जलवायु और पर्यावरण

फ़िलिपीन्स: सुपर टाइफ़ून ‘राई’ के बाद हालात बदतर होने की आशंका

फ़िलिपीन्स के अनेक इलाक़ों को अपनी चपेट में लेने वाले चक्रवाती तूफ़ान, सुपर टाइफ़ून ‘राई’ के गुज़र जाने के कई दिन बाद भी, वहाँ हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. प्रभावित समुदाय सुपर टाइफ़ून के असर से उबर नहीं पाए हैं और विशाल स्तर पर उत्पन्न हुईं बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. 

पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिये प्रयासरत, यूएन एजेंसी की आधी सदी

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना को वर्ष 2022 में, 50 साल पूरे हो रहे हैं. यूएन एजेंसी ने इस अवसर पर, सभी देशों से पृथ्वी के लिये ख़तरा पैदा करने वाले तीन बड़े जोखिमों, जलवायु परिवर्तन, प्रकृति व जैवविविधता की हानि, और प्रदूषण व कचरा से निपटने के लिये विशाल कार्रवाई करने का आहवान किया है.

भारत: प्लास्टिक प्रदूषण को आड़े हाथों लेता एक कार्यकर्ता

सक्रियता से बदलाव सम्भव है. भारत के पूर्वी प्रदेश बिहार में, एक स्काउट और गाइड कार्यकर्ता  ऋतुराज की कोशिशों से प्लास्टिक प्रयोग के बारे में बदलाव लाने और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल रही है. ऋतुराज, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के प्लास्टिक प्रदूषण का मुक़ाबला करने के लिये वैश्विक युवा आन्दोलन, टाइड टर्नर्स चैलेंज के एक सक्रिय प्रचारक हैं.

पहाड़ों पर कूड़े का ढेर - पर्यटन से ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी के बीच पहाड़ी पर्यटन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ, प्लास्टिक प्रदूषण में भी वृद्धि हुई है जिससे, पर्वतीय पारीस्थितिकी तंत्र पर ख़तरा मण्डराने लगा है. स्रोत से समुद्र तक प्रदूषण से निपटने के उद्देश्य से, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने, एलेन मैकआर्थर फाउण्डेशन के सहयोग से ‘वन प्लैनेट नैटवर्क’ के टिकाऊ पर्यटन कार्यक्रम के तहत, ‘वैश्विक पर्यटन प्लास्टिक पहल’ विकसित की. इस पहल के ज़रिये, पर्वतीय प्रदूषण से निपटने के लिये कई अभियान चलाए जा रहे हैं.

2021 पर एक नज़र: जलवायु कार्रवाई, या आँय, बाँय, शाँय?

इस वर्ष, संयुक्त राष्ट्र समर्थित रिपोर्टों और ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) में निरन्तर यह कड़ा सन्देश दोहराया गया: मानव गतिविधियों की वजह से जलवायु परिवर्तन, ना केवल तात्कालिक बल्कि पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिये बहुत बड़ा ख़तरा है. क्या जलवायु संकट से निपटने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों के सार्थक नतीजे सामने आएँगे?

भारत: वायु प्रदूषण के ख़िलाफ़ प्रदेशों की मुहिम

भारत में वायु गुणवत्ता प्रबन्धन एक क्षेत्रीय मुद्दा है. विश्व बैंक, राज्य-व्यापी स्वच्छ वायु कार्य योजना विकसित करने के लिये, शहर स्तर पर योजना बनाने में उत्तर प्रदेश और बिहार प्रदेशों की  मदद कर रहा है, जिसे पूरे राज्य में विस्तार के लिये उपयोग किया जा सकेगा.

आर्कटिक में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पहुँचने की पुष्टि, नया रिकॉर्ड

संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने आर्कटिक क्षेत्र में 38 डिग्री सेल्सियस, यानि क़रीब 100 डिग्री फ़ैरेनहाइट तापमान दर्ज किये जाने की पुष्टि की है. यूएन एजेंसी का कहना है कि चरम मौसम व जलवायु पुरालेख (archives) में दर्ज आँकड़े बदलती हुई जलवायु को परिलक्षित करते हैं. 

भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव, खाद्य सुरक्षा के लिये हालात जोखिम भरे

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि पिछले एक दशक में, मृदा, भूमि और जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ा है और अब स्थिति एक नाज़ुक पड़ाव पर पहुँच गई है. रिपोर्ट के मुताबिक़, मौजूदा हालात, पारिस्थितिकी तंत्रों की सेहत के नज़रिये से चिन्ताजनक हैं, जिससे बढ़ती विश्व आबादी की खाद्य सुरक्षा के लिये ख़तरा उत्पन्न हो सकता है.

कृषि मिट्टी में प्लास्टिक सर्वव्यापी, टिकाऊ विकल्पों के लिये और ज़्यादा शोध की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (FAO) ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि खेतीबाड़ी की ज़मीनों में, प्लास्टिक प्रदूषण की मौजूदगी सर्वव्यापी हो गई है जिसके कारण खाद्य सुरक्षा, जन स्वास्थ्य, और पर्यावरण के लिये जोखिम उत्पन्न हो रहा है.

रूपान्तरकारी बदलाव के वाहक – 2021 ‘चैम्पियंस ऑफ़ द अर्थ’ विजेताओं की घोषणा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने वर्ष 2021 के लिये ‘चैम्पियंस ऑफ़ द अर्थ’ पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की है. पर्यावरण के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र की ओर से दिये जाने वाले इस सर्वोच्च सम्मान से नवाज़े जाने वालों में, एक कैरीबियाई देश की प्रधानमंत्री, एक महिला वैज्ञानिक, आदिवासी महिलाओं के एक समूह और एक महिला उद्यमी शामिल हैं.