जलवायु परिवर्तन

मरुस्थलीकरण व सूखा विरोधी दिवस

मानव गतिविधियों के कारण पृथ्वी का स्वास्थ्य भी ख़राब चल रहा है और जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी की तकलीफ़ों में और इज़ाफ़ा हुआ है. मरुस्थलीकरण व सूखा का सामना करने के लिए मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

पृथ्वी का ख़याल करें, तुरन्त!

भारत की अनेक आस्था व धार्मिक हस्तियों ने इस वर्ष पर्यावरण दिवस के मौक़े पर पृथ्वी की धरोहर को सहेजने के लिए विभिन्न उपाय करने की अपील की है. इनमें प्रकृति को नुक़सान नहीं पहुँचाना और बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना शामिल है. पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों की बेहतरी के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है. इन धार्मिक हस्तियों का वीडियो सन्देश...

मछली खपत में इज़ाफ़ा, टिकाऊ प्रबन्धन की सख़्त ज़रूरत

दुनिया भर में इन्सानों के भोजन में मछलियों की खपत वर्ष 2018 में रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई थी और आने वाले दशक के दौरान इसमें और भी ज़्यादा वृद्धि होने का अनुमान है. खाद्य और कृषि संगठन ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में ये तथ्य पेश करते हुए टिकाई मत्स्य प्रबन्धन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है. इसे सोफ़िया रिपोर्ट कहा जाता है.

महासागर संरक्षण के लिए ज़रूरत है फ़ौलादी इरादों की

दुनिया जब कोविड-19 महामारी की चपेट में नज़र आ रही है तो महासागरों की हिफ़ाज़त करने के लिए फ़ौलादी इरादे वाले व्यवहारवाद की आवश्यकता है. ये कहना है महासागरों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के विशेष दूत पीटर थॉम्पसन का, जिन्होंने 8 जून को मनाए जाने वाले विश्व महासागर दिवस के मौक़े पर ये बात कही है. 

भारत के पश्चिमी तटों पर चक्रवात निसर्ग की डरावनी दस्तक

भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों पर स्थित महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाक़ों में बुधवार को निसर्ग तूफ़ान ने डरावनी दस्तक दी. तूफ़ान के कारण कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई और कुछ घायल हो गए. मुम्बई, ठाणे, रायगढ़ समेत महाराष्ट्र के तटवर्ती ज़िलों के अलावा गुजरात के इलाक़ों में भी इस तूफ़ान का असर दिखाई दिया. 
 

जैव विविधता दिवस

यूएन महासचिव ने 22 को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौक़े पर कहा है कि इन्सानों के तमाम समाधान प्रकृति में समाहित हैं इसलिए बेहतर वांछित भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर कलयाण के लिए प्रकृति के साथ बेहतर सन्तुलन बनाना बहुत ज़रूरी है. वीडियो सन्देश...

मधुमक्खियों की अहमियत

20 मई को मधुमक्खी दिवस मनाया जा रहा है. इस मौक़े पर खाद्य आपूर्ति, जैव विविधता व पारिस्थितिकी तन्त्र में परागण जीवों के योगदान के बारे में जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है. शहद के अलावा मधुमक्खियों की और भी है अहमियत. देखें ये वीडियो...

एशिया-प्रशान्त के महासागरों की पुनर्बहाली की उम्मीद

हाल के वर्षों में समुद्री प्रदूषण, अत्यधिक मत्स्य-पालन और तेज़ी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के कारण एशिया-प्रशान्त क्षेत्र के महासागरों की हालत बद से बदतर होती जा रही है. लेकिन एशिया और प्रशान्त के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) द्वारा बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि कोविड -19 महामारी के कारण इन्सानी गतिविधियों, मानवीय गतिशीलता और संसाधनों की माँग अस्थायी रूप से बन्द होने से समुद्री पर्यावरण को राहत मिली है. 

प्रवासी पक्षियों की दुनिया

दुनिया भर में ऐसे हज़ारों-लाखों पक्षी हैं जिनकी फ़ितरत प्रवासी है, यानि वो अपने अस्तित्व के लिए किसी एक जगह नहीं ठहर सकते और प्रवासन के लिए अक्सर हज़ारों मील का सफ़र तय करते हैं, अक्सर अदृश्य रास्तों से. ये एक अनोखी दुनिया है कि प्रवासी पक्षी किस तरह अपनी ज़िन्दगी जीते हैं. एक झलक पेश करती ये वीडियो जिसका फ़िल्मांकन कुछ समय पहले  किया गया था, और अब इसे नए अंदाज़ में पेश किया गया है...

भारत में बाढ़ के विनाशकारी प्रभाव से बचने के उपाय

कोविड-19 महामारी से पूरे विश्व की पर्यावरण, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रणालियों की कमज़ोरी सामने आ गई है. संकट अभी जारी है, जिससे ये स्पष्ट होता जा रहा है कि किस तरह अनगिनत आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत कारक वैश्विक तापमान और मानव स्वास्थ्य जैसे पर्यावरण जोखिमों को बढ़ाते हैं. भारत दुनिया में सबसे अधिक आपदा-प्रवण देशों में से एक है, जिसमें हाइड्रोलॉजिकल (पानी से संबंधित) आपदाएँ सबसे ज़्यादा होती हैं, जो अनगिनत मौतों और संपत्ति के नुक़सान का कारण बनती है.