जलवायु और पर्यावरण

पाकिस्तान: हरित पुनर्बहाली के लिये स्थानीय ज्ञान का दोहन

संयुक्त राष्ट्र के पिछले जलवायु सम्मेलन - COP26 में जलवायु सम्बन्धी प्रतिबद्धताओं और जलवायु वित्त पर चर्चा के मूल में - अस्थिर विकास का स्वरूप बदलने की मूलभूत आवश्यकता ही थी. जबकि सरकारें वर्ष 2050 और 2070 के लिये लक्ष्य निर्धारित कर रही हैं, बाढ़, भूस्खलन, चट्टानें ख़िसकने, या तूफ़ान की घटनाओं जैसे प्राकृतिक ख़तरों की गम्भीरता बढ़ती जा रही है. ऐसे में, स्थानीय ज्ञान के ज़रिये, सहनसक्षम एवं टिकाऊ पुनर्निर्माण सम्भव हो सकता है. विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के लिये, जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम प्रबन्धन सलाहकार, मिशेल विंगली का ब्लॉग...

श्रीलंका: हरित, सहनसक्षम और समावेशी विकास से सबक़

एक नया विकास प्रतिमान उभर रहा है, जिसका उद्देश्य महामारी के बाद ऐसा आर्थिक सुधार करना है जो अधिक टिकाऊ, सहनसक्षम व समावेशी हो. विश्व बैंक के इस नए दृष्टिकोण को हरित, लचीले और समावेशी विकास, यानि GRID (Green, Resilient and Inclusive Development) का नाम दिया गया है, जिसके तहत जलवायु परिवर्तन, कोविड-19 और असमानता के सम्बन्धित संकटों को समग्र रूप से सम्बोधित करने के लिये भागीदारों को मदद दी जाएगी.

पृथ्वी का तापमान बढ़ाने वाली ग्रीनहाउस गैसों के बारे में पाँच अहम बातें

किसी ग्रीनहाउस में सूर्य का प्रकाश दाख़िल होता है, और गर्मी वहीं ठहर जाती है. ग्रीनहाउस प्रभाव इसी तरह का परिदृश्य पृथ्वी के स्तर पर भी परिभाषित होता है, मगर किसी ग्रीनहाउस में लगे शीशे के बजाय, कुछ तरह की गैसें, वैश्विक तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं.

जलवायु परिवर्तन: ग्रीनलैण्ड की हिम चादरों का पिघलना, लगातार 25वें वर्ष भी जारी रहा

संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुमोदित शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 लगातार ऐसा 25वाँ वर्ष रहा जिस दौरान ग्रीनलैण्ड की महत्वपूर्ण हिम चादर को, पिघलाव के मौसम के दौरान और ज़्यादा नुक़सान हुआ, हालाँकि, उसके बाद सर्दियों के मौसम में कुछ बेहतरी भी हुई.

फ़िलिपीन्स: सुपर टाइफ़ून ‘राई’ के बाद हालात बदतर होने की आशंका

फ़िलिपीन्स के अनेक इलाक़ों को अपनी चपेट में लेने वाले चक्रवाती तूफ़ान, सुपर टाइफ़ून ‘राई’ के गुज़र जाने के कई दिन बाद भी, वहाँ हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. प्रभावित समुदाय सुपर टाइफ़ून के असर से उबर नहीं पाए हैं और विशाल स्तर पर उत्पन्न हुईं बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. 

पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिये प्रयासरत, यूएन एजेंसी की आधी सदी

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना को वर्ष 2022 में, 50 साल पूरे हो रहे हैं. यूएन एजेंसी ने इस अवसर पर, सभी देशों से पृथ्वी के लिये ख़तरा पैदा करने वाले तीन बड़े जोखिमों, जलवायु परिवर्तन, प्रकृति व जैवविविधता की हानि, और प्रदूषण व कचरा से निपटने के लिये विशाल कार्रवाई करने का आहवान किया है.

भारत: प्लास्टिक प्रदूषण को आड़े हाथों लेता एक कार्यकर्ता

सक्रियता से बदलाव सम्भव है. भारत के पूर्वी प्रदेश बिहार में, एक स्काउट और गाइड कार्यकर्ता  ऋतुराज की कोशिशों से प्लास्टिक प्रयोग के बारे में बदलाव लाने और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल रही है. ऋतुराज, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के प्लास्टिक प्रदूषण का मुक़ाबला करने के लिये वैश्विक युवा आन्दोलन, टाइड टर्नर्स चैलेंज के एक सक्रिय प्रचारक हैं.

पहाड़ों पर कूड़े का ढेर - पर्यटन से ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी के बीच पहाड़ी पर्यटन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ, प्लास्टिक प्रदूषण में भी वृद्धि हुई है जिससे, पर्वतीय पारीस्थितिकी तंत्र पर ख़तरा मण्डराने लगा है. स्रोत से समुद्र तक प्रदूषण से निपटने के उद्देश्य से, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने, एलेन मैकआर्थर फाउण्डेशन के सहयोग से ‘वन प्लैनेट नैटवर्क’ के टिकाऊ पर्यटन कार्यक्रम के तहत, ‘वैश्विक पर्यटन प्लास्टिक पहल’ विकसित की. इस पहल के ज़रिये, पर्वतीय प्रदूषण से निपटने के लिये कई अभियान चलाए जा रहे हैं.

2021 पर एक नज़र: जलवायु कार्रवाई, या आँय, बाँय, शाँय?

इस वर्ष, संयुक्त राष्ट्र समर्थित रिपोर्टों और ग्लासगो में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन (कॉप26) में निरन्तर यह कड़ा सन्देश दोहराया गया: मानव गतिविधियों की वजह से जलवायु परिवर्तन, ना केवल तात्कालिक बल्कि पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिये बहुत बड़ा ख़तरा है. क्या जलवायु संकट से निपटने के लिये अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों के सार्थक नतीजे सामने आएँगे?

भारत: वायु प्रदूषण के ख़िलाफ़ प्रदेशों की मुहिम

भारत में वायु गुणवत्ता प्रबन्धन एक क्षेत्रीय मुद्दा है. विश्व बैंक, राज्य-व्यापी स्वच्छ वायु कार्य योजना विकसित करने के लिये, शहर स्तर पर योजना बनाने में उत्तर प्रदेश और बिहार प्रदेशों की  मदद कर रहा है, जिसे पूरे राज्य में विस्तार के लिये उपयोग किया जा सकेगा.