वैश्विक

'समाजों का अटूट हिस्सा हैं प्रवासी'

प्रवासी समाजों का अटूट हिस्सा हैं, वो आपसी समझ बढ़ाने और अपने रहने के स्थान व मूल स्थानों - दोनों ही जगह के टिकाऊ विकास में योगदान करते हैं.

सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन सभी के हित में है. प्रवासन मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकताएँ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के ज़रिए सर्वश्रेष्ठ तरीक़े से हासिल होती हैं.

सभी प्रवासियों को अपने सभी मानवाधिकारों की हिफ़ाज़त करने का बराबर अधिकार है.

ये सिद्धांत सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए तैयार किए गए ग्लोबल कॉम्पैक्ट में वर्णित हैं.

फिर भी, हमें प्रवासियों के बारे में ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं जो हानिकारक व झूठी होती हैं.

और हम अक्सर देखते हैं कि तथ्यों पर आधारित होने के बजाय डर के प्रभाव में बनाई गई नीतियों की वजह से प्रवासियों को असीम मुश्किलें उठानी पड़ती हैं.

इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, मैं दुनिया भर में सभी नेताओं और आमजनों से आग्रह करता हूँ कि प्रवासियों के बारे में तैयार किए गए ग्लोबल कॉम्पैक्ट को लागू करें ताकि प्रवासन हम सभी के लिए कारगर साबित हो सके.

सुव्यवस्थित व सुरक्षित प्रवासन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ के अवसर पर कहा है कि तथ्यों के बजाय भय से प्रेरित नीतियों के कारण प्रवासियों ने ऐसी पीड़ाएँ सहन की हैं जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. उन्होंने अपने संदेश अपील की है कि प्रवासन के मुद्दे पर वैश्विक समझौते के लक्ष्यों को वास्तविकता में बदलने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए.

मूल भाषाओं को सहेजना मानव विरासत को सहेजने जैसा

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बांडे ने कहा है कि यूएन के प्रयासों के बावजूद विश्व में आदिवासियों की मूल भाषाएं लुप्त होती जा रही हैं जिसके कारण उनकी पहचान व परंपराओं को ख़तरा पैदा हो रहा है. ‘आदिवासियों की मूल भाषाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय वर्ष' के समापन पर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही है.

विश्व शरणार्थी फ़ोरम: मदद व्यवस्था में जान फूँकने की पुकार

विश्व को शरणार्थियों की परिस्थितियों का सामना करने के तरीक़ों में बदलाव लाने की ज़रूरत है और उन देशों की मदद करने के लिए ज़्यादा क़दम उठाने होंगे जो अपने यहाँ शरणार्थियों को पनाह देते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जिनीवा में विश्व शरणार्थी मंच में मंगलवार को ये पुकार लगाई.

चौथी कमेटी:अनेक दुनियाओं का एजेंडा

एक ऐसी टाइमलाइन जो औपनिवेशिक अतीत से होकर वर्तमान तक पहुँचती है, और जो अंतिम सीमाएँ निर्धारित करने के लिए भविष्य में भी दाख़िल होती है, यही टाइमलाइन संयुक्त राष्ट्र महासभा की सर्वाधिक विविध चौथी कमेटी का परिचय निर्धारित करती है. संयुक्त राष्ट्र महासभा की समितियों के बारे में इस विशेष श्रंखला में इस आलेख में प्रस्तुत है चौथी कमेटी का परिचय. ध्यान रहे कि महासभा 193 देशों के प्रतिनिधियों से मिलाकर बनती है और महासभा का कामकाज समितियों के ज़रिए संचालित किया जाता है.

भ्रष्टाचार: फ़ौलादी इरादों और असरदार कार्रवाई की दरकार

एक ऐसे समय जब टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दुनिया ‘कार्रवाई के दशक’ की ओर क़दम बढ़ाने के लिए तैयार है, सोमवार को आबूधाबी में आयोजित भ्रष्टाचार-विरोधी सम्मेलन में इस समस्या से निपटने के लिए सभी देशों से एकजुट होने का आग्रह किया गया है ताकि महत्वपूर्ण संसाधनों को धन के ग़ैरक़ानूनी लेनदेन में नष्ट होने से रोका जा सके.

रैफ़्यूजी फ़ोरम: शरणार्थियों व मेज़बान देशों के लिए निडर व नवीन उपायों पर ज़ोर

विश्व में शरणार्थियों की संख्या दो करोड़ 60 लाख के आंकड़े पर पहुंच गई है और इस चुनौती की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ राजनयिक, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज की बड़ी हस्तियां सोमवार को जिनीवा में शुरू हुए विश्व शरणार्थी फ़ोरम (Global Refugee Forum) में हिस्सा ले रहे हैं. पहली बार आयोजित हो रही इस बैठक के ज़रिए शरणार्थियों व उन्हें शरण देने वाले समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधानों की तलाश करने पर विचार-विमर्श होगा. 

अरबों बच्चे और व्यस्क - कम पोषण और मोटापे की चपेट में

निम्न और मध्यम आय वाले देशों में से हर तीन में से एक देश में कुपोषण की दो चरम सीमाएँ स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरा पैदा कर रही हैं. ये हैं – कम पोषण और मोटापा. संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी – विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तेज़ी से बदलती खाद्य व्यवस्थाओं से निपटने के लिए नए तरीक़े अपनाने पर ज़ोर दिया है.  

कॉप-25: वार्ताओं में प्रगति, जलवायु महत्वाकांक्षाओं पर निराशा

कॉप-25 में चल रही वार्ताएं अंततः रविवार को समाप्त हो गईं. इनमें निजी क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय सरकारों के स्तर पर ख़ासी प्रगति हुई है. अलबत्ता, जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकाँक्षाएँ बढ़ाने के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं हो सकी जिस पर बड़े पैमाने पर निराशा का माहौल भी देखा गया.

कॉप-25: महत्वाकांक्षा भरा संदेश देने की पुकार

स्पेन के मैड्रिड शहर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (कॉप-25) के अंतिम दिन शुक्रवार को देशों के प्रतिनिधिमंडल देर रात तक पारस्परिक सहमति को अंतिम रूप देने के प्रयासों मे जुटे थे. यूएन प्रमुख ने अपने संदेश में सभी देशों से ज़्यादा महत्वाकांक्षी होने और विज्ञान पर आधारित मज़बूत कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है.