जलवायु और पर्यावरण

दक्षिण एशिया में, समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने का संकल्प - ब्लॉग

प्लास्टिक के अनुमानतः 5.2 खरब टुकड़े पहले से ही महासागर को प्रदूषित कर रहे हैं, और इस मात्रा में प्रत्येक वर्ष, 80 लाख टन की बढ़ोत्तरी होती है. इस समस्या से निपटने के लिये दक्षिण एशियाई देशों ने साथ मिलकर इसका समाधान करने की ठानी है. इस बारे में विस्तृत जानकारी के लिये विश्व बैंक की क्षेत्रीय एकीकरण मामलों की निदेशिका सेसली फ्रूमेन, दक्षिण एशियाई सतत विकास के क्षेत्रीय निदेशक जॉन रूमे और पवन पाटिल का ब्लॉग.

अमेरिका से, वैश्विक टीकाकरण व जलवायु कार्रवाई की अगुवाई करने का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन प्रणाली में, अमेरिका की सक्रिय वापसी का स्वागत करते हुए, कोविड-19 महामारी को मात देने के लिये, वैश्विक टीकाकरण में, अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया है. उन्होंने सोमवार को, अमेरिका से, नवम्बर 2021 में, ग्लासगो में, होने वाले जलवायु सम्मेलन – कॉप26 को, जलवायु कार्रवाई की दिशा में, एक अति महत्वपूर्ण पड़ाव बनाने का भी आग्रह किया है.

भारत में बेकार जा रहे पानी की री-सायकलिंग

भारत के चेन्नई शहर में जल की कमी की समस्या का समाधान तलाश करने के लिये, विश्व बैंक की सहायता से अपशिष्ट जल की री-सायकलिंग की जा रही है. चेन्नई, पानी की री-सायकलिंग करने वाला भारत का पहला शहर है.  भारत में विश्व बैंक के सीनियर म्यूनिसिपल इंजीनियर, पूनम अहलूवालिया और सीनियर इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ रघु केसवन का ब्लॉग.

महत्वाकाँक्षा, निर्णय क्षमता, स्पष्टता – जलवायु कार्रवाई के मन्त्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी की वजह से महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई में देरी नहीं की जा सकती और वर्चुअल वार्ताओं के ज़रिये तेज़ी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र, प्रभावित समुदायों तक मदद पहुँचाने, देशों को पूर्ण समर्थन प्रदान करने और सभी की आवाज़ सुने जाने के लिये संकल्पबद्ध है और महत्वाकाँक्षी कार्रवाई के लिये स्पष्टता व निर्णायक ढंग से आगे बढ़ा जाना होगा. 

मौसम संगठन की चेतावनी - अभूतपूर्व जोखिम की ज़द में हैं समुद्र

संयुक्त राष्ट्र के मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन ने दुनिया भर के समुद्रों को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन रक्षक निगरानी प्रणालियों और पूर्व चेतावनी देने वाली सेवाओं में, कोविड-19 महामारी के कारण जो व्यवधान आया है, उन्हें फिर से मुस्तैद बनाए जाने की ज़रूरत है, ताकि तटवर्ती इलाक़ों में रहने वाले और जोखिम का सामना करने वाले समुदायों की रक्षा की जा सके.

गहन प्राकृतिक आपदाओं में तेज़ी - कृषि क्षेत्र पर सर्वाधिक असर

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवँ कृषि संगठन (UNFAO) का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के नए और अभूतपूर्व रूपों का, कृषि उद्योग पर भीषण असर हुआ है. यूएन कृषि एजेंसी ने गुरुवार को जारी अपनी एक नई रिपोर्ट में यह बात कही है.   
 

कोविड-19: उपायों में ढिलाई के लिये, मौसमी कारकों को वजह ना बनाएँ

संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी (WMO) ने आगाह करते हुए कहा है कि उत्तरी गोलार्द्ध में गर्मी का मौसम शुरू होने के मौक़े को, कोरोनावायरस महामारी से बचने के उपायों में ढिलाई बरते जाने के लिये, किसी कारण या बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये. 

प्लास्टिक प्रदूषण: छिपी महामारी...

कोविड-19 महामारी का अन्त अब नज़र आने लगा है, लेकिन इस विश्व-व्यापी संकट के बीच एक और महामारी है जो मानवता के सामने मुँह बाएँ खड़ी है – प्लास्टिक प्रदूषण की महामारी. पर्यावरण प्रदूषण के मुद्दे पर, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के भारत कार्यालय के प्रमुख अतुल बगई, और नेशनल ज्योग्राफ़िक फ़ैलो और पर्यावरण इंजीनियरिंग की प्रोफ़ेसर,जेना जैम्बेक का ब्लॉग, .

खाद्य प्रणालियाँ, एक तिहाई उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार

एक नया अध्ययन दर्शाता है कि विश्व भर में मानव-गतिविधियों के कारण होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की एक-तिहाई से ज़्यादा मात्रा के लिये खाद्य प्रणालियाँ ज़िम्मेदार हैं. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवँ कृषि संगठन (UNFAO) में जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ फ्रांसेस्को टुबिएलो और इटली में योरोपीय आयोग के साझा शोध केन्द्र के विशेषज्ञों द्वारा, साझा रूप से तैयार की गई यह रिपोर्ट, ‘नेचर फ़ूड’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है. 

भोजन की बर्बादी, जलवायु परिवर्तन को न्योता

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के एक नए अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2019 में बेचा गया, 93 करोड़ टन से ज़्यादा भोजन, कूड़ेदान में फेंक दिया गया. यूएन एजेंसी के अनुसार भोजन की बर्बादी केवल धनी देशों की समस्या नहीं है, और इससे जलवायु परिवर्तन के लिये भी खाद मिलती है. वर्ष 2030 तक टिकाऊ विकास एजेण्डा के तहत, वर्ष 2030 तक, भोजन की बर्बादी में 50 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.