जलवायु और पर्यावरण

टिकाऊ विकास के लिये वित्त की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा, उप प्रमुख आमिना मोहम्मद

सुंयुक्त राष्ट्र की उप प्रमुख आमिना जे मोहम्मद ने सोमवार को कहा है कि संसाधन सम्पन्न और संसाधन वंचित लोगों के बीच अविश्वास की बढ़ती खाई के वातावरण में, टिकाऊ विकास के लिये, यथा सम्भव विभिन्न क्षेत्रों से पक्षकारों को शामिल करते हुए, वित्त का प्रबन्ध करना, इस समय पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है.

तीन अरब लोगों को मयस्सर नहीं है स्वस्थ भोजन ख़ुराक

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि एजेंसी (FAO) ने कहा है कि दुनिया भर में लगभग तीन अरब लोगों, यानि विश्व की कुल आबादी के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से के पास, अपने लिये स्वस्थ भोजन की एक ख़ुराक का प्रबन्ध करने के साधन उपलब्ध नहीं हैं. एजेंसी ने मंगलवार को एक नई रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि अगर अनपेक्षित घटनाओं के कारण, लोगों की आमदनी में एक तिहाई कमी हो जाती है तो अतिरिक्त एक अरब लोग भी इसी पाँत में पहुँच जाएंगे.

कोलम्बिया: ऐतिहासिक शान्ति समझौते के पाँच साल, आपसी मेलमिलाप व बेहतर भविष्य के लिये प्रयास

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश इस सप्ताह कोलम्बिया का दौरा कर रहे हैं, जहाँ वह पाँच दशकों तक चले हिंसक संघर्ष का अन्त करने वाले शान्ति समझौते की पाँचवी वर्षगाँठ पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इस क्रम में, यूएन प्रमुख का ल्लानो ग्राण्डे नामक गाँव भी जाने का कार्यक्रम है, जहाँ स्थानीय लोग और पूर्व लड़ाके एक साथ मिलकर, बेहतर भविष्य के लिये प्रयास कर रहे हैं. 

युवा सम्मेलन में, होनहार उद्यमियों व रचनाकारों के चमत्कारी अनुभव

दुनिया के अनेक हिस्सों से, युवा रचनाकारों और उद्यमियों ने, जिनीवा में आयोजित युवा सम्मेलन में इस बारे में, अपने अदभुत अनुभव बाँटे हैं कि उन्होंने किस तरह, अपने समुदायों और पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव सम्भव बनाए हैं और अन्य लोग भी ऐसा ही, किस तरह से कर सकते हैं.

जलवायु कार्रवाई - सर्वजन को गरिमा, अवसर और समानता वाहन, आमिना जे मोहम्मद

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद का कहना है कि जलवायु कार्रवाई, सर्वजन के लिये, हरित व समान भविष्य की ख़ातिर, एक बदलाव वाहन बन सकती है. उन्होंने हाल ही में एक TED वार्ता में, सभी जगह के लोगों का आहवान किया कि वो अपने नेतृत्वकर्ताओं से, वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के उनके वादों पर अमल करने की मांग करें.

भारत: गंगा नदी में प्लास्टिक प्रदूषण के ख़िलाफ़ यूनेप की मुहिम

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) ने 2020 में ,एशिया और प्रशान्त क्षेत्र की गंगा और मीकांग नदियों में, प्लास्टिक कचरे के रिसाव की निगरानी और सर्वेक्षण करने के लिये ‘काउण्टरमैज़र परियोजना’ (CounterMEASURE project) शुरू की थी. यह परियोजना जापान से वित्त पोषित है. इसके तहत भारत में, गंगा नदी के किनारे बसे हरिद्वार, आगरा और प्रयागराज (पूर्व इलाहाबाद) शहरों में, प्लास्टिक जमाव और रिसाव वाले मुख्य केन्द्रों की पहचान की जी रही है. पूरी कार्रवाई पर भारत में यूनेप की सम्पादकीय सलाहकार, अनूषा कृष्णन की रिपोर्ट...

यूनेप और भारत के बीच, जलवायु कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिये समझौता

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) और भारत के बीच, दक्षिण एशिया में जलवायु कार्रवाई के लिये बेहतर सामंजस्य बैठाने और अधिक निकटता से कार्य करने के लिये एक समझौता हुआ है. इसे ‘मेज़बान देश समझौता’ कहा जा रहा है.

बांग्लादेश: किसानों के लाभ के लिये जलवायु निवेश ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने सरकारों से, छोटे किसानों की ज़रूरतों को जलवायु वित्तपोषण चर्चाओं के केन्द्र में रखने की अपील की है. वर्तमान में केवल 1.7 प्रतिशत जलवायु वित्त ही विकासशील देशों में छोटे किसानों के पास जाता है, जबकि उनपर जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज़्यादा है. बांग्लादेश के छोटे किसानों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते संकट पर एक वीडियो रिपोर्ट..

कॉप26 ‘कुछ सहमति’ के साथ सम्पन्न, मगर यूएन प्रमुख की नज़र में काफ़ी नहीं

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में, संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन कॉप26 के दौरान, वार्ताएँ अतिरिक्त एक दिन खिंचने के बाद, शनिवार को, कुछ सहमतियों वाला एक ‘दस्तावेज़’ प्रस्तुत किया गया है. यूएन प्रमुख के अनुसार, इस दस्तावेज़ में, आज के विश्व में मौजूद हित, विरोधाभास और राजनैतिक इच्छाशक्ति की स्थितियाँ झलकती हैं.

कॉप26: अन्तिम चरण की वार्ता का दौर खिंचा, निर्धारित अवधि से लम्बा

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में संयुक्त राष्ट्र का 26वाँ वार्षिक जलवायु सम्मलेन (कॉप26) शुक्रवार को समाप्त होना था, मगर निर्धारित समय पर ख़त्म होने के बजाय अन्तिम चरण की वार्ताओं का दौर अभी जारी है.