वैश्विक

बाल श्रम के बदतरीन रूपों के ख़िलाफ़ सन्धि पर सार्वभौमिक मोहर

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानि आईएलओ के सभी 187 सदस्य देशों ने दासता, देह व्यापार और तस्करी सहित बाल मज़दूरी के ख़राब रूपों से बच्चों की रक्षा करने वाली सन्धि की सार्वभौमिक पुष्टि कर दी है. वर्ष 2021 को बाल मज़दूरी के अन्त के अन्तरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाए जाने की तैयारी है और इस दिशा में प्रगति के लिये यूएन एजेंसी जागरूकता प्रसार के प्रयासों में जुटी है.  एक रिपोर्ट...

सीसा धातु से 80 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर

यूनीसेफ़ और ‘प्योर अर्थ’ संस्थान की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सीसा धातु एक बड़े पैमाने पर बच्चों को प्रभावित कर रहा है. वैश्विक स्तर पर औसतन हर तीन में से एक बच्चों के रक्त में सीसा धातु का स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे भी ज़्यादा है. इनमें से लगभग आधे बच्चे दक्षिण एशिया में रहते हैं. स्थिति की गम्भीरता को पेश करती ये वीडियो रिपोर्ट...

भुखमरी का बढ़ता दायरा ( वीडियो रिपोर्ट)

संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बीते पाँच वर्षों में भुखमरी व कुपोषण के विभिन्न रूपों का शिकार लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है. कोविड-19 महामारी से यह समस्या और भी ज़्यादा विकराल रूप धारण कर सकती है. एक वीडियो रिपोर्ट...

'असमानता हमारे दौर को परिभाषित करती है' – महासचिव का कड़ा 'मण्डेला दिवस सन्देश'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि असमानता एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे दौर को परिभाषित करता है और इसके कारण दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं व समाजों के तबाह होने का जोखिम पैदा होता है. महासचिव ने शनिवार को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस के मौक़े पर एक कड़े सन्देश में ये बात कही है.

नेलसन मण्डेला की याद में...

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि नेलसन मण्डेला ने हमेशा मानवता व समानता के आदर्शों और सिद्धान्तों के लिए संकल्प दिखाया और वो कहा करते थे कि जब तक दुनिया में ग़रीबी और असमानता बरक़रार है, तब तक हमे आराम नहीं मिल सकता. 18 जुलाई को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर महासचिव का वीडियो सन्देश...

नेलसन मण्डेला पुरस्कार: मानव सेवा में समर्पित ग्रीस और गिनी के कार्यकर्ता सम्मानित

कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद के लिये वर्षों से प्रयासरत ग्रीस की मारियाना वार्दिनॉयॉनिस और महिला जननांग विकृति का ख़ात्मा करने की मुहिम में अहम भूमिका निभाने वाले गिनी के डॉक्टर मॉरिसाना कोयाते को वर्ष 2020 के नेलसन मण्डेला पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की घोषणा की गई है. हर पाँचवे वर्ष में दिये जाने वाले मण्डेला पुरस्कार के ज़रिये मानवता की सेवा में जुटे कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाता है.

यूएन की भूमिका की कुछ झलकियाँ

संयुक्त राष्ट्र हर साल एक छोटे आकार का कार्ड प्रकाशित करता है, जिसमें दस सरल उदाहरणों के ज़रिये ये बताया जाता है कि इस वैश्विक संगठन ने दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में कैसे मदद की. संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर इस वर्ष, इसमें एक ग्यारहवीं वजह भी जोड़ी गई यानि कोविड-19 महामारी से मुक़ाबला.

 

देखें वीडियो फ़ीचर...

यूएन चार्टर: चुनौतीपूर्ण दौर में संयुक्त राष्ट्र के मज़बूत स्तम्भ की 75वीं वर्षगाँठ

दशकों पहले युद्ध की विभीषिका और बर्बादी झेल रही दुनिया में संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने नियम आधारित व्यवस्था, शन्ति और आशा का संचार करने में अहम भूमिका निभाई थी. यूएन चार्टर पर हस्ताक्षर के 75 वर्ष पूरे होने पर महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक महामारी, विषमता व हिंसा की चुनौतियों के बीच चार्टर के मूल्यों और शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व की अवधारणा की प्रासंगिकता बनी हुई है. 

कोविड-19: यूएन की जवाबी कार्रवाई पर रिपोर्ट जारी, पुनर्बहाली का रोडमैप 

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण विश्व में भारी उथलपुथल हुई है और स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक व सामाजिक जीवन व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ है. संयुक्त राष्ट्र इन हालात में लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने, वायरस पर क़ाबू पाने और आर्थिक संकट के दंश को कम करने के लिए अनेक मोर्चों पर मज़बूती से प्रयासों में जुटा है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोरोनावायरस संकट पर यूएन द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई पर गुरूवार को रिपोर्ट जारी करते हुए ये जानकारी दी है.  रिपोर्ट डिजिटल माध्यमों से जारी की गई है. 

यूएन चार्टर: रहनुमा

 विश्व में मौजूद चुनौतियों के सामने डटकर खड़ा होना तो ज़रूरी है, मगर समस्याओं का हल निकलाना भी उतना ही ज़रूरी है. और ये रहनुमाई मुहैया कराता है संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिस पर 75 वर्ष पहले दस्तख़त किये गए थे. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 26 जून को यूएन चार्टर दिवस के मौक़े पर वीडियो सन्देश में कहा है कि चार्टर के सिद्धान्त आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं...