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अफ़ग़ानिस्तान में 'भयावह' हमलों की कड़ी निंदा, दोषियों को सज़ा की माँग

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के एक अस्पताल में हुए भयावह हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. मंगलवार को दो अलग-अलग हमलों मे कम से कम 38 लोगों की मौत हुई है जिनमें कुछ बच्चे भी हैं. यूएन प्रमुख ने देश में हिंसक घटनाओं में तेज़ी आने पर चिंता जताई है और कहा है कि हालात पर नज़र रखी जा रही है.

 

 

कोविड-19; साइबर सुरक्षा को पुख़्ता बनाने के उपायों पर चर्चा

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया एक बड़े संकट से जूझ रही है और इस माहौल में ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भरता बढ़ी है लेकिन साइबर अपराध और बाल शोषण जैसे ख़तरे भी पैदा हो गए हैं. इनकी गंभीरता के मद्देनज़र कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन माध्यमों पर बचाव व सुरक्षा के विषय पर अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने हाल ही में एक वेबिनार आयोजित की जिसमें डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाने, ऑनलाइन माध्यमों पर सुरक्षा बढ़ाने और युवा पीढ़ी को साइबर जोखिमों से बचाने के समाधानों पर चर्चा हुई. 

कोविड-19: जवाबी कार्रवाई और वैश्विक एकजुटता में धर्मगुरुओं की अहम भूमिका

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 की आँच में झुलस रही दुनिया को राहत दिलाने में धार्मिक नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन चार प्रमुख क्षेत्रों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है जिनमें एकजुट कार्रवाई को बढ़ावा देने में धर्मगुरू अपना सहयोग दे सकते हैं. 

कोविड-19: ‘टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर तत्काल कार्रवाई’ और भी ज़्यादा ज़रूरी

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में भारी उथलपुथल का माहौल है और लोगों का जीवन व आजीविका बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की जिसमें महामारी के असर को कम करने के लिए बहुपक्षीय समाधानों और 17 टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने के रास्तों की तलाश करने पर चर्चा हुई. 

कोविड-19: एचआईवी के ख़िलाफ़ लड़ाई के कमज़ोर पड़ने की आशंका

कोविड-19 महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाले व्यवधान को अगर दूर नहीं किया गया तो एचआईवी से निपटने में अब तक हुई प्रगति जोखिम में पड़ जाएगी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और एड्स मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था (UNAIDS) के ताज़ा अनुमान के मुताबिक ज़रूरी इलाज के अभाव में एड्स-सम्बन्धी बीमारियों से लाखों की संख्या में अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं.   

कोविड-19: तालाबन्दी ढिलाई में सतर्कता बनाए रखना अहम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोरोनावायरस संक्रमण के फैलाव की रफ़्तार सख़्त उपायों की मदद से घटाने और लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाने में काफ़ी हद तक सफलता मिली है लेकिन इसकी एक बड़ी क़ीमत भी चुकानी पड़ी है. तालाबन्दी से सामाजिक व आर्थिक जीवन व्यापक पैमाने पर प्रभावित हुआ है. यूएन एजेंसी के प्रमुख ने कहा है कि जीवन को फिर से पटरी पर लाते समय सावधानी बरतना और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को सक्षम बनाए रखना अहम होगा.  

कोविड-19: यात्रा पाबन्दियों के कारण पर्यटन में पसरा सन्नाटा

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में तालाबन्दी और अन्य सख़्त पाबन्दियाँ लागू हैं. विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) का नया विश्लेषण दर्शाता है कि विश्व भर में हर पर्यटक स्थल पर यात्रा सम्बन्धी पाबन्दियाँ बरक़रार हैं जबकि 72 फ़ीसदी पर्यटक स्थलों ने अपनी सीमाएँ अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन के लिए पूरी तरह बन्द कर दी हैं. 

नगरीय ग़रीबों को भोजन की उपलब्धता बेहद ज़रूरी नहीं तो...

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी – खाद्य और कृषि संगठन ने आगाह करते हुए कहा है कि अगर शहरी इलाक़ों में ग़रीबों और कमज़ोर हालात में जीने वाले लोगों के लिए भोजन सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समय पर ठोस क़दम नहीं उठाए गए तो उन इलाक़ों में भुखमरी और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. लैटिन अमेरिका में मौजूदा तालाबन्दी और आपूर्ति वग़ैरा पर लगे प्रतिबन्धों के बावजूद बहुत से शहर ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति व उपलब्धता जारी रखने के लिए अनेक उपाय कर रहे हैं.

प्रवासी पक्षियों की दुनिया

दुनिया भर में ऐसे हज़ारों-लाखों पक्षी हैं जिनकी फ़ितरत प्रवासी है, यानि वो अपने अस्तित्व के लिए किसी एक जगह नहीं ठहर सकते और प्रवासन के लिए अक्सर हज़ारों मील का सफ़र तय करते हैं, अक्सर अदृश्य रास्तों से. ये एक अनोखी दुनिया है कि प्रवासी पक्षी किस तरह अपनी ज़िन्दगी जीते हैं. एक झलक पेश करती ये वीडियो जिसका फ़िल्मांकन कुछ समय पहले  किया गया था, और अब इसे नए अंदाज़ में पेश किया गया है...

'नाज़ियों की हार के 75 वर्ष बाद, आज भी बहुत से लोग युद्ध की विभीषिका में हैं'

संयुक्त राष्ट्र हर वर्ष 8 और 9 मई को उन लाखों लोगों को याद करता है जिनकी ज़िन्दगी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ख़त्म हो गई थी. उस भीषण तबाही वाले संघर्ष के बाद ही संयुक्त राष्ट्र वजूद में आया था. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार, 8 मई को एक वीडियो संदेश में आगाह करते हुए कहा कि मतभेद अब भी मौजूद हैं, और उन्होंने एक ऐसी दुनिया बनाने की पुकार लगाई जिसकी बुनियाद शान्ति व एकता पर टिकी हो.