जलवायु और पर्यावरण

जलवायु कार्रवाई - सर्वजन को गरिमा, अवसर और समानता वाहन, आमिना जे मोहम्मद

संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद का कहना है कि जलवायु कार्रवाई, सर्वजन के लिये, हरित व समान भविष्य की ख़ातिर, एक बदलाव वाहन बन सकती है. उन्होंने हाल ही में एक TED वार्ता में, सभी जगह के लोगों का आहवान किया कि वो अपने नेतृत्वकर्ताओं से, वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के उनके वादों पर अमल करने की मांग करें.

भारत: गंगा नदी में प्लास्टिक प्रदूषण के ख़िलाफ़ यूनेप की मुहिम

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) ने 2020 में ,एशिया और प्रशान्त क्षेत्र की गंगा और मीकांग नदियों में, प्लास्टिक कचरे के रिसाव की निगरानी और सर्वेक्षण करने के लिये ‘काउण्टरमैज़र परियोजना’ (CounterMEASURE project) शुरू की थी. यह परियोजना जापान से वित्त पोषित है. इसके तहत भारत में, गंगा नदी के किनारे बसे हरिद्वार, आगरा और प्रयागराज (पूर्व इलाहाबाद) शहरों में, प्लास्टिक जमाव और रिसाव वाले मुख्य केन्द्रों की पहचान की जी रही है. पूरी कार्रवाई पर भारत में यूनेप की सम्पादकीय सलाहकार, अनूषा कृष्णन की रिपोर्ट...

यूनेप और भारत के बीच, जलवायु कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिये समझौता

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) और भारत के बीच, दक्षिण एशिया में जलवायु कार्रवाई के लिये बेहतर सामंजस्य बैठाने और अधिक निकटता से कार्य करने के लिये एक समझौता हुआ है. इसे ‘मेज़बान देश समझौता’ कहा जा रहा है.

बांग्लादेश: किसानों के लाभ के लिये जलवायु निवेश ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने सरकारों से, छोटे किसानों की ज़रूरतों को जलवायु वित्तपोषण चर्चाओं के केन्द्र में रखने की अपील की है. वर्तमान में केवल 1.7 प्रतिशत जलवायु वित्त ही विकासशील देशों में छोटे किसानों के पास जाता है, जबकि उनपर जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज़्यादा है. बांग्लादेश के छोटे किसानों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते संकट पर एक वीडियो रिपोर्ट..

कॉप26 ‘कुछ सहमति’ के साथ सम्पन्न, मगर यूएन प्रमुख की नज़र में काफ़ी नहीं

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो में, संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन कॉप26 के दौरान, वार्ताएँ अतिरिक्त एक दिन खिंचने के बाद, शनिवार को, कुछ सहमतियों वाला एक ‘दस्तावेज़’ प्रस्तुत किया गया है. यूएन प्रमुख के अनुसार, इस दस्तावेज़ में, आज के विश्व में मौजूद हित, विरोधाभास और राजनैतिक इच्छाशक्ति की स्थितियाँ झलकती हैं.

कॉप26: अन्तिम चरण की वार्ता का दौर खिंचा, निर्धारित अवधि से लम्बा

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में संयुक्त राष्ट्र का 26वाँ वार्षिक जलवायु सम्मलेन (कॉप26) शुक्रवार को समाप्त होना था, मगर निर्धारित समय पर ख़त्म होने के बजाय अन्तिम चरण की वार्ताओं का दौर अभी जारी है. 

कॉप26: संकल्पों पर पानी फेरती है अरबों डॉलर की जीवाश्म ईंधन सब्सिडी; जलवायु वार्ता में तेज़ी लाए जाने की पुकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने देशों की सरकारों से, कार्बन उत्सर्जन में कटौती, अनुकूलन और वित्त पोषण के विषय में, नपे-तुले अन्दाज़ में ज़्यादा महत्वाकांक्षा दर्शाने पर बल दिया है. स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में कॉप26 सम्मेलन के दौरान महासचिव ने गुरूवार को प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए स्पष्ट किया कि आम सहमति वाले, सबसे निचले स्तर के उपाय पर्याप्त नहीं हैं. 

जलवायु कार्रवाई पर सहयोग के लिये, चीन-अमेरिका के बीच समझौते का स्वागत

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, बुधवार को, चीन और अमेरिका के बीच, जलवायु कार्रवाई में, और ज़्यादा निकट सहयोग करने के लिये हुए एक समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने इस समझौते को, सही दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम क़रार दिया है.

कॉप26: जीवाश्म ईंधन से मुक्त वाहनों के युग पर चर्चा; जलवायु सम्मेलन के निष्कर्ष का मसौदा पेश

एक ऐसी दुनिया जहाँ बेचे जाने वाली हर कार, बस और ट्रक, बिजली-चालित व किफ़ायती हो, जहाँ जहाज़ केवल टिकाऊ ईंधन का इस्तेमाल करें, और जहाँ विमान हरित हाइड्रोजन के सहारे उड़ान भर सकें, ये विज्ञान की एक कल्पना सी प्रतीत होती है, मगर ग्लासगो में हो रहे कॉप26 सम्मेलन के दौरान, अनेक देशों की सरकारों व व्यवसायों ने कहा है कि उन्होंने इसे वास्तविकता में बदलने के लिये काम शुरू कर दिया है. 

कॉप26: जलवायु संकट से सर्वाधिक प्रभावितों में महिलाएँ, चुकाती हैं एक बड़ी क़ीमत

स्कॉटलैण्ड के ग्लासगो शहर में कॉप26 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को, जलवायु परिवर्तन से महिलाओं पर होने वाले असर व जलवायु कार्रवाई में उनकी ज़रूरतों को समाहित किये जाने के मुद्दे पर चर्चा हुई. प्राकृतिक संसाधनों की देखरेख में महिलाओं व लड़कियों के ज्ञान की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है, और उनमें निवेश के ज़रिये, पूर्ण समुदायों तक लाभ पहुँचाया जा सकता है. इस बीच, एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि कॉप26 में विश्व नेताओं की घोषणाओं के बावजूद, दुनिया विनाशकारी तापमान वृद्धि की ओर बढ़ रही है.