जलवायु परिवर्तन

वीडियो गेम के ज़रिये पर्यावरण संरक्षण

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानि यूनेप, कई मशहूर वीडियो गेम कम्पनियों के साथ मिलकर ऐसे वीडियो गेम बनाने में सहयोग कर रहा है, जो युवा पीढ़ी में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ा सके.. साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि खेल की दुनिया से ये बदलाव असल ज़िन्दगी तक भी पहुँचे और विश्व में परिवर्तन की एक नई बयार चले.

बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए 'कोविड-19 से लें सबक़'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर के प्रमुख सांसदों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए कहा है  कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने की कार्रवाई में दुनिया ने जो सबक़ लिए हैं उनका उपयोग भविष्य में सही रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए किया जाना होगा. 

परिवार और परम्परा ने दिखाई जलवायु कार्रवाई की राह

जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में जुटी भारत की अर्चना सोरेंग का मानना है कि आदिवासी जनजातियों को जलवायु कार्रवाई के केन्द्र में रखा जाना अहम है और पर्यावरण संरक्षण के उपायों के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही उनकी परम्पराओं और प्रथाओं से सीख ली जानी चाहिए. अर्चना उन सात युवाओं में से हैं जिन्हें दुनिया भर से महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल किया गया है.

जलवायु मुद्दे पर एकल शुरूआत ने खोले बदलाव के विशाल दरवाज़े

अमेरिका की एक 18 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता सोफ़िया कियान्नी ने यूएन न्यूज़ के साथ बातचीत में कहा है वो पर्यावरण रुचि नहीं रखने वाले हर व्यक्ति को जलवायु कार्यकर्ता के रूप में तब्दील कर देने की ख़्वाहिशमन्द हैं. सोफ़िया कियान्नी का परिवार मूलतः ईरान से है और वो ख़ुद उन सात युवाओं में शामिल हैं जिन्हें दुनिया भर से महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के पर्यावरण पर युवा सलाहकारों के समूह में शामिल किया गया है.

भूटान में सह-अस्तित्व सीख रहे बाघ और किसान

भूटान में एक नई परियोजना के ज़रिये इन्सानों और बाघों के बीच सन्तुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है. लक्समबर्ग सरकार द्वारा वित्तपोषित और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में भूटान में चल रहे इस ‘Vanishing Tigers Programme, 2020-2023’ का लक्ष्य है – विश्व में लुप्तप्राय बाघों की प्रजाति पर जलवायु परिवर्तन के असर और स्थानीय समुदायों और मानव-बाघ संघर्ष को गहराई से समझना. ये कार्यक्रम भूटान की शाही सरकार और वहाँ के टाइगर सेंटर के साथ साझेदारी में चलाया जा रहा है.

'यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ' के फ़ाइनलिस्ट - पूरव देसाई

पर्यावरण को बेहतर बनाने के क्षेत्र में नवाचार वाले समाधान तलाश करने के लिये 2020 के 'यंग चैम्पियन ऑफ़ द अर्थ' की अन्तिम सूची में दुनिया भर से 35 युवा होनहार चुने गए हैं जिनमें भारत के पूरव देसाई भी हैं.  क्या है उनका असाधारण व नवाचार वाला काम, जानिये इस वीडियो में...

जलवायु आपात स्थिति – ‘शान्ति के लिए एक ख़तरा’

वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी के कारण जलवायु आपात स्थिति पैदा हो रही है जिससे अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा के समक्ष पहले से मौजूद ख़तरों के और ज़्यादा गहराने के साथ-साथ नए जोखिम भी मंडरा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद को वर्तमान हालात से अवगत कराते हुए विभिन्न मोर्चों पर त्वरित जलवायु कार्रवाई की अहमियत पर बल दिया. 

आर्कटिक: जंगलों में आग धधकने और समुद्री बर्फ़ की मात्रा घटने से चिन्ता

साइबेरिया में लम्बे समय से औसत तापमान का स्तर ऊँचा होने के कारण आर्कटिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अमेरिका के फ़्लोरिडा प्रान्त से भी ज़्यादा गर्मी दर्ज की गई है जिससे लगातार दूसरे साल जंगलों में दावानल धधक रहा है. शुक्रवार को विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने क्षेत्र में मौजूदा हालात के बारे में जानकारी देते हुए आर्कटिक तट पर समुद्री बर्फ़ की मात्रा घटने और उसके दुष्परिणामों के प्रति चेतावनी जारी की है. 

वातानुकूलित उपकरणों को ऊर्जा दक्ष बनाने से ग्रीनहाउस गैसों में भारी कटौती सम्भव

गर्मी से राहत दिलाने वाले और घरों व कार्यालयों को ठण्डा करने वाले उपकरणों को जलवायु अनुकूल और ऊर्जा दक्ष बनाकर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अगले चार दशकों में 460 अरब टन की कटौती की जा सकती है - यह मात्रा वर्ष 2018 में उत्सर्जन के स्तर के आधार पर  लगभग आठ वर्षों के कुल वैश्विक उत्सर्जन के बराबर है. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की एक साझा रिपोर्ट में पर्यावरण के लिये हानिकारक उत्सर्जनों से निपटने में जलवायु अनुकूल समाधानों की अहमियत को रेखांकित किया गया है.  

बढ़ता वैश्विक तापमान जलवायु लक्ष्य पूरा करने में 'बड़ी चुनौती'

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के नए आँकड़ों के अनुसार आने वाले पाँच वर्षों में वार्षिक वैश्विक तापमान, पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में कम से कम 1° सैल्सियस बढ़ने की आशंका है, जिससे वैश्विक जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य खटाई में पड़ सकते हैं.