. स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि कई छोटे विकासशील देशों और योरोपीय संघ ने वर्ष 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी (नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन की स्थिति) का संकल्प लिया है लेकिन बड़े उत्सर्जक देशों द्वारा कार्रवाई किया जाना अभी बाक़ी है.

हेती: भूकंप के प्रभावितों की याद, भविष्य संवारने में मदद का वादा भी

हेती में जनवरी 2010 में आए विनाशकारी भूकंप में लगभग दो लाख 20 लोगों की मौत हो गई थी और तीन लाख से ज़्यादा घायल हुए थे. मृतकों में संयुक्त राष्ट्र के 102 कर्मचारी भी थे.  केवल 35 सेकंड तक चले 7.0 की तीव्रता वाले उस भूकंप के बाद लगभग 15 लाख लोग बेघर भी हो गए थे. भूकंप के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रभावितों को यूएन मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में सम्मान के साथ याद किया गया.