वैश्विक

बदलती दुनिया में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा

पक्षियों, मछलियों व स्तनपायी जानवरों सहित वन्यजीवों की कई प्रजातियां भोजन व प्रजनन के लिए हर साल अपने ठिकानों से दूर अन्य स्थानों व देशों का रुख़ करती हैं. जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता घटने के इस दौर में ऐसी प्रजातियों का ख़याल किस तरह रखा जा सकता है, इसी विषय पर प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (CMS) के 13वें सम्मेलन, कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13 में विचार-विमर्श हो रहा है. ये कॉप-13 सम्मेलन भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित हो रहा है.

'रेडियो लोगों को आपस में जोड़ता है'

ख़बरों, विस्तृत कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण सूचनाओं के एक आसान स्रोत के रूप में रेडियो की पहचान सर्वविदित है. आम लोगों के साथ संवाद में रेडियो की महत्ता को पहचान देने के लिए हर वर्ष 13 फ़रवरी को रेडियो दिवस मनाया जाता है. महासचिव का संदेश...

रेडियो: संवाद व विविधता को प्रोत्साहन देने का सशक्त माध्यम

तेज़ी से अपना स्वरूप बदल रही मीडिया में रेडियो अब भी एक ऐसा माध्यम है जिसमें लोगों को एकजुट करने और समुदायों के लिए महत्वपूर्ण ख़बरें व जानकारी उपलब्ध कराने की ताक़त है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘विश्व रेडियो दिवस’ पर अपने संदेश में रेडियो को एक ऐसा पथ-प्रदर्शक माध्यम बताया है जो विविधता को बढ़ावा और विश्व शांति में योगदान देता है.

टिकाऊ फ़ैशन है मौजूदा दौर की ज़रूरत

कपड़े बनाने में बहुत सारे रसायनों और पानी का इस्तेमाल होता है जो पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है. फ़ैशन उद्योग क़रीब 10 फ़ीसदी कार्बन उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार है. “सस्टेनेबेल फ़ैशन” यानी टिकाऊ फ़ैशन, एक उभरती हुई अवधारणा है जिसके तहत परिधान इस तरह से डिज़ाइन किए जाते हैं ताकि पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक हितों का ख़याल रखा जा सके. सस्टेनेबल फ़ैशन डिज़ाइनर रूना रे ‘ग्रीन फ़ैशन’ की एक बड़ी पैरोकार हैं और परिधानों के कार्बन फ़ुटप्रिंट घटाने व टिकाऊ फ़ैशन के लिए अपने अनुभव संयुक्त राष्ट्र में भी साझा कर चुकी हैं. पेश है यूएन हिन्दी न्यूज़ के साथ एक ख़ास बातचीत.

यूएन-75 संवाद में सब आमंत्रित

'संयुक्त राष्ट्र 75' संवाद शुरू हो गया है. बुधवार, 29 जनवरी को यूएन मुख्यालय में एक अनोखी महफ़िल जमी जिसमें मुख्य मंच युवाओं के लिए उपलब्ध रहा. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भी इस महफ़िल में शिरकत की मगर उन्होंने कहा कि कोई भाषण देने के बजाय, वो यहाँ युवाओं की बात सुनने के लिए आए हैं. इस सभा में युवा प्रतिनिधियों ने भविष्य के लिए अपनी महत्वाकांक्षी रूपरेखा के बारे में बात की जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग व सभी की बात को सुना जाना अहम बताया गया.

यूएन-75 संवाद शुरू: सभी हैं शिरकत के लिए आमंत्रित

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के 75वें वर्ष में वैश्विक चुनौतियों के समाधान की तलाश करने के लिए लोगों की आवाज़ सुने जाने के प्रयासों के तहत बुधवार को न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में युवा प्रतिनिधियों ने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के साथ एक संवाद में हिस्सा लिया. इस सभा में युवा प्रतिनिधियों ने भविष्य के लिए अपनी महत्वाकांक्षी रूपरेखा के बारे में बात की जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग व सभी की बात सुना जाना अहम बताया गया.

जयपुर साहित्य महोत्सव में जलवायु मुद्दा भी चर्चा में

संयुक्त राष्ट्र ने भारत की गुलाबी नगरी जयपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव की पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन से तत्काल निपटने की अहमियत को फिर दोहराया है. भारत में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर रेनाटा डेज़ालिएन ने जलवायु आपात स्थिति पर एक सत्र के दौरान बताया कि जलवायु संकट पर असरदार कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र अपनी सीमाओं से परे जाकर प्रयासों में जुटा है.

हॉलोकॉस्ट जैसी घटना फिर ना हो, 'इतिहास से सबक़ ज़रूरी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि बढ़ती नफ़रत और यहूदी-विरोधी हमलों में तेज़ी के इस दौर में दुनिया को इतिहास से सबक़ लेना होगा ताकि यहूदी जनसंहार – हॉलोकॉस्ट – जैसी भयवाह घटना फिर ना दोहराई जा सके. यूएन प्रमुख ने पोलैंड में आउशवित्ज़-बर्केनाउ यातना शिविर को मुक्त कराए जाने के 75 साल पूरे होने और 60 लाख से ज़्यादा यहूदियों और अन्य लोगों के जनसंहार की याद में न्यूयॉर्क में आयोजित एक स्मरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही.

तैरते शहरों की दुनिया की संभावना

ये विचार कई दशकों से घूम रहा है कि क्या सूखी धरती की सीमाओं से दूर समुद्रों की सतह पर तैरती हुई दुनिया बस सकती है. कुछ वैज्ञानिकों ने इस विचार पर काम किया और बताया कि ये संभव है. तो क्या भविष्य में समुद्र भी रहने के स्थान बन सकेंगे. एक जायज़ा...

विश्व को ‘युद्ध की विभीषिका’ से बचाने का दस्तावेज़ है - यूएन चार्टर

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भू-राजनैतिक तनावों के बढ़ने और देशों के बीच दरकते भरोसे के इस दौर में सदस्य देशों को यूएन चार्टर के मूल्यों की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित किया है. उन्होंने यूएन चार्टर को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक निर्धारक दस्तावेज़ क़रार दिया जिसके मूल में अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा है.