वैश्विक

2020: प्रवासियों और शरणार्थियों पर, कोरोनावायरस की घातक मार

वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी का प्रभाव शरणार्थियों और प्रवासियों पर भी बहुत व्यापक रूप में पड़ा; भीड़ भरे शिविरों में, वायरस की चपेट में आने के बहुत बड़े जोखिम से लेकर, यात्राओं पर लगी पाबन्दियों के कारण फँस जाने, और आपराधिक गुटों का निशाना बनने तक... 

नव वर्ष: इम्तेहानों, त्रासदियों और आँसुओं के बाद, आशा की किरणें बिखेरने का सन्देश

दुनिया जब, इम्तेहानों, त्रासदियों और आँसुओं से भरे वर्ष (2020) के बाद एक नए वर्ष 2021 में दाख़िल हो रही है, ऐसे में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नव वर्ष के लिये उम्मीदों से भरा सन्देश जारी किया है. महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 2021 के अपने नव-वर्ष सन्देश में कहा है कि नया वर्ष, पिछले साल द्वारा दिये गए ज़ख्मों को भरने का मौक़ा होना चाहिये.

'वैक्सीनों से कोरोनावायरस महामारी के पूर्ण उन्मूलन की गारंटी नहीं'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने, सोमवार को, वर्ष 2020 की अपनी अन्तिम प्रेस वार्ता में आगाह करते हुए कहा है कि, ज़रूरी नहीं है कि कोरोनावायरस बहुत बड़ा वायरस है, बल्कि दुनिया भर में, एक अन्य, कहीं ज़्यादा गम्भीर महामारी के फैलने की बहुत ज़्यादा सम्भावना है. उन्होंने ये भी कहा कि वैक्सीनों के ज़रिये, इस महामारी के पूरी तरह सफ़ाए की गारंटी नहीं दी जा सकती है.

एक ऐसा वायरस जिसने विश्व को घुटनों पर ला दिया: शिक्षा का संकट

वर्ष 2020 के दौरान, कोविड-19 महामारी से निपटने के उपायों के तहत, दुनिया भर में अनेक स्थानों पर स्कूल भी बन्द करने पड़े हैं, जिसके कारण विश्व भर में बच्चों की शिक्षा में व्यवधान पैदा हुआ. स्कूल खुल और बन्द हो रहे हैं, अलबत्ता कुछ बच्चों को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिये ऑनलाइन माध्यम भी उपलब्ध हैं, जबकि बहुत से बच्चे इससे वंचित हैं. मगर, निस्सन्देह, कमज़ोर हालात वाले बच्चे, तालाबन्दी उपायों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं. इस लेख में, शिक्षा क्षेत्र पर कोविड-19 महामारी के असर के बारे में एक नज़र...

वर्ष 2020: जिसे कोविड-19 ने बिल्कुल उलट-पलट कर दिया...

वर्ष 2020: जिसे कोविड-19 ने बिल्कुल उलट-पलट कर दिया...

कोविड-19, वस्तुतः हर जगह है, और वर्ष 2020 के दौरान, इस महामारी का फैलाव और परिणामस्वरूप इसके प्रभावों ने एक असाधारण दायरे और विशालता वाला असाधारण वैश्विक संकट पैदा कर दिया है. वर्ष 2020 को अलविदा कहने के लिये, यहाँ प्रस्तुत है, महामारी के सन्दर्भ में, संयुक्त राष्ट्र के कामकाज और लोगों के जीवन में उसके महत्व की कुछ झलकियाँ. पिछले 12 महीनों के दौरान हुई प्रमुख घटनाओं पर एक नज़र...

'फ़ेसबुक पर नफ़रत भरी सामग्री से मानव गरिमा के लिये गम्भीर चुनौतियाँ'

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने फ़ेसबुक के निगरानी बोर्ड से, विवादास्पद सामग्री, विशेष रूप में घृणास्पद या नफ़रत फैलाने वाली सामग्री के बारे में कोई फ़ैसला करने से पहले, नस्लीय, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों को और ज़्यादा अहमियत देने का आहवान किया है. 

प्रेस आज़ादी पहले से कहीं ज़्यादा अहम, 59 मीडियाकर्मियों की हत्याओं की निन्दा

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन (UNESCO) ने बताया है कि वर्ष 2020 के दौरान, अभी तक कम से कम 59 मीडियाकर्मी मारे गए हैं, जिनमें चार महिलाएँ भी हैं. संगठन ने बुधवार को ये आँकड़े जारी करते हुए, सूचना प्राप्ति और तथ्यात्मक पत्रकारिता को एक सार्वजनिक अच्छाई के रूप में क़ायम रखने के समर्थन में खड़े होने की पुकार भी लगाई.

शताब्दी के अन्त तक प्रवाल भित्तियों के विलुप्त होने की आशंका

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी नहीं होती, तो सदी के अन्त तक दुनिया की सभी प्रवाल भित्तियाँ यानि कोरल रीफ़ ख़त्म हो जाएँगी. 

संकट में संस्कृति: कोविड-19 के कारण कला जगत पर मंडराया ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने कहा है कि पूरे विश्व में 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार देने वाले सांस्कृतिक क्षेत्र पर, कोरोनोवायरस महामारी के कारण अपेक्षा से अधिक मार पड़ी है. यूनेस्को से मुताबिक इस संकट से उबरने के लिये क्षेत्र को लक्षित नीतियों और कार्रवाई की ज़रूरत है.

कोविड-19 के नए रूप पर सख़्त निगरानी, ब्रिटेन से यात्राओं पर अनेक देशों में रोक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में, कोरोनावायरस के जो अन्य प्रकार या रूप पाए गए हैं, उनके बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल करने के लिये, वैज्ञानिक काम पर जुटे हुए हैं.