जलवायु और पर्यावरण

भारत: झील के संरक्षण व कायाकल्प के लिये युवजन की कार्रवाई

भारत में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़), यूथ4वॉटर अभियान के ज़रिये, जलवायु कार्रवाई में युवजन को शामिल करने के लिये प्रयासरत है. ऐसे ही एक कार्यक्रम के तहत, ओडिशा राज्य में स्थित चिल्का झील का कायाकल्प सम्भव हुआ है, जिससे ना केवल स्थानीय लोगों को अपनी आजीविका प्राप्त हुई है, बल्कि क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का आवागमन बढ़ गया है, जोकि क्षेत्रीय पर्यटन के लिये वरदान साबित हो रहा है. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छोटे प्रयासों से आ रहे बड़े बदलावों की एक कहानी....

डायनासोर ‘फ़्रैंकी’ पहुँचा भारत: क़ुतुब मीनार और सफ़दरजंग के मक़बरे से जलवायु कार्रवाई की पुकार

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की ‘Don't Choose Extinction' नामक एक मुहिम के तहत, कम्प्यूटर-जनित डायनासोर फ़्रैंकी ने भारत में सर्वजन से हिन्दी में, विलुप्ति की राह ना चुनने व जलवायु कार्रवाई की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने इस कार्यक्रम में सर्वजन से पृथ्वी की रक्षा के लिये वैश्विक प्रयासों का हिस्सा बनने का आहवान किया है.

स्टॉकहोम+50: पर्यावरण की रक्षा के लिये रूपान्तरकारी बदलावों की पुकार

स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित पर्यावरण सम्मेलन (Stockholm+50) के समापन पर वैश्विक पर्यावरणीय चिन्ताओं से निपटने और न्यायोचित व टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं की दिशा में आगे बढ़ने के लिये, वास्तविक संकल्प लिये जाने की पुकार लगाई गई है. 

पर्यावरण दिवस: 'पृथ्वी हमारी बढ़ती मांगों का भार वहन नहीं कर सकती'

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व पर्यावरण दिवस के लिये अपने सन्देश में कहा है कि “ये पृथ्वी ही हमारा एक मात्र घर है”. 5 जून (रविवार) को मनाए जाने वाले इस दिवस के मौक़े पर उन्होंने आगाह भी किया है कि पृथ्वी की प्राकृतिक प्रणाली, हमारी बढ़ती मांगों को पूरा नहीं कर सकती है. 

WHO: मानसिक स्वास्थ्य मदद को, जलवायु कार्रवाई योजनाओं का हिस्सा बनाएँ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्टॉकहोम+50 पर्यावरणीय सम्मेलन में, शुक्रवार को एक नए पॉलिसी ब्रीफ़ में कहा है कि जलवायु परिवर्तन का मुक़ाबला करने के लिये बनाई जाने वाली, देशों की राष्ट्रीय योजनाओं में, मानसिक स्वास्थ्य के लिये सहायता भी शामिल किये जाने की दरकार है.

स्टॉकहोम+50 सम्मेलन: पर्यावरणीय संकटों से रक्षा के लिये कार्रवाई का आहवान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मानवता और वैश्विक कल्याण पर मंडराते जोखिमों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए आगाह किया है कि मौजूदा हालात की एक बड़ी वजह यह है कि अब तक किये गए पर्यावरण सम्बन्धी वादे पूरा नहीं किये गए हैं.

यूक्रेन संकट: विकासशील देशों के समक्ष आर्थिक बर्बादी का जोखिम

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण देश में बड़े पैमाने पर विनाश और पीड़ा की वजह बना है, मगर यहाँ हालात से एक ऐसा बवण्डर भी उठ रहा है, जोकि अनेक विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तबाही ला सकता है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश स्टॉकहोम+50 सम्मेलन में शिरकत करने के लिये स्वीडन की राजधानी पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है. 

 

वीडियो गेम के ज़रिये जलवायु कार्रवाई: पृथ्वी के लिये विजयी समाधान

गेमिंग उद्योग जलवायु और पर्यावरण पर आधारित वीडियोगेम से लेकर विशेष फ़ीचर, पॉप-अप, और वास्तविक जीवन में पेड़ लगाने के अवसरों के साथ-साथ, पीएसी-मैन या एंग्री बर्ड्स जैसे खेलों के ज़रिये संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर अनूठे तरीक़ों से, दर्शकों को जलवायु कार्रवाई के लिये प्रेरित करने की कोशिशों में लगा है.

पर्यावरण के लिये ज़्यादा कार्रवाई हो, वरना पृथ्वी के 'मानव बलिदान का क्षेत्र' बन जाने का जोखिम

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि वातावरण को एक प्रमुख मुद्दा बनाने के लिये, विश्व का पहला सम्मेलन, पाँच दशक पहले स्वीडन में हुआ था, तब से ये समझ बढ़ी है कि अगर इनसानों ने पृथ्वी की देखभाल करने में कोताही बरती, तो ये ग्रह मानव बलिदान का क्षेत्र बनकर रह जाएगा. पृथ्वी की रक्षा के लिये आगे की कार्रवाई पपर चर्चा करने के लिये, इस सप्ताह स्टॉकहोम में ताज़ा विचार-विमर्श शुरू होने वाला है, उस सन्दर्भ में सोमवार को, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि ऐसे कहीं ज़्यादा विशाल प्रयासों की आवश्यकता है जिनके ज़रिये हर साल लाखों ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकें.

जलवायु व अन्य विनाशकारी आपदाओं से रक्षा के लिये सहनक्षमता विकास पर बल

आपदा जोखिम न्यूनीकरण के विषय पर इण्डोनेशिया के बाली शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की एक फ़ोरम के समापन पर सुदृढ़ता व सहनसक्षम को बढ़ावा देने और समय पूर्व चेतावनी प्रणालियों को तत्काल अपनाये जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है ताकि आपदा की बढ़ती घटनाओं के ख़तरों को कम किया जा सके.