जलवायु और पर्यावरण

अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस: तिहरे पर्यावरणीय संकटों से निपटने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया है कि पृथ्वी पर तीन बड़े संकट – जलवायु व्यवधान, प्रकृति व जैवविविधता की हानि, और प्रदूषण व अपशिष्ट – करोड़ों लोगों के रहन-सहन और वजूद के लिये जोखिम उत्पन्न कर रहे हैं. उन्होंने शुक्रवार, 22 अप्रैल, को ‘अन्तरराष्ट्रीय माँ पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर इन तिहरी आपदाओं से निपटने के लिये महत्वाकांक्षी कार्रवाई का आहवान किया है.

दुनिया के नगरों के भाग्य के साथ जुड़ा है - टिकाऊ विकास

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने गुरूवार को आर्थिक व सामाजिक परिषद (ECOSOC) की एक विशेष बैठक में कहा है कि टिकाऊ विकास का भविष्य, शहरों के भाग्य के साथ जुड़ा हुआ है. साथ ही ये ज़ोर भी दिया गया है कि इस समय दुनिया की लगभग आधी से ज़्यादा आबादी, नगरीय वातावरण में रहती है और ये संख्या वर्ष 2050 तक, बढ़कर क़रीब 70 प्रतिशत होने का अनुमान है.

'बेहतर नियोजन से बदल सकती हैं, अफ़्रीका की जलवायु तकलीफ़े'

विश्व प्रदूषण में, योरोप या अमेरिका जैसे अन्य महाद्वीपों की तुलना में, अलबत्ता अफ़्रीका का बहुत कम योगदान है, फिर भी इस महाद्वीप को जलवायु परिवर्तन का बड़ा असर झेलना पड़ रहा है. इससे विभिन्न इलाक़ों में लगातार सूखा या बाढ़ की समस्या के कारण, खाद्य सुरक्षा और कृषि पर गहरा प्रभाव पड़ता है. संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और अफ़्रीकी जोखिम क्षमता क्लस्टर के महानिदेशक, इब्राहिमा चेइख़ डियोंग ने, हाल ही में दुबई में हुए विश्व उद्यमिता व निवेश फ़ोरम (WEIF) के दौरान, अफ़्रीका के समक्ष जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी जोखिमों पर, यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ बातचीत की. वीडियो रिपोर्ट...

यूनेस्को: स्मारक व स्थल दिवस पर जलवायु कार्रवाई की महत्ता रेखांकित

संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन – यूनेस्को ने सोमवार को अन्तरराष्ट्रीय स्मारक और विरासत स्थल दिवस के अवसर पर आगाह किया है कि इस समय दुनिया भर में हर तीन में से एक प्राकृतिक स्थल और छह में से एक सांस्कृतिक स्थल, जलवायु परिवर्तन के जोखिम का सामना कर रहे हैं.

प्रवाल भित्तियों का वजूद ख़तरे में, यूनेस्को की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने चेतावनी देते हुए कहा है कि विश्व की सर्वश्रेष्ठ ज्ञात प्रवाल भित्तियों को अगर गरम होते समुन्दरों के अनुरूप ढालने के लिये और ज़्यादा प्रयास नहीं किये गए तो वो इस सदी के अन्त तक पूरी तरह से लुप्त भी हो सकती हैं.

विविध पृष्ठभूमि से आए युवजन की जलवायु कार्रवाई में अहम भूमिका

भारत के ओडिशा राज्य की पर्यावरण कार्यकर्ता अर्चना सोरेंग दुनिया भर से चुने गए उन सात युवाओं में शामिल हैं, जिन्हें जलवायु परिवर्तन पर यूएन महासचिव के युवा सलाहकार समूह में चुना गया है. उन्होंने न्यूयॉर्क में अन्य जलवायु कार्यकर्ताओं के साथ हाल ही में यूएन प्रमुख के साथ मुलाक़ात की. अर्चना ने यूएन न्यूज़ हिन्दी के साथ बातचीत में बताया कि पिछले क़रीब दो वर्षों में युवा सलाहकारों के समूह ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई में किस तरह अपना योगदान दिया है...

मनुष्य और ग्रह को स्वस्थ रखने के लिये तुरन्त कार्रवाई की ज़रूरत क्यों?

सात अप्रैल को मनाए जाने वाले इस वर्ष के विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम है - हमारा ग्रह, हमारा स्वास्थ्य. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशिका, डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह का कहना है कि कोविड-19 से सबक़ सीखकर, हमें एक स्वस्थ, निष्पक्ष और हरित दुनिया के निर्माण के लिये तुरन्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है.

जलवायु संकट से निपटने में खेलकूद व एथलीट का नेतृत्व अहम

संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने ‘शान्ति व विकास के लिये अन्तरराष्ट्रीय खेलकूद दिवस’ पर अपने सन्देश में कहा है कि एथलीट, विश्व की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में हैं और अपने प्रबन्धकों, प्रशंसकों व अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर वैश्विक जलवायु कार्रवाई में अहम योगदान दे सकते हैं.    

IPCC: 'तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिये सटीक समय बिल्कुल अभी'

संयुक्त राष्ट्र की सोमवार को जारी एक महत्वपूर्ण जलवायु रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि वर्ष 2010-2019 के दौरान हानिकारक कार्बन उत्सर्जन का स्तर मानव इतिहास में सबसे उच्च रहा है और ये इस बात का सबूत है कि दुनिया विनाश की तरफ़ तेज़ी से बढ़ रही है, ऐसे में यूएन महासचिव ने आगाह किया है कि जैसाकि वैज्ञानिकों का भी तर्क है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिये ये समय, ‘अभी या कभी नहीं’ कार्रवाई करने का है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का वीडियो सन्देश...

दुनिया की लगभग पूरी आबादी, वायु प्रदूषण में साँस लेने को विवश

संयुक्त राष्ट्र के चिकित्सा वैज्ञानिकों ने सोमवार को कहा है कि दुनिया भर की लगभग 99 प्रतिशत आबादी ऐसी प्रदूषित वायु में साँस ले रही है जो अन्तरराष्ट्रीय स्वीकृत सीमाओं से ज़्यादा प्रदूषित है. इससे उनके स्वास्थ्य पर गम्भीर नकारात्मक असर पड़ता है.