जलवायु परिवर्तन

कोविड-19 व जलवायु चुनौतियाँ: निडर और दूरगामी नेतृत्व की पुकार

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 और मानवता के अस्तित्व पर मंडराते जलवायु संकट से निपटने का एकमात्र विश्वसनीय रास्ता बहुपक्षवाद पर आधारित निडर, दूरगामी और सहयोगपूर्ण नेतृत्व में निहित है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय चर्चा में यह बात कही है. यूएन प्रमुख ने ज़िंदगियों पर मंडराते ख़तरों, पंगु हो रहे व्यवसायों और क्षतिग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं की पृष्ठभूमि में सचेत किया है कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए भी जोखिम पैदा हो गया है. 

पृथ्वी दिवस पर डिजिटल कॉन्सर्ट

पृथ्वी दिवस की 50 वीं वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार और पर्यावरणविद् रिकी केज ने 22 अप्रैल को एक 'डिजिटल कॉन्सर्ट - रिकी केज एट वन पेज स्पॉटलाइट' का आयोजन किया. इस कॉन्सर्ट का उद्देश्य, वैश्विक समुदाय को एकजुट करना और करुणा, बलिदान व आशा का संदेश फैलाने में मदद करना था. इसमें यूनेस्को, एमझीआईईपी, यूएनसीसीडी, यूनीसेफ़ इंडिया, समेत 5 ग्रैमी पुरस्कार विजेताओं समेत 44 संगीतकार शामिल हुए.

भारत: फ़ायदेमन्द प्राकृतिक खेती का रुख़

भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में किसान जागरूक होकर प्राकृतिक खेती की ओर रुख़ कर रहे हैं. इसमें रसायनिक उर्वरकों के बजाय स्थानीय स्तर पर तैयार देसी खाद इस्तेमाल किया जाता है जिससे अच्छी क़िस्म की फ़सल होती है. ये प्राकृतिक खेती लोकप्रिय हो रही है और अगले कुछ वर्षों के दौरान ज़्यादा से ज़्यादा किसान शून्य बजट प्राकृतिक खेती को पूरी तरह से अपनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं. एक वीडियो डॉक्यूमेंटरी...

कोविड-19: ‘कार्बन उत्सर्जन में अस्थाई गिरावट’ से नहीं रुकेगा जलवायु परिवर्तन

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों पर अभूतपूर्व असर हुआ है जिससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में गिरावट आने की संभावना जताई गई है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने सचेत किया है कि यह एक अच्छी ख़बर है मगर अस्थाई है क्योंकि सामान्य जीवन के फिर शुरू होने के बाद कार्बन उत्सर्जन में फिर से तेज़ी आने की संभावना है.

कोविड-19: पृथ्वी के बाशिन्दों को 'नींद से जगा देने वाली अभूतपूर्व घंटी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को ‘अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी मॉं दिवस’ (International Mother Earth Day) के अवसर पर ध्यान दिलाया है कि विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 एक नींद से जगा देने वाली एक अभूतपूर्व घंटी है लेकिन इससे सबक़ लेते हुए ऐसे विकास की दिशा में संसाधन निवेश करने होंगे जिनसे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिले और टिकाऊ विकास का मार्ग प्रशस्त हो. 

'पृथ्वी को भी बचाना होगा'

यूएन महासचिव एंतोनियो गुूटेरेश ने कहा है कि हमें अपने ग्रह को कोरोनावायरस और हमारे वजूद के लिए एक ख़तरा बन चुके जलवायु संकट दोनों से ही बचाने के लिए निर्णायक कार्रवाई करनी होगी और मौजूदा संकट हमारी आँखें खोलने के लिए एक अभूतपूर्व अलार्म है. 22 (बुधवार) अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस पर वीडियो संदेश...

कोविड-19: यूएन जलवायु शिखर वार्ता को स्थगित करने का फ़ैसला

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में नवंबर 2020 में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक जलवायु शिखर वार्ता को स्थगित करने का फ़ैसला किया गया है. जलवायु मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था (UNFCCC) ने कहा है कि बैठक के स्थगित होने से प्रतिनिधियों व पर्यवेक्षकों की सुरक्षा के साथ-साथ सभी पक्षों को महत्वपूर्ण जलवायु मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और तैयारी करने का ज़्यादा समय मिल सकेगा.  

कोविड-19: मौसम निगरानी प्रणाली की सटीकता पर संदेह के बादल

संयुक्त राष्ट्र की मौसम विज्ञान एजेंसी (WMO) ने कोविड-19 के कारण मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और निगरानी प्रक्रिया में आने वाले व्यवधान पर चिंता जताई है. यूएन एजेंसी का कहना है कि ऑंकड़ों की उपलब्धता और मौसम विश्लेषण की गुणवत्ता प्रभावित होने से पूर्व चेतावनी प्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका है. 

जल की बूंद-बूंद को सहेजा जाना ज़रूरी

बाढ़, भारी बारिश, सूखा और पिघलते हिमनद...जलवायु परिवर्तन के कई बड़े संकेत स्पष्ट रूप से जल पर आधारित हैं. इस वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस पर यूएन की मौसम विज्ञान एजेंसी ने जल और जलवायु के आपसी संबंध को रेखांकित करते हुए जल संबंधी ऑंकड़ों की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने की पुकार लगाई है.   
 

जलवायु समस्या के समाधान का हिस्सा है टिकाऊ जल प्रबंधन

रविवार, 22 मार्च, को ‘विश्व जल दिवस’ (World Water Day) पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक अहम रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और उनके असर को कम करने के लिए जल संसाधानों के इस्तेमाल के तरीक़ों में बड़ा बदलाव आवश्यक है. नई रिपोर्ट में बढ़ते जल संकट और कृषि व उद्योगों में जल के दक्षतापूर्ण उपयोग के लिए ठोस प्रयासों की पुकार लगाई है.