जलवायु परिवर्तन

'दशकों में हासिल हुई प्रगति कुछ ही घंटों में ख़त्म हो सकती है'

प्राकृतिक आपदाएँ जिस तरह विकास को नकारती हैं, शायद ही कोई और वजह ऐसा करती हो, ये कहना है संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का जिन्होंने सातवें टोकियो अंतरराष्ट्रीय अफ्रीका विकास सम्मेलन के दूसरे दिन प्रतिभागियों को संबोधित किया. इस सम्मेलन का ये सातवां वर्ष है.

ग्रेटा थनबर्ग का नाव काफ़िला न्यूयॉर्क पहुँचा, जलवायु मुद्दे को मिली नई ऊर्जा

 एक पखवाड़े की समुद्री यात्रा के बाद किशोरी क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग का नाव काफ़िला बुधवार को न्यूयॉर्क शहर पहुँचा जिसने जलवायु मुद्दे में कुछ और जान फूँक दी. ग्रेटा थनबर्ग संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सितंबर में होने वाले दो जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए यहाँ पहुँची हैं.

वन्य जीवों के संरक्षण के लिए रौशनी की किरण

दुनिया भर में अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे बहुत से वन्य जीवों को बुधवार को कुछ राहत मिली. वो इस तरह कि विश्व भर में पशुओं और पेड़-पौधों के व्यापार को टिकाऊ बनाने और उनके संरक्षण के लिए बेहतर उपाय करने के बारे में देशों ने जिनीवा में एक बड़ी बैठक हुई जिसमें आमतौर पर देशों के बीच सहमति बन गई.

जलवायु इमरजेंसी से निपटने के लिए 'मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति' की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया भर में लोग जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने और एक हरित व स्वच्छ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान कर रहे हैं. जी-7 नेताओं से वार्ता के दौरान उन्होंने ध्यान दिलाया कि जलवायु आपात स्थिति से निपटने के लिए साधनों की कमी नहीं है लेकिन इस संकट से पार पाने के लिए मज़बूत संकल्प और दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है.

एशिया-पैसेफ़िक देशों में प्राकृतिक आपदाओं की विकराल चुनौती

एशिया और पैसेफ़िक क्षेत्र में पर्यावरण क्षरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बदलते स्वरूपों और उनके घातक प्रभावों से ऐसी विनाशकारी घटनाओं के बार-बार होने की आशंका बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में स्थित देशों के लिए ऐसी आपदाओं का समय पर अनुमान लगाना और उनसे निपटने के लिए ज़रूरी तैयारी कर पाना मुश्किल साबित हो रहा है जो भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती का संकेत है.

समुद्रों को सहेजकर रखने के लिए समझौते की कोशिश

समुंदरों में ज़ाहिरा तौर पर तो लगभग दो लाख प्रजातियों की मौजदूगी के बारे में जानकारी उपलब्ध है मगर असल में ये संख्या लाखों में होने के अनुमान व्यक्त किए गए हैं. चिंता की बात ये है कि ये समुद्री प्रजातियाँ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और दोहर के ख़तरों का सामना कर रही हैं.

 

जलवायु परिवर्तन के असाधारण प्रभाव से खाद्य सुरक्षा पर मंडराता ख़तरा

विश्व में 50 करोड़ लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जहां जलवायु परिवर्तन की वजह से पर्यावरण क्षरण हो रहा है जिससे वहां जीवन प्रभावित हो रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक नई रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए सभी देशों से अपील की है कि भूमि के टिकाऊ इस्तेमाल के लिए संकल्प लिए जाने चाहिए ताकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित किया जा सके, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए.

टिकाऊ विकास लक्ष्य-13: जलवायु कार्रवाई

पृथ्‍वी की जलवायु बदल रही है जिसका हमारे दैनिक जीवन और समुदायों के सहने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ रहा है. चरम मौसम की बढ़ती घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं और समुद्र के चढ़ते जल स्‍तर से नए संकट उपज रहे हैं. जलवायु परिवर्तन की तेज़ी से उभरती चुनौती और उसके दुष्प्रभावों से निपटने के लिए टिकाऊ विकास एजेंडे का 13वां लक्ष्य प्रभावी कार्रवाई पर केंद्रित है. 

प्रवासन व जलवायु संकट: टिकाऊ समाधान की तलाश

पूरे मानव इतिहास पर नज़र डालें तो प्रवासन और जलवायु को हमेशा एक दूसरे से जुड़ा हुआ पाएंगे लेकिन आधुनिक दौर में मानव निर्मित जलवायु संकट के गंभीर प्रभाव पूरी मानव जाति के रहन-सहन का सिलसिला व्यापक रूप से बदलने वाले हैं.

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध दौड़ हमें जीतनी ही होगी - यूएन महासचिव

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जलवायु की आपात स्थिति और बढ़ते वैश्विक तापमान पर चिंता ज़ाहिर करते हुए विश्व नेताओं से आगामी शिखर वार्ता में ठोस जलवायु कार्रवाई के लिए बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा के साथ आने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्रवाई अभी नहीं की गई तो दुनिया को जल्द उसके दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे.